झारखंड की राजधानी क्या है – Capital of Jharkhand in Hindi

झारखंड की राजधानी का नाम रांची है। झारखंड राज्य के गठन से पहले रांची अविभाजित बिहार की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती थी। रांची को झारखंड की राजधानी बनाए जाने के पीछे कारण यह था कि कई दशकों से रांची झारखंड को बिहार से अलग करने के लिए होने वाले राजनैतिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करती थी। इसके अलावा बिहार की गर्मियों की राजधानी के रूप में भी रांची शहर राजनैतिक रूप से बहुत सक्रिय था। रांची शहर झारखंड राज्य का सबसे बड़ा शहर भी है। इन्ही विशेषताओं के कारण रांची को झारखंड की राजधानी बनाया गया।

जलप्रपातों का शहर के रूप में मशहूर रांची को झारखंड की राजधानी बनाए जाने के बाद रांची जिले का भाग्य काफी बदल गया और यहाँ चहुंमुखी विकास होने लगा। रांची जिला दक्षिण छोटानागपुर डिवीजन से जुड़ी इकाइयों में से एक है और इसका मध्य भाग है। हालांकि कुछ नए जिलों के बनने से रांची जिले के भौगोलिक क्षेत्र में पिछले दो दशकों के दौरान कई बदलाव आए हैं।

तीन करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले झारखंड राज्य की राजधानी रांची, प्रशासनिक रूप से, रांची और बुंदू दो उपखंडों में विभाजित है और प्रत्येक उपखंड को आगे ब्लॉक, पंचायत और गांवों में विभाजित किया गया है।

रांची का पुराना नाम क्या था ?

रांची जिले का पुराना नाम लोहरदगा (Lohardaga) था क्योंकि इस जिले का मुख्यालय लोहरदगा था। लोहरदगा जिले का निर्माण 1831-32 में किया गया था। किन्तु 1899 में एक छोटे से गाँव के नाम पर इस जिले के मुख्यालय का नाम लोहरदगा से रांची बदल दिया गया।

रांची का संक्षिप्त इतिहास

  • प्राचीन काल में जो स्थान रांची जिले का क्षेत्र था और आस पास का क्षेत्र, मुंडा और ओरांव जनजातियों के कब्जे में था। आर्य इस क्षेत्र को झारखंड या ‘वन क्षेत्र’ के रूप में जानते थे। हालाँकि, इतिहासकारों का ऐसा अनुमान है कि महाभारत काल में राजगृह के शक्तिशाली सम्राट जरासंध ने शायद इस क्षेत्र पर किसी तरह का नियंत्रण जरूर स्थापित किया होगा। इसी तरह, मगध के महापद्मनाद उग्रसेन, जिसने उड़ीसा तक के पूरे उत्तर भारत को अपने अधीन कर लिया था, हो सकता है कि झारखंड पर भी उसका कुछ नियंत्रण रहा हो। संभवतः, मौर्य सम्राट अशोक के शासनकाल (273-232 ई.पू.) के दौरान मगध साम्राज्य में इस क्षेत्र को शामिल किया गया था।
  • माना जाता है कि छोटानागपुर के राज की स्थापना पांचवीं शताब्दी में गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद हुई थी। छोटनागपुर के राज का पहला राजा फणीमुकुट को चुना गया था। ऐसा कहा जाता है कि फणीमुकुट एक नाग (सांप) के संरक्षण में एक तालाब के किनारे पाया गया था इसलिए उसके द्वारा स्थापित राजवंश का नाम नाग राजवंश पड़ा।
  • छोटानागपुर पठार को मुस्लिम इतिहासकारों द्वारा झारखंड के नाम से संबोधित किया गया है। 1526 तक तुर्क-अफगान अवधि के दौरान यह क्षेत्र बाहरी प्रभाव से लगभग मुक्त रहा। किन्तु दिल्ली में मुग़ल बादशाह अकबर के शासन की शुरुआत के साथ ही मुस्लिम प्रभाव भी झारखंड की राजनीति और सामाजिक जीवन में प्रवेश करने लगा। अकबर के शासन काल के समय में रांची और झारखंड को कोकराह (Kokrah ) के नाम से जाना जाता था। आइन-ए-अकबरी के अनुसार अकबर ने छोटानागपुर के राजा को अपने अधीन करने के लिए शाहबाज़ खान के नेतृत्व में मुगल सेना भेजी थी। इस अभियान के बाद झारखंड को मुग़ल साम्राज्य के बिहार सूबे में शामिल कर लिया गया था।
  • किन्तु 1605 में अकबर की मृत्यु के बाद रांची और झारखंड के क्षेत्र ने अपने आप को स्वतंत्र घोषित कर दिया था। इस घटना के बाद 1616 में बिहार के गवर्नर इब्राहिम खान फतेह जंग ने छोटानागपुर के 46वें राजा दुर्जन साल को हराकर गिरफ्तार कर लिया। किन्तु उसे बाद में मुग़ल शहंशाह द्वारा रिहा कर दिया गया। इस घटना के बाद मुग़ल सम्राटों और झारखंड के कोकरा प्रमुखों के बीच संबंध कुछ हद तक दोस्ताना और शांतिपूर्ण रहे। किन्तु नियमित रूप से रु 6,000 का नजराना इन सरदारों को मुग़ल शहंशाह को देना पड़ता था। 1632 में छोटानागपुर के क्षेत्र को बिहार के राज्यपाल को जागीर के रूप में दे दिया गया।
  • झारखंड के क्षेत्र पर पहली बार ब्रिटिश प्रभाव तब शुरू हुआ जब बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी को मुग़ल सम्राट शाह आलम द्वितीय ने 1765 में ईस्ट इंडिया कंपनी को दिया था। इस दीवानी में छोटानागपुर को बिहार के हिस्से के रूप में  शामिल किया गया था।
  • ब्रिटिश प्रभाव में आने के बाद रांची ने कई ईसाई मिशनों को आकर्षित किया। इन ईसाई मिशनों ने जिले में शिक्षा के विकास में योगदान दिया है। रांची जिले में सबसे पहले ईसाई मिशनरी 1845 में पहुँचे और ईसाई धर्म में जनजातीय आबादी का पहला रूपांतरण या धर्मांतरण 1850 में हुआ था।
  • 1857 के प्रसिद्ध भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में भी इस जिले का बहुत योगदान है। हजारीबाग में तैनात रामगढ़ बटालियन की 7 वीं और 8 वीं नेटिव कंपनियाँ 30 जुलाई 1857 को विद्रोह में उतरीं थीं। बिरसा मुंडा द्वारा मुंडा विद्रोह भी इसी भूमि से संचालित हुआ था। इस जिले ने भारत के राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गणेश चंद्र घोष के मार्गदर्शन में रांची क्रांतिकारी विचारधारा के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया था। वर्तमान में झारखंड राज्य में 24 जिले हैं।

रांची में स्थित प्रमुख उद्योग/सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम

रांची जिले में ना केवल प्राकृतिक और खनिज संसाधनों की प्रचुरता है बल्कि यहाँ कई प्रमुख उद्योग और व्यापारिक केन्द्रों की भी स्थापना हुई है। इस क्षेत्र में वन और खनिज संसाधनों के अच्छे भंडार की उपस्थिति के कारण कई प्रमुख उद्योग स्थापित किए गए हैं।

  1. भारी इंजीनियरिंग निगम, धुरु,रांची
  2. सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड,रांची
  3. मेटलर्जिकल कंसल्टेंट लिमिटेड,दोरांडा, रांची
  4. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड,हिनो, रांची
  5. रांची अशोक बिहार होटल कॉर्पोरेशन लिमिटेड,डोरंडा, रांची
  6. भारत संचार निगम लिमिटेड, रांची
  7. रांची में मेजर स्टेट पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स
  8. सिकिडिरी हाइड्रो पावर प्लांट (झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड), रांची
  9. रांची औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण, रांची
  10. झारखंड राज्य पर्यटन विकास निगम, रांची
  11. झारखंड राज्य जनजातीय विकास निगम, रांची
  12. झारखंड राज्य अनुसूचित जनजाति विकास सहकारी समिति, रांची
  13. झारखंड सरकार टूल रूम एंड ट्रेनिंग सैंटर, तातिसिल्वा रांची

रांची जिले से संबन्धित कुछ प्रमुख तथ्य

  • रांची झारखंड का सबसे अधिक जनसंख्या वाला जिला है। 2011 की जनगणना के अनुसार रांची जिले की जनसंख्या 29,14,253 थी।
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से रांची झारखंड का तीसरा सबसे बड़ा जिला (5097 वर्ग किमी क्षेत्रफल) है। झारखंड का सबसे बड़ा भौगोलिक क्षेत्रफल वाला जिला पश्चिमी सिंहभूम जिला (7224 वर्ग किमी क्षेत्रफल) है।
  • रांची में लोकसभा की एक और विधानसभा की 9 सीटें हैं।
  • 2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले का लिंगानुपात 949 और जनसंख्या घनत्व 572 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था।
  • रांची जिले का तामार सबसे अधिक आबादी वाला गाँव (12,345) है जबकि गोबिंदपुर इस जिले का सबसे कम आबादी वाला गाँव (25) है।
  • रांची जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती या संबंधित कार्यों पर निर्भर करती है। कुल श्रमिकों के 51% से अधिक व्यक्ति प्राथमिक क्षेत्र में लगे हुए हैं।
  • रांची जिले का स्मार्ट सिटी के रूप में विकास किया जा रहा है।
  • रांची जिले की प्रमुख भाषा हिन्दी है और अधिकतर लोग हिन्दी में बोलचाल करते हैं। यहाँ का प्रमुख धर्म हिन्दू है।

भारतीय क्रिकेट टीम का कौन सा मशहूर खिलाड़ी रांची से संबंध रखता है?

महेंद्र सिंह धोनी रांची से संबंध रखते हैं। वे भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान भी हैं। 2011 क्रिकेट विश्व कप विजेता भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ही थे।

Arvind Patel

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