जोधाबाई की मृत्यु कब और कैसे हुई थी । 

जोधाबाई महान मुग़ल सम्राट अकबर की सबसे प्रिय रानी थी। अकबर ने जोधबई को मरियम-उज़-ज़मानी का नाम दिया था। किन्तु जोधबई का विवाह से पूर्व नाम हरखान चंपावती, हरखान बाई और हीर कुँवर था। जोधबई का सारा जीवन अकबर के साथ ही बीता था और वो अकबर की एक मात्र ऐसी बीवी थी जिससे अकबर को उसका उत्तराधिकारी पुत्र प्राप्त हुआ था। अपने पति और मुग़ल शहंशाह अकबर की 1605 में मृत्यु के बाद भी अगले 18 वर्षों तक जोधबई जीवित रहीं। जोधाबई की मृत्यु 19 May 1623 के दिन 80 वर्ष की उम्र में आगरा के किले में हुई थी।

jodha bai ki mrityu kaise hui

ऐतिहासिक सूत्रों के अनुसार जोधाबई की मृत्यु 1623 में प्राकृतिक रूप से हुई थी और वो अपनी पूरी उम्र जी कर मरीं थीं। जोधबई की मृत्यु के पश्चात उनकी इच्छा के अनुसार उन्हे अकबर की कब्र के पास दफनाया गया था।

जोधाबाई का जन्म राजस्थान के कछवाहा राजपूत राजा बिहारी मल के यहाँ 1542 में हुआ था। बिहारी मल जयपुर के राजा थे। जोधाबई का अकबर से 6 फ़रवरी 1562 में विवाह के पश्चात जब उनके पुत्र जहांगीर का जन्म हुआ था तब अकबर ने जोधाबाई को परंपरा के अनुसार मरियम-उज़-ज़मानी का नाम दिया था। अकबर के जोधाबाई से विवाह के पश्चात अकबर के राजनीतिक और सामाजिक निर्णयों में हिन्दू धर्म के लोगों के लिए नम्रता और सहानुभूति दिखाई देती है। जोधाबाई न केवल एक सुंदर राजकुमारी थीं बल्कि राजनीतिक और धार्मिक समझ रखने वाली कुशल स्त्री भी थीं। जोधाबाई अकबर से विवाह के पश्चात भी हिन्दू धर्म को मानती थीं और उन्हे इस विषय में पूरी आजादी थी। अकबर का हिंदुओं के प्रति दृष्टिकोण निर्धारित करने में जोधाबाई का अहम योगदान था। किन्तु दूसरी ओर अकबर ने भी जोधाबाई में इस्लाम धर्म की समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जोधाबाई ने पूरे मुग़ल साम्राज्य में कई मस्जिदों, बगीचों और सामाजिक स्थलों का निर्माण कराया था।

अकबर और बाद में जहांगीर के शासनकाल में जोधाबाई का मुग़ल दरबार और प्रशासन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान था और उनके पास शाही आदेश जारी करने का भी अधिकार था। जोधाबाई सबसे अधिक समय तक राज करने वाली मुग़ल महारानी थीं। मरियम-उज़-ज़मानी ने पूरे 43 वर्षों तक अकबर के शासनकाल के दौरान महारानी के रूप में शासन किया था।

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