मध्यप्रदेश के प्रथम राज्यपाल कौन थे । First Governor of Madhya Pradesh

प्रत्येक राज्य मे राज्यपाल का विशेष महत्व होता है। एक राज्यपाल राज्य की दिशा एवं दशा तय करता है। अक्सर देखने मे आया है, कि प्रतियोगी परीक्षाओं में राज्यपालों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते है। जिनका ज्ञान बहुत कम लोगो को होता है। जिसके कारण उनको असफलता का मुंह देखना पड़ता है। इस article में हम उन्ही कमियों को दूर करने की कड़ी में मध्यप्रदेश राज्य के राज्यपाल के बारे में चर्चा करेंगे। जिसकी शुरुआत हम इस राज्य के प्रथम राज्यपाल से करेगे। मध्यप्रदेश के पहले राज्यपाल कौन थे, उनके बारे में विस्तृत चर्चा हम इस article मे करेगे।

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मध्यप्रदेश के प्रथम राज्यपाल

भारत देश का “ह्रदय” कहे जाने वाले राज्य मध्यप्रदेश के पहले राज्यपाल पट्टाभि सीतारमैया थे। यह हस्ती कई कारणों से काफ़ी प्रसिद्ध थी। इनका जिक्र आपको इतिहास में कई जगह कई अलग मायनो मे मिलेगा। इन्होंने देश के लिए विभिन्न प्रकार से कार्य किये है। जिनमें स्वतंत्रता सेनानी, लेखक तथा राज्यपाल का उनका कार्य सराहनीय रहा है।

पट्टाभि सीतारमैया का जीवन परिचय

पट्टाभि का जन्म 24 नवंबर 1880 को आंध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले में हुआ था। इनका परिवार आर्थिक रूप से गरीब था। अपने बचपन मे ही इन्होंने अपने पिता को खो दिया था। जब सीतारमैया 5 साल के थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। विपरीत परिस्थितियों से जूझते हुये उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करी। उनके बाद इन्होंने “Madras Christian College ” से  B.A. की डिग्री प्राप्त की। अपनी आगे की पढ़ाई उन्होंने मेडिकल के रूप में पूर्ण की, तथा आगे चलकर मछलीपट्टनम मे एक डॉक्टर के रूप में कार्य करने लगे।

इनका विवाह एक वकील की लड़की से हुआ। पट्टाभि का पूरा नाम ” भोगराजू पट्टाभि सीतारमैया” था। देशभक्ति के भावना से भरे पट्टाभि एक बेहतरीन लेख़क तथा पत्रकार भी थे। ” जन्मभूमि ” नामक उनका साहित्यिक पत्र बेहद प्रसिद्ध था। 1920 मे हुए असहयोग आंदोलन में इन्होंने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। जिसके लिए वह कई बार जेल भी गये। सीतारमैया गांधी के बेहद प्रिय थे। 1939 में जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए नेताजी सुभाषचंद्र बोस का चयन हुआ तो गांधी ने इसे अपनी हार माना क्योकि नेताजी के विपक्ष में सीतारमैया थे, जिनकी लगभग 200 मतों से हर हुई थी। उनके बाद 1948 में वह जयपुर के कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए।

अथक प्रयासों के बाद भारत को आज़ादी मिली एवं देश के नीति निर्देश तय किये गये। उसके बाद उनको मध्यप्रदेश का पहला राज्यपाल बनाया गया। उनका कार्यकाल 1952 से 1957 तक रहा।

अपने लेखन कार्य के लिए भी सीतारमैया विख्यात रहे। उनके द्वारा लिखी गई कई कृतियां आज भी लोगो द्वारा बड़े शौक से पढ़ी जाती है। जिनमे सिक्सटी इयर्स ऑफ कांग्रेस, हिस्ट्री ऑफ दी कांग्रेस, फेदर्स एंड स्टोन्स तथा इंडियन नेशनलिज़्म जानी मानी कला है। वर्ष 1959 को 17 दिसम्बर के दिन 79 वर्ष की आयु में इस प्रख्यात नेता की मृत्यु हो गई। इनका जीवन मध्यप्रदेश के पहले राज्यपाल के तौर पर कम याद किया जाता है, जबकि एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में इनको ज्यादा ख्यति मिली। मध्यप्रदेश मे अब तक राज्यपाल की गिनती  27 हो चुकी है, परंतु जनता अभी भी सीतारमैया जैसी शख्सियत खोजती है। वर्तमान में आनंदीबेन पटेल मध्यप्रदेश की राज्यपाल है, जिनको जनवरी 2018 में नियुक्ति किया गया था।

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