मनमोहन सिंह की जीवनी – Manmohan Singh Biography In Hindi

  • श्री मनमोहन सिंह
  • भारत के प्रधानमंत्री :- तेहरवें ( 13th )
  • कार्यकाल :- 22 मई, 2004 – 26 मई 2014                     
  • जन्म :- 1932
  • राजनीतिक पार्टी :- भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस                                                                                              
  • निर्वाचन क्षेत्र :- राज्यसभा सांसद, असम

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भारत के चौदहवें प्रधान मंत्री, Dr. Manmohan Singh-डॉ0 मनमोहन सिंह की गणना विश्व के उच्च स्तर के Economists (अर्थशास्त्रियों) में की जाती है। उनकी अकादमिक उपलब्धियों के साथ साथ परिश्रम और काम करने के तरीकों की प्रशंसा सभी राजनीतिक व्यक्तियों ने की है। 2009 की आर्थिक मंदी के दौर में भारत की अर्थव्यवस्था को सफलतापूर्वक उसके प्रभाव से दूर रखने के लिए दुनिया भर में उनकी प्रशंसा हुई। भारत की राजनीति में श्री मनमोहन सिंह, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बाद, लगातार दो बार Prime Minister के पद पर रहते हुए अपने Tenure (कार्यकाल) को पूरा करने वाले प्रथम व्यक्ति हैं। 21st Century में एक नये दृष्टिकोण के साथ नए भारत की महत्वाकांक्षाओं गति देने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। फिर चाहे वो United States of America के साथ परमाणु-ऊर्जा प्रयोग का करार हो या भारत के लोगों तक “Right to Information” सूचना का अधिकार पहुँचाने की बात हो, मनमोहन जी की प्रतिबद्धता और Leadership को सभी ने सराहा है।

जन्म, शिक्षा और प्रारम्भिक जीवन

मनमोहन सिंह जी का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के एक गाँव गह (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। सिख धर्म से ताल्लुक रखने वाले मनमोहन सिंह जी के पिता श्री गुरमुख सिंह तथा माता अमृत कौर थीं। किन्तु मनमोहन सिंह जी की माता का निधन उनके बचपन में ही हो गया था। 1947 में भारत के विभाजन के बाद उनका परिवार पाकिस्तान वाले हिस्से को छोड़कर, सीमा पार कर भारत के अमृतसर में बस गया। डॉ0 सिंह ने 1948 में पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं से Economics में 1952 में स्नातक की डिग्री हासिल की। मास्टर्स की शिक्षा भी उन्होने अर्थशास्त्र में ही 1954 में पंजाब  विश्वविद्यालय से पूरी की थी।  मैट्रिक की पढ़ाई से लेकर, Economics (अर्थशास्त्र) में Post Graduation की पढ़ाई तक, Dr. Manmohan Singh जी हमेशा first class में ही पास हुए हैं।

भारत में मास्टर्स की शिक्षा पूरी करने के बाद, मनमोहन जी ब्रिटेन के विश्व प्रसिद्ध कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा के लिए दाखिला लिया।  कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से उन्होने 1957 में अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी ऑनर्स की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होने ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के नफ़िल्ड कॉलेज से 1962 में डी0 फिल0 (D. Phil) की डिग्री भी पूरी की।

University of Cambridge (कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय) में शिक्षा के दौरान ही उन्हें इस बात का अनुभव हुआ कि मानवीय व्यवहार और जीवन को प्रभावित करने तथा एक नयी दिशा देने में Politics की रचनात्मक भूमिका होती है। राजनीतिक जीवन के माध्यम से हम Nations और Public के जीवन को और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

शैक्षणिक कैरियर

University of Cambridge और University of Oxford जैसे विश्व प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थानों से शिक्षा पूरी करने के बाद, मनमोहन सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय और फिर प्रतिष्ठित दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में Economics के Professor की भूमिका निभाई। Delhi School of Economics में वे International Trade के प्रोफेसर थे। इस काल में उन्होने संयुक्त राष्ट्र के UNCTAD सचिवालय में संक्षिप्त समय (1966-1969) के लिए कार्य भी किया। 1987 और 1990 के बीच जिनेवा में मनमोहन जी को साउथ कमिशन के महासचिव के रूप में कार्य करने का मौका मिला।

भारत सरकार के अधीन पदों पर कार्य

1960 के दशक में एक उच्च स्तर के अर्थशास्त्री के रूप में ख्याति पा चुके मनमोहन सिंह को जल्द ही भारत सरकार के अंतर्गत पदों पर कार्य करने का मौका मिला। सबसे पहले उन्हे 1971 में भारत सरकार के Economic Advisor (आर्थिक सलाहकार) के रूप में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय में कार्य करने का मौका दिया गया। इस अनुभव के बाद अगले ही वर्ष 1972 में उन्हें इन्दिरा गांधी की सरकार में वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप नियुक्त कर दिया गया। वित्त मंत्रालय में ही उन्हे 1976 में Finance Ministry के Secretary के पद पर कार्य करने का मौका मिला।

इसके अलावा Dr. Manmohan Singh जी ने Government of India के अधीन कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवायेँ दी हैं उनमें निम्नलिखित प्रमुख हैं:

  • भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर(1982-1985);
  • योजना आयोग के उपाध्यक्ष; (1985-87);
  • दक्षिण आयोग के महासचिव; (1987-1990)
  • प्रधान मंत्री के सलाहकार; (1990) और
  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष (मार्च 1991)

राजनीतिक कैरियर

मनमोहन सिंह जी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत, 1991 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री, श्री पी० वी० नरसिम्हा राव जी के कहने से हुई थी। स्वतंत्र भारत के आर्थिक इतिहास में 1991 से लेकर 1996 तक का समय बदलाव और नई नीतियों को लागू करने का समय माना जाता है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण और विदेशी निवेश के आगमन को प्रोत्साहन देने के लिए उठाए गए कदमों के लिए भी जाना जाता है। इसी काल में Indian Markets को अन्य देशों के लिए खोल दिया गया था।

21 जून 1991 के दिन मनमोहन सिंह जी ने श्री पी० वी० नरसिम्हा राव की सरकार में भारत के वित्त मंत्री के रूप में शपथ ली थी। इस पद पर वे 16 मई 1996 तक बने रहे। इसके लिए मनमोहन जी को 1991 में राज्य सभा के संसद सदस्य के रूप में असम से चुना गया था। भारत के Finance Minister के तौर पर Economic Reforms की एक व्यापक नीति की शुरुआत करने में उनके द्वारा किए गए कार्यों को दुनिया भर के Economists (अर्थशास्त्रियों)  ने सराहा है। बल्कि यह कहना भी अतिश्योक्ति नहीं है कि 1991 से 1996 तक का काल मनमोहन जी की नीतियों का समय था।

सोवियट संघ के विघटन के कारण भारतीय अर्थव्यस्था 1991 में कठिनाई के दौर से गुजर रही थी क्योंकि उस समय भारत का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 8.5 प्रतिशत के बिन्दु तक पहुँच रहा था और Balance Of Payment डेफ़िसिट भी नियंत्रण से बाहर हो रहा था। इसके अलावा भारत का Foreign Reserves (विदेशी मुद्रा भंडार) भी न्यूनतम स्तर पर पहुँच चुका था। ऐसे में भारत की Economy पर Economic Crisis का खतरा मंडरा रहा था। भारत के पास कच्चे तेल और भोजन जैसी आवश्यक वस्तुओं को खरीदने के लिए भी Foreign Currency (डॉलर) पर्याप्त नहीं थी। यह स्थिति इसलिए हुई क्योंकि भारत का Export आयात की तुलना में काफी कम हो गया था। ऐसे में भारत के सामने केवल एक ही रास्ता था की वो International Monetary Fund (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोश) से मदद की गुहार करे और Loan प्राप्त करे।

International Monetary Fund (IMF) ने उस समय भारत को 3.9 बिलियन डॉलर का अंतरिम ऋण देना मंजूर किया किन्तु इसके बदले भारत को अपने कुछ सोने के भंडार गिरवी रखने पड़े। International Monetary Fund ने ऋण के बदले भारत की Economic Policies में परिवर्तन भी करवाए।

1991 से पहले भारत की अर्थव्यवस्था अपने लाइसेंस राज, राष्ट्रीयकरण और अर्थव्यवस्था पर सरकारी नियंत्रण के लिए जानी जाती थी। जवाहरलाल की नीतियों के कारण भारत ने 1947 से अपने बाज़ारों को विदेशी निवेश और कंपनियों के लिए लगभग बंद कर रखा था। किन्तु 1991 के आर्थिक संकट के कारण अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से लिए गए ऋण के बदले भारत को अपने बाज़ारों को अन्य देशों के लिए खोलना पड़ा। 1991 में अपनाई गयी नीतियों के कारण भारत मुक्त या पूंजीवादी अर्थव्यस्था की ओर अग्रसर हुआ।

Finance Minister के रूप में श्री मनमोहन सिंह जी ने पी० वी० नरसिम्हा राव की अनुमति पर भारत में परमिट राज को खत्म कर के अर्थव्यवस्था पर Government Regulation (सरकारी नियंत्रण) को कम कर दिया। इसके अलावा Foreign Investment के आगमन के लिए Import Tax को भी काफी कम कर दिया गया।

मनमोहन सिंह जी ने एक राज्य सभा सांसद के रूप में असम राज्य से कई बार चुनाव जीते हैं। वे 1991, 1995, 2001, 2007, 2013 में इस राज्य से Rajya Sabha सांसद ( MP) रहे हैं। 1998 से 2004 के बीच जब केंद्र में Bharatiya Janata Party की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार थी, तब मनमोहन सिंह जी ने राज्य सभा में Leader Of Opposition (विपक्ष के नेता) की भूमिका निभाई थी।

भारत के प्रधानमंत्री के पद पर  : 22 मई, 2004-26 मई 2014

2004 में हुए भारत के लोक सभा चुनावों के बाद, काँग्रेस पार्टी की सरकार बनी। सर्वसम्मति से काँग्रेस पार्टी ने डा0 मनमोहन सिंह जी को प्रधानमंत्री के पद के लिए चुना। 22 मई 2004 के दिन उन्होने भारत के 14वें प्रधान मंत्री के रूप में शपथ ली। मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री के रूप में अपने लिए जो लक्ष्य बनाए थे उनमें पड़ोसी Pakistan के साथ Relations बेहतर कर के शांति हासिल करना, गरीबों की दशा में Improvement लाना, और भारत में बसने वाले अलग-अलग Religion के लोगों के बीच बेहतर संबंध बनाना, प्रमुख थे।

2008 में उनकी सरकार के ऊपर अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया किन्तु अपने राजनीतिक कौशल से वे इससे बच गए। यह प्रस्ताव लोक सभा में पास नहीं हो पाया। इसके बाद मई 2009 में हुए लोक सभा के आम चुनावों में काँग्रेस पार्टी को पहले से ज्यादा सीटें मिलीं। डा0 मनमोहन सिंह को एक बार पुनः काँग्रेस पार्टी की तरफ से भारत के प्रधानमंत्री के पद पर सेवा देने का मौका मिला। अपने दूसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री के रूप में उन्होने 22 मई 2009 को शपथ ली थी। May 2014 में हुए General Elections में BJP (भारतीय जनता पार्टी) को मिली अप्रत्याशित बहुमत के कारण Dr. Manmohan Singh का Tenure (कार्यकाल) समाप्त हो गया और श्री Narendra Modi भारत के प्रधानमंत्री बने।

पुरस्कार और सम्मान

मनमोहन सिंह जी को राजनीतिक और सामाजिक जीवन में दिये गए योगदान और एक अर्थशास्त्री के रूप में किए गए कार्यों के लिए लिए देश-विदेश के कई महत्वपूर्ण Awards और Honours से नवाजा गया है। इनमें निम्नलिखित प्रमुख हैं:

  • एडम स्मिथ सम्मान (1956);
  • पद्म विभूषण (1987);
  • जवाहरलाल नेहरू जन्म शताब्दी पुरस्कार (1995);
  • लोकमान्य तिलक पुरस्कार (1997);
  • द एशिया मनी अवार्ड फॉर द फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर (1993 और 1994);
  • उत्कृष्ट सांसद का पुरस्कार (2002);
  • टाइम पत्रिका का ‘दुनिया के शीर्ष 100 प्रभावशाली लोग’ में स्थान(2005);
  • वर्ल्ड स्टैट्समैन अवार्ड(2010);
  • Japan के Top राष्ट्रीय पुरस्कार “द ग्रैंड कॉर्डन ऑफ़ द ऑर्डर ऑफ़ द पॉलाउनिया फ्लावर” (2014)

इसके अलावा Dr. Manmohan Singh जी को देश-विदेश की कई Universities और संस्थाओं से मानद उपाधियाँ भी प्राप्त हुईं हैं।

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