कोंकण तट कहां से कहां तक स्थित है।

कोंकण तट भारत का एक अत्यंत ही सुंदर तट है। कोंकण तट की सीमा उत्तर में दमन से लेकर दक्षिण में गोवा तक फैला हुआ है। कोंकण तट की कुल लंबाई 720 किलोमीटर है। इसका कुल क्षेत्रफल 3907 वर्ग किलोमीटर है। कोंकण तट में महाराष्ट्र और गोवा के तटीय जिले आते हैं। इसके ज्यादातर हिस्सों में साल एवं सागौन के वृक्ष फैले हुए है। यह तट भारत के पश्चिमी तटीय मैदान के अंतर्गत आता है। भारत का पश्चिमी तटीय मैदान अरब सागर और पश्चिमी घाट के बीच स्थित है। भारत का पश्चिम तटीय मैदान का विस्तार गुजरात से लेकर केरल के कन्याकुमारी तक है।

konkad tat kaha se kaha tak hai

कोंकण तट की कुल लंबाई 1400 किलोमीटर है। इसकी चौड़ाई 10 से 80 किलोमीटर तक है। इसकी सबसे ज़्यादा चौड़ाई गुज़रात के नर्मदा और ताप्ती नदी की मुहाने पर है। इसकी ऊंचाई समुन्द्र के स्तर से 150 मीटर से 300 मीटर तक की है। पश्चिम तटीय मैदान भारत के पूर्वी तटीय मैदान के मुक़ाबले छोटे हैं। इसके अतिरिक्त ये पूर्वी तटीय मैदान की तरह उपजाऊ नही है, क्योंकि पश्चिमी तटीय मैदान एक जैसा समतल नहीं है। यहां ज़्यादातर क्षेत्र में पहाड़ है, इसके अतिरिक्त यहां बहुत सारे छोटे-छोटे लैगून भी हैं, ( भू-भाग से चारो तरफ से घिरे समुन्द्र के पानी को लैगून कहते हैं) इसलिए पश्चिमी तटीय मैदान ज़्यादा उपजाऊ नहीं है।

भारत के पश्चिमी तटीय मैदान की सीमाएं भारत के मुंबई, गुज़रात, गोवा, कर्नाटक, और केरल राज्य से लगती है।

भारत के पश्चिमी तटीय मैदान को मुख्य रूप से 4 भागों में बांटा गया है। जो इस प्रकार है।

  • गुज़रात का तटीय मैदान
  • कन्नड़ का तटीय मैदान
  • कोकड का तटीय मैदान
  • मालाबार का तटीय मैदान

पूर्वी तटीय मैदान के मुकाबले पश्चिमी तटीय मैदान छोटा क्यों है ?

भारत के कुल तटीय मैदान का विस्तार गुज़रात के अरब सागर से लेकर पश्चिम बंगाल की बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ है। अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैले कुल तटीय मैदान को पश्चिमी तटीय मैदान और पूर्वी तटीय मैदान में बांटा गया है। पूर्वी तटीय मैदान का विस्तार पश्चिम बंगाल से लेकर कन्याकुमारी तक है। जबकि पश्चिमी तटीय मैदान का विस्तार गुज़रात से गोवा तक है।

भारत का पश्चिमी तटीय मैदान भारत के पूर्वी तटीय मैदान के मुकाबले बहुत छोटा है।

ऐसा इसलिए है, क्योकि पूर्वी तटीय मैदान की ज़्यादातर बड़ी-बड़ी नदियां बंगाल की खाड़ी की ओर प्रवाहित होती है। लेकिन ढ़लान कम होने के कारण नदियों की प्रवाह कम हो जाता है। जिसके कारण ये नदियां बंगाल कि खाडी में मिलने से पहले ही समुन्द्र की लहरों से टकरा कर सैकड़ो हिस्सों में बंट जाती है, जिससे सैकड़ों डेल्टाओं का निर्माण होता है। समुन्द्र का पानी इन डेल्टा को अपने साथ बहा लेते हैं, जिससे विशाल तट का निर्माण होता है। जबकि पश्चिमी तटीय मैदान में ऐसा नही है, यहां ढ़लान ज़्यादा होने के कारण नदियों के धाराओं का प्रवाह अधिक तीव्र होता है। जिसके कारण यहां की नदियां अरब सागर में मिलने से पहले डेल्टा का निर्माण नहीं कर पाती है। इसके अतिरिक्त पश्चिम तटीय मैदान में लैगून ज़्यादा होते हैं। यही कारण है, कि पश्चिमी तटीय मैदान भारत के पूर्वी तटीय मैदान के मुकाबले छोटा है।

  • कोंकण तट पर्यटन स्थलों की दृष्टिकोण से

पश्चिम तटीय मैदान पर स्थित कोंकण तट पर्यटन स्थलों की दृष्टि से बहुत ही सुंदर है। यहां की बीच, झीलें, डेल्टा इत्यादि पर्यटकों को बहुत लुभाती है। यहां के बीचों में देवगड बीच और गणपतिपुले बीच बहुत ही सुंदर और प्रसिद्ध बीच है। देवगड बीच पिकनिक स्थल के तौर पर लोगों का ज़्यादा पसंदीदा बीच है। यह बीच विजयदुर्ग Fort से 30 किलोमीटर जबकि रत्नागिरि से 101 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहीं ये देवगड बस स्टैंड से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर है।

वहीं गणपतिपुले बीच की बात करें तो, ये बीच भी अत्यंत ही सुंदर और शांत वातावरण वाला बीच है। यह बीच couples का पसंदीदा बीच है। इसके अतिरिक्त यहां पे स्वयंभू गणेश मंदिर होने के कारण तीर्थ यात्रियों का भी यहां तांता लगा रहता है। इस बीच का पानी बहुत स्वच्छ रहता है, और ये बीच वनस्पतियों के मामलें में भी काफी समृद्ध माना जाता है। यहां पर मैंग्रोव और नारियल के पेड़ ज़्यादा पाए जाते हैं ( मैंग्रोव एक तरह का पेड़ होता है, जो मुख्य रूप से खारे पानी के तटीय छेत्र में पाए जाते हैं)। गणपतिपुले बीच पुणे से 331 किलोमीटर और कोल्हापुर से 144 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

Leave a Reply