लिंगराज मंदिर की नींव किसने डाली थी ?

लिंगराज मंदिर शिव जी को समर्पित एक मंदिर है। यह हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर ओड़िसा राज्य के भुवनेश्वर में स्थित है। लिंगराज मंदिर की नींव ययाति केसरी ने डाली थी। हालांकि, इस मंदिर का सबसे पहले किसने निर्माण किया था, इस पर एक राय नही है। इस संबंध में कई दावे मौजूद हैं।

लिंगराज मंदिर का जो वर्तमान रूप है, माना जाता है कि इस रूप का निर्माण  सोम वंश के  राजा ययाति प्रथम के द्वारा बनवाया गया था। ययाति प्रथम का शासन 1025 से 1040 तक रहा था। माना जाता है कि इसी दौरान इन्होंने इस मंदिर को बनवाया था। माना जाता है कि यह मंदिर 11वीं शताब्दी की शुरुआत में बन कर तैयार हो गया था।

lingaraj mandir ki neev kisne dali thi

हालांकि कुछ ऐतिहासिक और बेहद ही पुराने आलेखों में भी इस मंदिर का ज़िक्र देखने को मिलता है। बता दें कि वह आलेख 5वीं से 6ठी शताब्दी के हैं। इस तरह माना जाता है कि यह मंदिर उस समय से ही है। उस समय इस क्षेत्र का शासन ललाट इंदु केशरी के पास था। उन्होंने  615 से 657 CE तक शासन किया था। इस कारण कहा जाता है कि लिंगराज मंदिर का निर्माण Lalat Indu Keshari ने ही सबसे पहले करवाया था। उसके बाद अन्य राजाओं द्वारा समय – समय पर इस मंदिर का विस्तार किया जाता रहा है।

6ठी शताब्दी में मंदिर की नींव पड़ने के बाद मान्यता है कि  Assembly hall, Sanctum तथा Temple Tower का निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था। वहीं मंदिर के भोग मंडप का निर्माण 12वीं शताब्दी में किया गया था। इन सब के अलावा भी मंदिर के निर्माण को ले कर कई प्राचीन कहानियां और दावें मौजूद है।

इन सभी दावों के बीच माना जाता है कि मंदिर की नींव ययाति केसरी ने रखी थी।

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