कोरी निवेशका कहां स्थित है ?

कोरी निवेशका को अंग्रेज़ी में Kori Creek कहते हैं। संक्षेप में बताते चलें कि कोरी निवेशका यानी Kori Creek किसे कहते हैं। Creek समुद्र तथा जमीनी क्षेत्र को जोड़ने वाले एक नाले को कहते हैं। Creek समुद्र से उसके आसपास के Island या डेल्टा पर पानी ले जाता है। ऐसा ही एक Creek, Kori Creek भी है। यह कोरी निवेशका भारत के गुजरात राज्य में स्थित कच्छ के रण में मौजूद है।

कोरी निवेशका कच्छ के रण में स्तिथ है।

संक्षिप्त विवरण

कोरी निवेशका ( Kori Creek ) गुजरात में मौजूद विशाल कच्छ के मैदान में ही एक Creek है। यह Creek भारत तथा पाकिस्तान के बीच  समुद्री सीमा के रूप में जानी जाने वाले अन्य Creek से कुछ दूरी पर मौजूद है। यह कच्छ के दलदली इलाके में मौजूद है।  कोरी निवेशका को ले कर भी भारत पाकिस्तान के बीच तनाव बनते रहे हैं तथा यह विवादित क्षेत्र में भी रहा है। हालांकि यह भारत के ही सिंधु नदी से संबन्धित है।

कोरी निवेशका सिंधु नदी के डेल्टा के रूप में जाना जाता है। Kori Creek एक अन्य Creek, Sir Creek से लगभग 33 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर पश्चिम में स्थित है। Sir Creek के बारे में बता दें कि यह भारत तथा पाकिस्तान के बीच एक समुद्री बॉर्डर भी है। Sir Creek अरब सागर में जाती है।  Sir Creek को सीमा के रूप में देखे तो यह भारत के गुजरात राज्य को पाकिस्तान के अंतर्गत आने वाले सिंध प्रांत से अलग करता है।

जैसा कि कोरी निवेशका कच्छ के रण में मौजूद है तो संक्षेप में कच्छ के रण के बारे में जान लेते हैं।

  • कच्छ का रण

कच्छ का रण गुजरात में मौजूद बहुत ही बड़ा एक वीरान नमक का थार ( मैदान ) है। यह समुद्र से निकला हुआ है इसलिए यह मैदान एक दलदल से भरा हुआ इलाका है तथा यह नमक से ढका हुआ है। इस कारण यह बिल्कुल नमकीन है। यह एक रेगिस्तानी इलाका है जो कि गुजरात के ही कच्छ ज़िले के अंतर्गत आता है। कच्छ के रण को विश्व का सबसे  बड़ा नमक का मैदान भी माना जाता है। इस रण के कुछ हिस्सों में लोग रहते हैं।

कच्छ के रण का क्षेत्रफल देखें तो यह लगभग 30,000 स्क्वायर किलोमीटर में फैला हुआ है। इतनी विशालता के कारण ही यह कच्छ की खाड़ी से  पाकिस्तान में मौजूद सिंध नदी के मुहाने तक जाती है। आपको बता दें कि कच्छ का रण, छोटे कच्छ का रण तथा बड़ा कच्छ के रण के रूप में बंटा हुआ है। इन दोनों को एक साथ मिला कर ही कच्छ का रण कहा जाता है।

जैसा कि शुरू में बताया गया की कच्छ का अधिक हिस्सा बिल्कुल रेगिस्तान है। इसका मुख्य कारण यह भी है कि यहां अत्यधिक गर्मी पड़ती है। इस स्थान को भारत के सबसे गर्म जगहों में भी गिना जाता है। गर्मी के मौसम में यहां का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। वहीं अगर जाड़े के मौसम में यहां के तापमान की बात करें तो उस समय यही तापमान घट कर शून्य तक आ जाता है कभी कभी माइनस में भी चला जाता है।

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