मणिपुर की पहली महिला राज्यपाल कौन है।

पूर्वोत्तर भारत का राज्य मणिपुर भारत के छोटे राज्यों में से एक है। कुल 22,327 स्कॉयर किलोमीटर की क्षेत्रफल के साथ यह राज्य भारत के 29 राज्यों में से क्षेत्रफल की दृष्टि से 24वें स्थान पर है। मणिपुर आबादी के लिहाज से भी देश के छोटे राज्यों में शामिल हैं। इस राज्य की कुल आबादी 2011 की जनगणना के हिसाब से 2,855,794 थी। जनसंख्या की दृष्टि से भी यह राज्य देश के राज्यों में 24वें स्थान पर ही है। मणिपुर एक स्वतंत्र राज्य हुआ करता था लेकिन आज़ादी के समय इसका विलय 11 अगस्त 1947 को भारत के साथ हो गया।

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भारतीय गणतंत्र के इस राज्य के भी कानूनी प्रमुख अन्य राज्यों की ही तरह राज्यपाल ही होते हैं। 21 जनवरी 1972  को इस राज्य का  गठन हुआ और इसके पहले राज्यपाल B K Nehru नियुक्त किए गए। इनका कार्यकाल 21 जनवरी 1972 से ले कर 20 सितंबर 1973 तक रहा था। इसके बाद के सभी राज्यपाल पुरुष ही रहे थे। मणिपुर के राज्यपाल के रूप में पहली बार किसी महिला की नियुक्ति 2016 में हुई। मणिपुर की पहली और अब तक एकमात्र महिला राज्यपाल नजमा अकबराली हेपतुल्ला ( Najma Akbarali Heptulla ) हैं।

नजमा हेपतुल्ला – मणिपुर की पहली महिला राज्यपाल

  • संक्षिप्त परिचय

नजमा हेपतुल्ला का पूरा नाम नजमा अकबराली हेपतुल्ला है। इनका जन्म 13 अप्रैल 1940 को हुआ था। नजमा हेपतुल्ला की नियुक्ति मणिपुर के राज्यपाल के रूप में 21 अगस्त 2016 को की गई थी। मणिपुर की वर्तमान राज्यपाल भी नजमा हेपतुल्ला ही हैं। मणिपुर की राज्यपाल होने के साथ साथ नजमा हेपतुल्ला जामिया मिलिया इस्लामिया की Chancellor भी हैं। Chancellor के रूप में इनकी नियुक्ति 26 मई 2017 को की गई थी।

नजमा हेपतुल्ला का राजनीतिक जीवन

नजमा हेपतुल्ला का सम्बंध शुरुआती लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी से रहा था। Congress के साथ इनका राजनीतिक जीवन काफी तेजी से ऊपर चढ़ा और पार्टी की ओर से कई आला पद पर काम करने का मौका मिला। 1980 से ले कर अगले 4 कार्यकाल तक नजमा Congress Party की ओर से राज्यसभा की सदस्य रही थी।

महाराष्ट्र से नजमा लगातार 1980, 1986, 1992 और 1998 में राज्यसभा सांसद रही थी। इसी बीच 1986 में इन्हें Congress Party का General Secretary भी बनाया गया था। सात ही इन्हें NSUI की भी ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी। नजमा हेपतुल्ला जनवरी 1985 से जनवरी 1986 तक तथा 1988 से 2004 तक राज्यसभा की Deputy Chairperson भी रही थीं।

एक समय तक Congress Party की अहम सदस्य रही नजमा हेपतुल्ला अचानक 2004 में इस पार्टी से अलग हो कर भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गयी। इनके Congress से अलग होने का मुख्य कारण, कथित रूप से Congress Party की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ कुछ मतभेद उत्पन्न होना रहा। BJP से जुड़ने के बाद इन्हें 2007 में NDA की ओर से उपराष्ट्रपति के चुनाव में उतारा गया। इसमें इन्हें हामिद अंसारी के हाथों 233 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था।

Congress के सात जुड़े रहते हुए तथा BJP के साथ आने के बाद भी नजमा राज्यसभा की सदस्य बनी रहीं। 2012 में BJP से जुड़ने के बाद इन्हें मध्यप्रदेश से राज्यसभा का सदस्य बनाया गया। यह अब तक 6 बार राज्यसभा सांसद रह चुकी हैं। राजनीति के साथ साथ नजमा हेपतुल्ला ने लेखन में भी हाथ आजमाया है। इंहोने कई किताब लिखीं है जिसमें AIDS पर लिखी किताब, AIDS: Approaches to Prevention खासा मशहूर है।

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