मध्यप्रदेश की राजधानी क्या है। Madhya Pradesh ki Rajdhani Kaha hai

देश के सबसे उन्नत राज्यों में से एक राज्य मध्यप्रदेश है। जो देश के महत्वपूर्ण राज्यों की सूची में शुमार है। यह एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ भारी मात्रा में अनाज़ का उत्पादन होता है।

मध्यप्रदेश की राजधानी, इस राज्य का भोपाल (Bhopal) शहर है। 1956 में जब मध्यप्रदेश राज्य का गठन हुआ, तब इसकी राजधानी बनाने को लेकर कई शहरों के नाम चर्चा में आये। जिनमे ग्वालियर, इंदौर तथा जबलपुर कुछ मुख्य नाम थे। अंततः देश के हालातों तथा तत्कालीन माहौल को देखते हुये सरदार पटेल ने भोपाल शहर को इस राज्य की राजधानी का दर्जा प्रदान किया। यह नगर कुल 285 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। जो भारत देश का 16वा सबसे बड़ा शहर है।

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झीलों की अधिकता के कारण इसको “तालों का शहर” (City of Lakes) कहा जाता है। यह देश के मध्य भाग में स्थित है। पहाड़ो पर बसे होने के बाद भी यहाँ का तापमान गर्म ही होता है। भोपाल नगर की स्थापना ग्यारहवी शताब्दी में राजा परमार राजा भोज ने की थी। भोपाल का पुराना नाम “भोजपाल” था, जो भोज तथा पाल संधि से मिलकर बना है। मध्यप्रदेश राज्य की राजधानी होने के साथ- साथ यह नगर भोपाल जिले का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। वर्तमान समय मे यहाँ की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर है।

मध्यप्रदेश की राजधानी कहाँ है ?

वर्तमान समय में जब भी किसी राज्य की राजधानी को लेकर बात आती है, तब अधिकतर लोगों को उस शहर अथवा नगर का नाम ज्ञात होता है, जो उस राज्य की राजधानी है। इसी प्रकार अगर सामान्य जन से मध्यप्रदेश राज्य की राजधानी जानी जाये तो, लोग उसका बड़ी आसानी से जबाब “भोपाल” के रूप में दे देते है। लेकिन क्या उन सभी को वास्तविक रूप से इस बात का अंदाज़ा है, कि वास्तव में भोपाल भारत मे कहाँ है ??

भोपाल की स्थिति

भोपाल 1956 में मध्यप्रदेश की राजधानी बना। जबकि वर्ष 1972 में इसको जिले के रूप में स्थापित कर दिया गया। जिस प्रकार भारत देश के मध्य क्षेत्र में मध्यप्रदेश है, उसी प्रकार MP के मध्य भाग में भोपाल शहर स्थित है। भोपाल जिला मानचित्र (Map) में 23.250 उत्तर अक्षांश (Latitude) तथा 77.420 पूर्व देशांतर (Longitude) पर बसा हुआ है। जो कि 2772 वर्ग किमी के कुल क्षेत्रफल में विस्तृत है।

इस जिले की सीमा उत्तर में गुना, पूर्व में रायसेन, पश्चिम में सीहोर तथा उत्तर पश्चिम में राजगढ जिले से जुड़ी हुई हैं। समुद्र तल से इस जिले की ऊँचाई 427 मीटर है। इस जिले के आसपास बहुत सारी छोटी – छोटी पहाड़िया मौजूद है, जिनमे ईदगाह हिल्स तथा श्यामला हिल्स शामिल है। जबकि भोपाल जिला विंध्य पर्वत श्रेणियों की उत्तरी सीमाओं से जुड़ा हुआ है। यहाँ की जलवायु सामान्य तौर पर गर्म होती है।

भोपाल को मध्यप्रदेश की राजधानी के रूप में कब चुना गया ?

भारत देश को अंग्रेज़ों से आज़ादी मिलने के बाद देश में कई छोटी-बड़ी रियासतें एवं देशी राज्य अस्तित्व में थे। इसके बाद जब एक स्वतंत्र भारत की कल्पना की गई, तब उनको आपस मे मिलाकर एकीकृत किया गया। इसके उपरांत जब 1956 में भाषीय आधार पर राज्यो का पुर्नगठन (Reconstitution) हुआ, जिसके परिणामस्वरूप 1 नवंबर, 1956 को एक नए राज्य के रूप में “मध्यप्रदेश” राज्य का नाम अस्तित्व में आया। इसे पहले “मध्य भारत” के नाम से भी जाना जाता था। मध्यप्रदेश राज्य का निर्माण तत्कालीन सीपी एंड बरार, मध्य भारत, विंध्यप्रदेश तथा भोपाल राज्य को मिलाकर किया गया।

पूर्व में राजधानी

वर्तमान समय का मध्यप्रदेश पहले मध्यभारत (Madhya prant) प्रांत हुआ करता था, जिसका गठन 28 मई 1948 को किया गया था। उस दौरान इसमें ग्वालियर तथा मालवा के क्षेत्र शामिल थे। इस काल में रियासते (Homestead) हुआ करती थी, जिसका प्रभार राजाओं तथा राजवंशो के पास हुआ करता था। उस दौरान मध्यभारत प्रांत के पहले राजप्रमुख ग्वालियर रियासत के महाराजा जीवाजी राव सिंधिया थें। उन्होंने इस प्रांत की दो राजधानियां तय की थी। पहली राजधानी के रूप में ग्वालियर को जाना जाता था, जो शीतकालीन राजधानी हुआ करती थी, जबकि इंदौर ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती थी। इस प्रकार पूर्व में मध्यभारत की दो राजधानी थी।

भोपाल राजधानी के तौर पर

इसके बाद 1 नवंबर, 1956 को जब मध्यप्रदेश राज्य का गठन हुआ, उसी दौरान इसकी राजधानी का चुनाव भी कर लिया गया था। अर्थात 1 नंवबर 1956 को “भोपाल” को इस राज्य की राजधानी के तौर पर स्थापित किया गया। राजधानी बनाने के साथ ही इसका विधानसभा क्षेत्र भी भोपाल के रूप में ही तय कर दिया गया था। इसके 16 वर्ष बाद यानी 1972 में भोपाल को जिला घोषित कर दिया गया। मध्यप्रदेश के गठन के समय कुल जिलों की संख्या 43 थी। वर्तमान समय मे मध्य प्रदेश में कुल 52 जिले हैं।

भोपाल को ही क्यों राजधानी चुना गया ??

किसी शहर को किसी राज्य की राजधानी बनाने के बाद एक प्रश्न सबके मन मे आता है, कि आखिर वही शहर ही क्यों, कोई दूसरा क्यो नही ?? भोपाल को जब मध्यप्रदेश की राजधानी बनाया गया, तब भी इस प्रश्न ने कई लोगो को इसका कारण जानने के लिए अपनी ओर आकर्षित किया।

भोपाल ही क्यों??

1956 में जब मध्यप्रदेश की राजधानी के लिए किसी शहर का चुनाव हो रहा था, तब राजधानी बनने की होड़ में मुख्य रूप से राज्य के तीन शहर थे। राजधानी के लिए सबसे मजबूत दावेदारों में से एक ग्वालियर था। इसके बाद इंदौर शहर का स्थान दूसरा था। जबकि जबलपुर शहर भी राज्य की राजधानी के तौर पर खुद को देख रहा था। इसके बाद भी भोपाल को राजधानी बनाया गया। इसके मुख्य रूप से दो कारण थे-

१) उस दौरान भोपाल के जो नबाब थे, वह भारत के साथ किसी भी प्रकार के संबंध ही नहीं रखना चाहते थे। वे हैदराबाद के निजाम के साथ मिलकर भारत का विरोध कर रहे थे। इस स्थिति में देश में अशांति तथा अराजकता (Turbulence and Chaos) फैल सकती थी। इस बात का अनुमान केन्द्र सरकार को भलीभांति था और वह कदाचित ऐसा नही चाहती थी, कि देश में ऐसे हालत पैदा हो, जो आगे चलकर राष्ट्र विरोधी गतिविधियां को बढ़ावा प्रदान करे। इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने सरदार पटेल को भोपाल पर पूरी तरह नजर रखने के लिए नियुक्त किया। इसके बाद सरदार पटेल ने ही हालातों को भापकर और देशहित के लिए भोपाल को मध्य प्रदेश की राजधानी बनाने का निर्णय लिया।

२) भोपाल को राजधानी बनाने का दूसरा मुख्य कारण यह था, कि अन्य शहरों की तुलना में (जो राजधानी बनने का दावा कर रहे थे) भोपाल में भवन (Edifice) ज्यादा थे, जो सरकारी कामकाज के लिए उपयुक्त थे। इसी वजह से भोपाल को मध्य प्रदेश की राजधानी के तौर पर चुना गया था।

इसके अलावा ऐसा भी कहा जाता है कि, भोपाल को राजधानी बनाए जाने में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. शंकर दयाल शर्मा, भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्ला खान तथा पंडित जवाहर लाल नेहरू की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मध्यप्रदेश की वाणिज्यिक (Commercial) राजधानी क्या है??

किसी भी राज्य के विकास तथा विस्तार में व्यवसाय एक अहम भूमिका निभाता है। इसके लिये राज्य में एक व्यासायिक केंद्र होना आवश्यक हो जाता है। लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल भी नही होता कि, उस राज्य की राजधानी ही उसके लिए केंद्र बिंदु बने। मध्यप्रदेश राज्य ने इस कार्य के लिए वाणिज्यिक राजधानी के रूप में इंदौर (Indore) शहर को चुना है।

इंदौर शहर – एक नज़र में

इंदौर इस राज्य का सबसे बड़ा शहर है, जो आर्थिक ( Economic) दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इस शहर की स्थापना 17वीं शताब्दी में हुई थी। ऐसा कहा जाता है कि, इस शहर को राव नंदलाल चौधरी ने बसाया था, जो एक जमीदार परिवार से संबंध रखते थे। पूर्व में हिंदू देवता “इंद्र” के नाम पर इस शहर का नामकरण इंद्रापुर रखा गया था। बाद में इसका नाम परिवर्तित करके इंदौर रख दिया गया। यह शहर मालवा पठार (Malva Plateau) के दक्षिणी कोने में स्थित है। जिसकी समुद्र तल (Sea Level) से उचांई 550 मीटर है।

इंदौर नगर कुल 530 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहां बड़ी भारी मात्रा में ऑटोमोबाइल कंपनियां मौजूद है, जो लोगो का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल होती है। इस शहर में टीसीएस, इन्फोसिस जैसी कंपनिया अपने सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) के लिए परियोजना कार्य करते है। नरजीमुंजी तथा सिंबायोसिस जैसे नामी शिक्षण संस्थान इस शहर को प्रशिक्षण का केंद्र बना रहे है। शिक्षा के नजरिये से भी इस शहर की गिनती उन्नत नगरों में होती है। यहाँ पर मौजूद Indian Institute of Technology (IIT) तथा Indian Institute of Management (IIM) इसके साक्ष्य है।

मध्यप्रदेश के बारे में अन्य तथ्य :-

इसके अलावा भी अन्य बहुत से तथ्य है, जो मध्यप्रदेश राज्य को दूसरों राज्यो से पृथक बनाते है  जिसकी चर्चा हम निम्न बिंदुओ में करेंगे।

  • मध्यप्रदेश राज्य में सोयाबीन की अधिक उपज होने के कारण इसको ” सोया राज्य ”  के नाम से भी पुकारा जाता है।
  • मध्यप्रदेश में मुख्य रूप से पांच लोक संस्कृतियां (Folk Culture) है। वह साँस्कृतिक क्षेत्र निमाड़, मालवा, बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड तथा ग्वालियर है।
  • 1 नवंबर, 2000 तक क्षेत्रफल के आधार पर यह राज्य  भारत देश का सबसे बड़ा राज्य था, क्योंकि इस समय तक वर्तमान का छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य इसका भाग हुआ करता था।
  • प्रसिद्ध हीरे की खान इसी राज्य के पन्ना में है।
  • मध्यप्रदेश में मुख्य जनजातियाँ (Tribal) गौड़ , भील , बैगा , कोकरू , भादिया , कॉल तथा सहारिया है ।
  • इस राज्य में लोकनृत्य (Folk Dance) मटकी , गणगौर , बधाई , बरेदी , नौरता तथा भगोरिया है।
  • कैलाश सत्यार्थी, लता मंगेशकर, चंद्रशेखर आज़ाद, तथा माखनलाल चतुर्वेदी जैसी शख्सियत का यह राज्य जन्म स्थल (Birth Place) रहा है।
  • इस राज्य में स्थित भीमबेटका की गुफाये( Caves of Bhi verma) पाषाण काल की है, जो इस राज्य का प्राचीन काल से संबंध दर्शाता है।
  • 2011 की जनगणना के अनुसार मध्यप्रदेश जनसंख्या के आधार पर देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है।
  • मध्यप्रदेश राज्य देश का दूसरा सबसे बडा सीमेंट (Cement) उत्पादक राज्य भी है।

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