मध्यप्रदेश में संपूर्ण ग्रामीण योजना कब शुरू हुई थी।

कृषि प्रधान देश होने के कारण भारत की अधिकांश आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में ही रहती है। इसके बावजूद देश में रोजगार की काफी कमी हमेशा रही हैं। एक हालिया आंकड़ों के अनुसार देश की कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा एक दिन में 20 रुपए भी नही कमा पाता है। देश में ग़रीबी का एक बड़ा कारण बेरोज़गारी है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने लोगों को साल में कम से कम एक निश्चित समय तक रोज़गार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई रोज़गार कार्यक्रम की भी शुरुआत की। मनरेगा इसी का उदाहरण है।

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इसी के तहत मध्यप्रदेश में भी ग्रामीण विकास को ध्यान में रखते हुए कई अलग अलग योजना शुरू किए गए थे। उस समय की शुरू की गयी कुछ महत्वपूर्ण योजनाएं निम्नलिखित है।

  • सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना

इस योजना की शुरुआत 15 अगस्त 2001 को की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास को गति देने के साथ साथ गरीबों के लिए रोज़गार का प्रबंध भी करना था। इस योजना में रोजगार के साथ साथ प्रतिव्यक्ति 5 किलो अनाज भी देने का प्रबंध किया गया था। इस योजना को चलाने की ज़िम्मेदारी पंचायती राज संस्थाओं के अधीन है। इस योजना को दो चरणों में शुरू की गई थी। अप्रैल 2002 में इस योजना के अतर्गत रोज़गार आश्वासन योजना की शुरुआत की गयी। इसके दूसरे चरण में जवाहर ग्राम समृद्ध योजना आरंभ की गई थी।

  • मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना

ग्राम विकास के क्षेत्र में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा यह महत्वाकांक्षी योजना 2007-2008 वित्तवर्ष में शुरू की गई थी। पहले इस योजना को प्रधानमंत्री ग्रामोदय ग्रामीण आवास विकास योजना के नाम से जाना जाता था। इस योजना की भी रूप रेखा मौजूदा समय में प्रचलित इंद्रा आवास योजना की ही तरह है। 2007-08 में इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लाभुकों के लिए क्रमशः 12 करोड़ और 20 करोड़ रुपए की राशी आवंटित की गई थी।

  • ग्राम सड़क योजना

गाँव में विकास की रफ़्तार को और गति देने के लिए दिसंबर 2000 में तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना को व्यापक रूप से प्रभावी करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई थी। इस योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश के 500 एवं उससे अधिक आबादी वाले मोहल्ले में सड़क निर्माण की व्यवस्था थी। आदिवासी क्षेत्रो के लिए यह आबादी 250 थी। इस योजना के शुरुआत के समय 500 से अधिक आबादी वाले 16,931 गांव ऐसे थें जहां पक्की सड़क की व्यवस्था नही थी। इस योजना में पक्की सड़क निर्माण करने के साथ – साथ आवश्यकता अनुसार पुल / पुलिया के भी निर्माण का प्रावधान था।

  • ग्रामीण इंजीनियर योजना

ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार ने इस योजना की शुरुआत 20 मई 2003 को किया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक गांव में एक एक Engineer की नियुक्ति सुनिश्चित करना था। इस योजना के तहत ही ग्रामीण युवाओं को तकनीकी शिक्षा से भी जोड़ना शामिल था।

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