मध्य प्रदेश का इतिहास, अर्थव्यवस्था, संस्कृति, भूगोल, जनसंख्या की पूरी जानकारी –

भारत का ह्रदय प्रदेश मध्यप्रदेश है जिसकी स्थिति भारत में वैसी ही है जैसे किसी शरीर में हृदय की होती है। मध्यप्रदेश क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। इस राज्य 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग के द्वारा स्थापित किया गया था। यह राज्य आबादी के हिसाब से भारत का पांचवां सबसे बड़ा राज्य है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल है एवं इसके अन्य बड़े शहरों में इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन एवं सागर शामिल है। मध्यप्रदेश राज्य का जो वर्तमान स्वरूप हम देखते हैं वह सन 2000 में छत्तीसगढ़ के मध्यप्रदेश से अलग होने के पश्चात् अस्तित्व में आया। इससे पूर्व छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश का हिस्सा था और मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य हुआ करता था। मध्यप्रदेश प्रकृति की देन से भरपूर है इसका लगभग 30% क्षेत्रफल जंगलों से घिरा हुआ है। प्रदेश में हीरा और कॉपर भारत में सबसे ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं।

madhya pradesh

  • नाम :- मध्यप्रदेश
  • स्थापना :- 1 नवंबर 1956
  • राजधानी :- भोपाल
  • सबसे बड़ा शहर :- इंदौर
  • वर्तमान मुख्यमंत्री :- कमलनाथ
  • वर्तमान गवर्नर :- आनंदीबेन पटेल
  • हाईकोर्ट :- जबलपुर
  • क्षेत्रफल :- 3,08,252 वर्ग किलोमीटर
  • आबादी :- 7,26,26,809 (2011 की जनगणना के अनुसार)

मध्यप्रदेश का इतिहास :

मध्यप्रदेश ऐतिहासिक रूप से भारत के सबसे संपन्न  राज्यों में से एक है। नर्मदा घाटी में होमो इरेक्टस के अवशेष पाए गए हैं इससे यह सिद्ध होता है कि यह इलाका मध्य  प्लेसिटोसेना  काल  में  भी आबाद था|भीमबेटका के पत्थरों में जो चित्रकारी पाई गई है उसे मेसोलिथिक काल की चित्रकारी माना जाता है इन दोनों बातों से यह स्पष्ट होता है कि यह इलाका हमेशा इंसानों से भरा रहा है|

ऐतिहासिक रूप से उज्जैन मध्यप्रदेश के अन्य शहरों के मुकाबले कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण रहा है|  ऐसा माना जाता है कि यह शहर सबसे पहले अवंती साम्राज्य  की राजधानी थी| जब चंद्रगुप्त मौर्य ने पूरे उत्तर भारत को एक ही शासक के आधिपत्य मे लाया तब मध्यप्रदेश उसका हिस्सा था, मध्यप्रदेश ने अपना सबसे संपन्न काल मौर्य साम्राज्य के ही एक और  शासक सम्राट अशोक के  आधिपत्य में देखा| अशोक ने अपने काल में मध्यप्रदेश में कई ऐतिहासिक इमारतों का निर्माण कराया|

मौर्य साम्राज्य के पतन के पश्चात् कई साम्राज्यों  ने मध्यप्रदेश के लिए आपस में लड़ाइयां लड़ी उनमें सबसे प्रमुख थे शक, कुषाण एवं सातवाहन| ऐसा माना जाता है कि सातवाहन राजा गौतमीपुत्र ने शक साम्राज्य को हराकर मध्यप्रदेश पर पूरी तरह अपना नियंत्रण कर लिया था|

चौथी एवं पांचवीं शताब्दी में मध्यप्रदेश का यह इलाका पूरी तरह गुप्त साम्राज्य के अधिपत्य में आ गया|  धार जिले के कुक्षी तहसील में रॉक टेंपल  गुप्त शासन काल की ही देन है| जब गुप्त साम्राज्य का पतन हो गया तो मध्यप्रदेश का यह इलाका फिर छोटे-छोटे राजे रजवाड़ों में बट गया|

मध्यकाल में मध्यप्रदेश ने राजपूत शासकों का उदय देखा गया इनमें सबसे प्रमुख मालवा के परमार एवं बुंदेलखंड के चंदेल थे| चंदेल राजाओं के काल में ही खुजराहो के मंदिरों का निर्माण हुआ जो आज पूरे विश्व में मध्यप्रदेश की पहचान है| सन 1000 के आसपास एक छोटे से इलाके से गोंडवाना साम्राज्य का उदय हुआ जो ऐतिहासिक रूप से बहुत ही संपन्न साम्राज्य माना गया| 13वीं शताब्दी आते आते तक शेष भारत की तरह मध्यप्रदेश भी दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत आ गया| 14वीं सदी के अंत में जब दिल्ली सल्तनत  का पतन हुआ तो मध्यप्रदेश का यह इलाका एक बार फिर छोटे-छोटे राजे रजवाड़ों में बट गया इनमें सबसे प्रमुख थे ग्वालियर साम्राज्य के तोमर एवं मालवा की मुस्लिम सल्तनत , जिसकी राजधानी मांडू थी|

मालवा सल्तनत की गुजरात सल्तनत के द्वारा पराजय के पश्चात  मध्यप्रदेश का इलाका लगभग पूरी तरह शेर शाह सुरी साम्राज्य के अंतर्गत आ गया| शेरशाह सूरी का ही एक अधिकारी हेमू था जो बाद में चलकर दिल्ली का अंतिम हिंदू शासक बना| हेमू  का उदय भी मध्यप्रदेश से ही हुआ था मुख्यतः ग्वालियर से| 1553 से 1556 के बीच हेमू ने लगभग 22 युद्ध लड़े और सभी जीते इसकी तुलना नेपोलियन के अभियान से ही की जा सकती है अन्यथा  आधुनिक काल में कोई इसके करीब नहीं आता है| हेमू  मुगल साम्राज्य को दिल्ली के युद्ध में हराकर दिल्ली का शासक बन गया और  हेमू ने अपने आपको विक्रमादित्य घोषित कर दिया, और यही हेमू दिल्ली का आखरी हिंदू शासक था| इसके पश्चात पानीपत के दूसरे युद्ध में अकबर की सेनाओं ने हेमू  को पराजित कर दिया और  दिल्ली का अंतिम हिंदू शासक का यहीं  अंत  हो गया इसके पश्चात भारत के दूसरे हिस्सों की तरह मध्यप्रदेश का यह इलाका भी मुगल साम्राज्य के अंतर्गत आ गया|

अब हम उस काल पर आते हैं जिस काल के अवशेष आज भी मध्यप्रदेश में हैं|  18वीं शताब्दी आते-आते तक औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात मुगल साम्राज्य काफी कमजोर हो चुका था| ऐसे समय में एक नए  साम्राज्य का उदय हुआ जिसे मराठा साम्राज्य कहा जाता है| यह मराठा साम्राज्य सरदारों के माध्यम से चलता था और मध्यप्रदेश में सबसे मजबूत सरदार हुए जिनमें से इंदौर के होलकर, ग्वालियर के सिंधिया, देवास के पवार एवं  नागपुर के भोंसले थे| यह सारे सरदारों के परिवार आज भी भारतीय राजनीति के परिदृश्य में आपको मिल जाएंगे| चाहे वह सिंधिया हो या पवार| तृतीय मराठा अंग्रेजी युद्ध के पश्चात् पूरा मध्यप्रदेश ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत आ गया जो उस समय ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम से जाना जाता था अर्थात मध्यप्रदेश का यह इलाका या तो सीधे ब्रिटिश साम्राज्य के आधिपत्य में था या तो जो भी राजे रजवाड़ों बचे थे वे ब्रिटिश साम्राज्य की ओर से यहां राज कर रहे थे उदाहरण के तौर पर सिंधिया, होलकर एवं पवार आदि|

1857 के विद्रोह के दौरान मध्यप्रदेश भयानक युद्धों का गवाह बना, परंतु अंत में अंग्रेज अपना साम्राज्य बचाने में सफल रहे| भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मध्यप्रदेश ने  कई नायक दिए इनमें सबसे प्रमुख हैं, चंद्रशेखर आजाद, भीमराव अंबेडकर| भारत में आगे चलकर राष्ट्रपति बनने वाले शंकर दयाल शर्मा भी स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी थे यही नहीं भारत के आगे चलकर प्रधानमंत्री बनने वाले अटल बिहारी वाजपाई भी उस काल में सक्रिय थे|

भारत की आजादी के साथ वर्तमान मध्यप्रदेश अस्तित्व में नहीं आया था आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस इलाके में एक नहीं कई प्रदेश हुआ करते थे जैसे कि  सेंट्रल प्रोविंस, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश, भोपाल स्टेट आदि| 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग के द्वारा मध्य भारत, विंध्य प्रदेश  एवं भोपाल को एक साथ मिलाकर  नए राज्य का गठन किया गया जो मध्यप्रदेश कहलाया|  इसी समय की एक और महत्वपूर्ण घटना यह है कि पहले यह तय किया गया था कि जबलपुर इस नए राज्य की राजधानी होगी परंतु कुछ राजनीतिक हलचलों  के पश्चात जबलपुर राजधानी ना बन सका और भोपाल इस प्रदेश की राजधानी बन गया| परंतु मध्यप्रदेश का इतिहास यहां खत्म नहीं होता है इसका सबसे आधुनिक अध्याय सन 2000 में आता है जब छत्तीसगढ़ नाम का एक नया राज्य मध्यप्रदेश से काटकर बनाया जाता है और मध्यप्रदेश  देश के सबसे बड़े राज्य होने का दर्जा खो देता है एवं दूसरे स्थान पर आ जाता है|

मध्यप्रदेश का भूगोल, वनस्पति एवं जीव :-

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है मध्यप्रदेश भारत गणराज्य के मध्य में स्थित है और इसकी स्पष्ट भौगोलिक स्थिति अक्षांश 21.2 ° N-26.87 ° N और देशांतर 74 ° 59′-82 ° 06 ‘E  के बीच की है| मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी नदी नर्मदा नदी है| ऐसा माना जाता है कि  मध्यप्रदेश में स्थित विंध्याचल पर्वत श्रृंखला एवं बहने  वाली नर्मदा नदी उत्तर एवं दक्षिण भारत की सीमाओं का निर्धारण करती है| धूपगढ़ मध्यप्रदेश की सबसे ऊंची पहाड़ी है इसकी ऊंचाई 1350 मीटर है| मध्यप्रदेश की सीमाएं गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र से मिलती है|

मध्यप्रदेश को हमेशा प्रकृति ने संपन्न रखा है| मध्यप्रदेश में 10 नेशनल पार्क है बांधवगढ़ नेशनल पार्क, कान्हा नेशनल पार्क, सतपुड़ा नेशनल पार्क, संजय नेशनल पार्क, माधव नेशनल पार्क, वन विहार नेशनल पार्क, मंडला प्लांट फॉसिल नेशनल पार्क, पन्ना नेशनल पार्क, पेंच नेशनल पार्क एवं डायनासोर नेशनल पार्क धार है|

  • राज्य पशु :- बारहसिंघा
  • राज्य पक्षी :- ग्रीन पैराडाइज फ्लाइसेचर अथवा दूधराज
  • राज्य वृक्ष :- बनयान ट्री
  • राज्य  मत्स्य :- महाशीर
  • राज्य पुष्प :- मेडोना लिली

मध्यप्रदेश की नदियां एवं क्षेत्र:

जैसा कि हम जानते ही हैं नर्मदा मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी नदी है एवं इसकी सहायक नदियां हैं बंजर, तवा,मकना , शक्कर , देनवा  एवं  सोनभद्र | मध्यप्रदेश की अन्य महत्वपूर्ण नदियां इस प्रकार से हैं चंबल, शिप्रा, काली सिंध, पार्वती, कूनो, सिंद ,बेतवा, धसान  एवं  केन |

शासकीय रूप से मध्यप्रदेश को निम्नलिखित संभागों में बांटा गया है|

  • भोपाल
  • चंबल
  • ग्वालियर
  • इंदौर
  • जबलपुर
  • नर्मदा पुरम
  • रीवा
  • सागर
  • शहडोल
  • उज्जैन

मध्यप्रदेश की जनसंख्या, जनजातियां, भाषाएं, धर्म एवं संस्कृति :-

मध्यप्रदेश की आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा विभिन्न जनजातियों से मिलकर बना है| इनमें सबसे प्रमुख अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत आने वाली जनजातियां हैं| मध्यप्रदेश की प्रमुख जनजातियां गोंड, भील, बैगा, कोरकु, भड़िया , हलवा ,कोल ,मरिया, माल्टो ,सरिया आदि हैं |धार, झाबुआ एवं मंडला जिले की लगभग 50% आबादी जनजाति जनसंख्या से मिलकर बनी है| खरगोन ,छिंदवाड़ा, सिवनी, सीधी, सिंगरौली एवं शहडोल जिले की लगभग 30 से 50% जनसंख्या इन जनजातियों से मिलकर बनी है| 2011 की जनगणना के अनुसार आदिवासी जनजातियों की मध्यप्रदेश में जनसंख्या लगभग 73,00,000 है जो कि इसकी पूरी आबादी का लगभग 21% है|

राज्य की आधिकारिक भाषा हिंदी है| मध्यप्रदेश के कई इलाकों में मराठी बोली जाती है इसका प्रमुख कारण ऐतिहासिक रूप से मध्यप्रदेश का मराठा  सरदारों का गण होना है| ऐसा माना जाता है कि महाराष्ट्र के बाहर अगर मराठी कहीं  सबसे ज्यादा बोली जाती है तो वह राज्य मध्यप्रदेश है|  मध्यप्रदेश में हिंदी के कई रूप आपको मिलेंगे जैसे कि मालवा में मालवी, निमाड़ में निमाड़ी, बुंदेलखंड में बुंदेली, बघेलखंड में बघेली| हिंदी के इन रूपों के अलावा कई भाषाएं जैसे कि  गोंडी,भीली,कोरकू,भिलोड़ी एवं निहाली आदि प्रमुख है|

2011 की जनगणना के अनुसार मध्यप्रदेश की जनसंख्या का 90.9% आबादी हिंदू धर्म को मानती है, मुस्लिमों की संख्या 6.6% है, जैन 0.8% हैं, वुद्धिस्त 0.3% है, ईसाई 0.3% है और सिक्खोंकी संख्या 0.2% है|

मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था :

2018-19 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार  प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद 8.26  लाख करोड़ रुपए था अर्थात 110 बिलियन डॉलर था|  सकल घरेलू उत्पाद के हिसाब से मध्यप्रदेश देश का आठवां सबसे संपन्न राज्य है|2017-18 के दौरान मध्यप्रदेश की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि की दर 7.7% थी| मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति आय ₹59052 है अर्थात $820 प्रति वर्ष है|

मध्यप्रदेश मूलतः  कृषि आधारित राज्य है| देश की  लगभग 90% सोयाबीन मध्यप्रदेश में होती है| देश का लगभग 36% चना  मध्यप्रदेश में होता है| देश के लगभग 25% तिलहन का उत्पादन मध्यप्रदेश में होता है| लगभग 24% दालों का उत्पादन मध्यप्रदेश में होता है| देश की लगभग 8% खाद्य आपूर्ति मध्यप्रदेश से की जाती है|

आर्थिक रूप से मध्यप्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जिले भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर एवं उज्जैन है|

मध्यप्रदेश राज्य सरकार :-

मध्यप्रदेश की विधानसभा इसकी राजधानी भोपाल में स्थित है| मध्यप्रदेश में वर्तमान में कांग्रेस पार्टी की सरकार है| मध्यप्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री कमलनाथ हैं| मध्यप्रदेश की विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के पास 113 सीटें हैं, भारतीय जनता पार्टी के  पास 109 सीटें हैं, बहुजन समाजवादी पार्टी के पास 2 सीटें हैं, समाजवादी पार्टी के पास एक सीट है इसके अलावा चार निर्दलीय विधायक हैं| मध्यप्रदेश की  गवर्नर आनंदीबेन पटेल हैं| मध्यप्रदेश की विधानसभा के सभापति एन.पी. प्रजापति है| मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव है|

मध्यप्रदेश में लोकतांत्रिक सरकारों का इतिहास :-

मध्यप्रदेश में लोकतांत्रिक सरकार  की नीव  1913 में पड़ी जब इसी वर्ष 8 नवंबर को सेंट्रल प्रोविंस लेजिसलेटिव काउंसिल का गठन किया गया| इसके पश्चात 1935 में आए गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट ने चुनाव का रास्ता साफ कर दिया| 1937 में मध्यप्रदेश में पहली बार चुनाव हुआ|

वर्तमान मध्यप्रदेश 1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आया| उस समय के मध्यप्रदेश के अंदर आने वाले सारे राज्यों की विधान सभाओं को आपस में मिला दिया गया परंतु इस नई बनी विधानसभा का कार्यकाल अत्यंत छोटा था और 5 मार्च 1957 को इसे  भंग कर दिया गया |

मध्यप्रदेश का राजनीतिक इतिहास :

मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल थे, इन्होंने 1 नवंबर 1956 को अपना पदभार ग्रहण किया इनका कार्यकाल 60 दिनों तक ही चल सका| रविशंकर शुक्ला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनने से पूर्व वे सेंट्रल प्रोविंस के प्रधानमंत्री थे| मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री थे भगवंतराव मंडलोई इन्होंने 9 जनवरी 1957 को अपना पदभार ग्रहण किया |इनका कार्यकाल केवल 21 दिनों का था, वह खंडवा  विधानसभा  से विधानसभा सदस्य थे| मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री कैलाश नाथ काटजू थे वे मध्यप्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री बने पहली बार उन्होंने पद ग्रहण 31 जनवरी 1957 को किया एवं दूसरी बार 14 मार्च 1957 को उनका कुल मिलाकर कार्यकाल 5 वर्ष एवं 39 दिनों का रहा| कैलाश नाथ काटजू स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री होने के साथ ही साथ बाद में उड़ीसा एवं पश्चिम बंगाल के गवर्नर भी रहे| वे उस समय के भारत के सबसे बड़े क़ानूनविदों में से एक थे,वे उस समय होने वाली सबसे बड़ी ट्रायल जो कि आजाद हिंद सेना के सैनिकों के खिलाफ हो रही थी का भी हिस्सा थे |कैलाश नाथ काटजू भारत के रक्षा मंत्री भी रहे थे|

12 मार्च 1962 को भगवंतराव मंडलोई ने एक बार फिर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण किया और इस बार उनका कार्यकाल 1 वर्ष 201 दिन तक चला| भगवंतराव मंडलोई के पश्चात मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र थे जिन्होंने 30 सितंबर 1963 एवं 8 मार्च 1967 दो बार मुख्यमंत्री पद का पदभार ग्रहण किया| उनका कुल कार्यकाल 3 वर्ष एवं 302 दिनों का रहा| द्वारका प्रसाद मिश्र राजनीतिज्ञ होने के साथ ही साथ कवि भी थे उन्होंने महाकाव्य कृष्णायण  की रचना भी की थी| द्वारका प्रसाद मिश्र ने अपने जीवन का एक हिस्सा पत्रकार के रूप में भी बिताया उन्होंने बड़ी-बड़ी हिंदी जर्नल जैसे कि लोकमत, शारदा एवं सारथी के लिए कार्य किया| मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री गोविंद नारायण सिंह थे जिन्होंने अपना पदभार 30 जुलाई 1967 को ग्रहण किया उनका कुल कार्यकाल 1 वर्ष एवं 225 दिनों तक चला, गोविंद नारायण सिंह मध्यप्रदेश के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे उनके दल का नाम सामायुक्त विधायक दल था| नरेश चंद्र सिंह मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री बने उन्होंने अपना पदभार 13 मार्च 1969 को ग्रहण किया उनका कुल कार्यकाल केवल 12 दिनों तक ही चल सका  वह भी सामायुक्त विधायक दल  के सदस्य थे| मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल थे जिन्होंने अपना पदभार 26 मार्च 1969 को ग्रहण किया एवं उनका इस बार का कार्यकाल 2 वर्ष 308 दिन तक का रहा|श्यामाचरण शुक्ला मध्यप्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री बने हम उनके आगे के कार्यकालों  के विषय में आगे बात करेंगे| श्यामाचरण शुक्ला मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल के पुत्र थे एवं केंद्रीय मंत्री रह चुके विद्याचरण शुक्ल के भाई यही नहीं उनके पुत्र अमितेश शुक्ला आज भी विधायक हैं|

70  के दशक में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने प्रकाश चंद्र सेठी उन्होंने 29 जनवरी 1972 और 23 मार्च 1972 दो बार मुख्यमंत्री पद का पदभार ग्रहण किया इनका कुल मिलाकर कार्यकाल 3 वर्ष 328 दिन तक रहा|  प्रकाश चंद्र सेठी केंद्र की  राजनीति में भी काफी सक्रिय थे वे कांग्रेस पार्टी के विभिन्न केंद्रीय कार्यकाल में विभिन्न मंत्रालय  के मंत्री रहे जैसे कि  गृहमंत्री, रक्षा मंत्री ,विदेश मंत्री, वित्त मंत्री, रेलवे मंत्री आदि| प्रकाश चंद्र सेठी के पश्चात श्यामाचरण शुक्ल एक बार फिर मुख्यमंत्री बने उन्होंने मुख्यमंत्री पद का इस बार पदभार 30 दिसंबर 1975 को ग्रहण किया श्यामाचरण शुक्ल का यह कार्यकाल 1 वर्ष 128 दिन तक चला| इसके पश्चात 30 अप्रैल 1977 में  मध्यप्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया जो अगले 54 दिनों तक चला| राष्ट्रपति शासन के पश्चात कैलाश जोशी  मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री बने उन्होंने मुख्यमंत्री पद का पदभार 24 जून 1977 को ग्रहण किया इनका कार्यकाल 207 दिनों तक चला| भले ही कैलाश जोशी का मुख्यमंत्री पद का कार्यकाल छोटा रहा हो परंतु वह मध्यप्रदेश की राजनीति में लगभग 4 दशक तक बड़े नेता बने रहे| मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री वीरेंद्र कुमार सकलेचा बने जिन्होंने अपना पदभार 18 जनवरी 1978 को ग्रहण किया इन का कुल कार्यकाल 2 वर्ष एवं 1 दिन तक का रहा | मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा बने जिन्होंने अपना पदभार 20 जनवरी 1980 को ग्रहण किया इनका कार्यकाल केवल 28 दिनों तक चला परंतु सुंदर लाल पटवा की मुख्यमंत्री के रूप में एक और पारी आगे चलकर आएगी| कैलाश जोशी, वीरेंद्र कुमार सकलेचा एवं सुंदर लाल पटवा तीनों ही जनता पार्टी के मुख्यमंत्री थे| सुंदरलाल पटवा के कार्यकाल के पश्चात 113 दिन तक मध्यप्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा रहा|

इस राष्ट्रपति शासन के खत्म होने के पश्चात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद का पदभार ग्रहण किया अर्जुन सिंह ने उन्होंने मुख्यमंत्री पद का पदभार ग्रहण 9 जून 1980 को  एवं 18 मार्च 1985 को दो बार किया| उनका कुल मिलाकर कार्यकाल 4 वर्ष 276 दिनों तक रहा | अर्जुन सिंह के कार्यकाल के दौरान ही भोपाल गैस कांड हुआ| अर्जुन सिंह लगभग  चार दशकों तक मध्यप्रदेश एवं देश की राजनीति के महत्वपूर्ण नेताओं में से एक बने रहे|कांग्रेस पार्टी की विभिन्न सरकारों में मंत्री रहे| अर्जुन सिंह के पुत्र  अजय सिंह पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे| अर्जुन सिंह के दो कार्यकालों  के बीच में एक कार्यकाल मोतीलाल वोरा का  भी रहा मोतीलाल वोरा ने 25 जनवरी 1989 को मुख्यमंत्री पद का पदभार ग्रहण किया उनका कार्यकाल लगभग 318 दिनों तक चला | मोतीलाल वोरा कांग्रेस पार्टी के लंबे समय तक कोषाध्यक्ष रहे| मोतीलाल वोरा के कार्यकाल के पश्चात एक बार फिर श्यामाचरण शुक्ल 82 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने| श्यामाचरण शुक्ल के कार्यकाल के पश्चात भारतीय जनता पार्टी सरकार में आई एवं उनके नेता सुंदरलाल पटवा ने 5 मार्च 1990 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की| सुंदरलाल पटवा का कार्यकाल 2 वर्ष 285 दिनों तक चला| बाबरी मस्जिद विघटन की घटना के पश्चात मध्यप्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया और सुंदरलाल पटवा को मुख्यमंत्री पद से  हाथ धोना पड़ा| मध्यप्रदेश में 15 दिसंबर 1995 को राष्ट्रपति शासन लगा जो कि अगले 355 दिनों तक चला|

राष्ट्रपति शासन के पश्चात मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री बने दिग्विजय सिंह उन्होंने अपना पहला पदभार 7 दिसंबर 1993 को ग्रहण किया और अगला पदभार  1 दिसंबर 1998 को ग्रहण किया दिग्विजय सिंह 10 वर्षों तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने रहे| 2003 के चुनाव के समय मध्यप्रदेश के उस समय के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने यह घोषणा की कि   अगर मध्यप्रदेश में दोबारा कांग्रेस की सरकार नहीं बनी तो वे अगले  10 वर्षों तक कोई भी पदभार ग्रहण नहीं करेंगे और यही हुआ मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार चली गई एवं भारतीय जनता पार्टी की सरकार आ गई और  अगले 10 वर्षों तक दिग्विजय सिंह ने किसी भी  सरकार में कोई पदभार ग्रहण नहीं किया जबकि 10 वर्षों तक केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही | दिग्विजय सिंह के कार्यकाल के पश्चात 8 दिसंबर 2003 को उमा भारती ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली उनका कार्यकाल अगले  259 दिनों तक चला| उमा भारती के पश्चात बाबूलाल गौर 23 अगस्त 2004 को मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री बने उनका कार्यकाल 1 वर्ष 98 दिनों तक चला| बाबूलाल गौर के पश्चात मध्यप्रदेश के सबसे लंबे  कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री की बारी आती है और इस मुख्यमंत्री का नाम है शिवराज सिंह चौहान, शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ तीन बार ग्रहण की पहली बार 29 नवंबर 2005, दूसरी बार 12 दिसंबर 2008 एवं तीसरी बार 13 दिसम्बर 2013| उनका कुल कार्यकाल 13 वर्ष एवं 17 दिनों तक रहा| शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश आने से पूर्व केंद्र में मंत्री थे| उनका विधानसभा क्षेत्र हमेशा बुधनी ही रहा| शिवराज सिंह चौहान के इस लंबे कार्यकाल के पश्चात बारी आती है कमलनाथ की| कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद का  पदभार 17 दिसंबर 2018 को ग्रहण किया| वैसे तो कमलनाथ छिंदवाड़ा जिले से आते हैं परंतु उनका राजनीतिक जीवन मध्यप्रदेश नहीं उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ था| मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनने से पूर्व कमलनाथ  वर्तमान लोकसभा में सबसे अनुभवी सांसद थे।

मध्यप्रदेश देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक है इसीलिए इसका इतिहास, इसकी राजनीति, इसकी संस्कृति का वर्णन कम शब्दों में करना उचित नहीं है फिर भी उम्मीद की जाती है कि हमने मध्यप्रदेश के इतिहास  एवं वर्तमान के मूल बिंदु को  आपके समक्ष सही तरीके से प्रस्तुत किया होगा।

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