Mobile का अविष्कार किसने किया इसका Full Form क्या है

आपके सवाल का जवाब अगर एक लाइन में देना हो तो कहेंगे कि , मोबाइल फोन का आविष्कार Martin Cooper ने किया, जिन्हें उन्हें जानने वाले marty के नाम से बुलाते हैं। पर कहानी यहीं खत्म नहीं होती आज शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करता होगा।  एक समय ऐसा था जब शायद ही कहीं किसी के पास मोबाइल हुआ करता था, परंतु आज मोबाइल लगभग हर किसी की दैनिक दिनचर्या का अभिन्न अंग बन गया है।

इसलिए मार्टिन कूपर पर एक बार फिर लौटेंगे फिलहाल बात करते हैं कि  यह मोबाइल नाम का device  कितना अद्भुत है। क्या आपको पता है कि जब 1983 में पहली बार मोबाइल फोन बिकने आया तो इसकी कीमत लगभग $4000 थी।

वहीं 2012 आते-आते एप्पल कंपनी हर एक दिन लगभग 340000 आईफोन बेच रही थी। study के अनुसार  मोबाइल फोन से रेडिएशन हो सकता है जो आप में इनसोम्निया जैसी  बीमारियां पैदा कर सकता है। दुनिया का पहला मोबाइल कॉल मार्टिन कूपर ने ही किया था 1973 में। फिलहाल  मार्टिन को एक बार फिर यहीं छोड़ते हैं और आगे बढ़ते हैं।

mobile ka aviskar kisne kiya

आज आप में से बहुत कम लोग नोकिया device उपयोग में लाते हैं  पर घर-घर में मोबाइल पहुंचाने में इस कंपनी का बहुत बड़ा योगदान है। आप इस कंपनी की सफलता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि इसका एक बहुत मशहूर मॉडल था। जिसका नाम था 1100, केवल इस मॉडल के नोकिया ने लगभग  25 करोड़ मोबाइल बेचे थे।

यह अब तक का सबसे ज्यादा बिकने वाला इलेक्ट्रॉनिक device है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि दुनिया में मोबाइल ज्यादा लोगों के पास है वही टॉयलेट  कम लोगों के पास  है।  एक रिसर्च के अनुसार प्रतिदिन आप अपने मोबाइल को औसतन 110 बार लॉक अनलॉक करते हैं। चलिए  यह तो हो गई  मोबाइल फोन से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां। अब लौट कर चलते हैं मार्टिन कूपर Martin Cooper की ओर और आपको बताते हैं कि मोबाइल फोन का आविष्कार किन परिस्थितियों में हुआ ।

Mobile का अविष्कार कब हुआ India में पहला mobile phone कब आया –

1. मोबाइल का अविष्कारक मार्टिन कूपर
2. तारीख 3 अप्रैल 197
3. कंपनी का नाम मोटरोला
4. मॉडल नाम DynaTac
5. वजन (Weight) 2 किलो
6. मोबाइल लागत (Cost) 3000 Us डॉलर
7. भारतीय रूपये में लागत 2 लाख रूपये
8. भारत में पहला मोबाइल आया 15 अगस्त 1995 (दिल्ली)
9. पहला Sim Card बना 1991 में 
10. सबसे ज्यादा sell होने वाला मोबाइल Nokia 1100

Mobile का फुल फॉर्म क्या है।

मोबाइल का आविष्कार किसने किया उसके बारे में जानकारी प्राप्त कर लेने के बाद अब हम मोबाइल का फुल फॉर्म क्या होता है इसके बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं दोस्तों की ऐसी फसल में कोई भी मोबाइल का फुल फॉर्म नहीं होता लेकिन ऐसे ही सामान्य तौर पर इस नाम से जाना जाता है जो कि निम्न है।

  • M – Modified
  • O – Operation
  • B  – Byte
  • I   – Integration
  • L  – Limited
  • E  – Energy

मोबाइल फोन के अविष्कार की कहानी

मार्टिन कूपर  मोटरोला कंपनी में काम करते थे। इससे पहले कि हम आगे बढ़े आप थोड़ा   संचार के लिए उपयोग में लाये जाने वाले Electronic devices के बारे में थोड़ा बहुत समझ  ले। यह तीन तरह के होते है पहला है सिंपलेक्स Simplex , जहां एक तरफ से इंफॉर्मेशन की ब्रॉडकास्टिंग की जाती है  उदाहरण के लिए  टेलीविजन।

दूसरा है Half Duplex जहां पर कम्युनिकेशन दोनों तरफ से किया जाता है पर एक समय में एक ही तरफ से कुछ बोला जा सकता है उदाहरण के लिए पुलिस के द्वारा उपयोग में लाया जाने वाला रेडियो , आपने देखा होगा कि पुलिस वाले कुछ भी संदेश देने  के बाद over शब्द का उपयोग करते हैं ताकि सामने वाला समझ जाएं कि उसे अब बोलना है।

तीसरा तरह का device होता है Full Duplex, इस तरह के device में दोनों तरफ से व्यक्ति लगातार बोल सकते हैं और यही device है आपका मोबाइल। जब आप इन तीनों प्रकार के device के बारे में समझ गए तो एक बार फिर से Martin Cooper की तरफ लौटते हैं ।

जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि मार्टिन कूपर मोटरोला कंपनी में काम करते थे। मार्टिन कूपर एक इंजीनियर थे। मोटरोला कंपनी टू वे  रेडियो सिस्टम बनाने में सबसे ज्यादा सफल थी। सरल शब्दों में कहा जाए तो टू वे रेडियो सिस्टम एक प्रकार के half-duplex सिस्टम होते हैं।

मोटोरोला कंपनी का ज्यादातर फायदा इन्हीं device से आता था। मोटरोला की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी कंपनी थी AT&T । AT&T ने सेल्यूलर टेलिफोनिंग की  इन्वेंशन की थी। और इसी वजह से वे बड़ी संख्या में  गाड़ियों में लगने वाले टेलीफोन बनाया  करती थी। इस तरह के  गाड़ियों में लगे टेलीफोन से मोटरोला के बिजनेस को बहुत बड़ा खतरा था।

AT&T ने  तत्कालीन सरकार को इस बात के लिए मनाना शुरू कर दिया कि वे सभी तरह के कम्युनिकेशन के लिए उन्हें लाइसेंस दे दे, अगर सरकार ऐसा करती तो मोटरोला को भारी नुकसान  उठाना पड़ता। AT&T  की कम्युनिकेशन में  मोनोपोली  हो जाती और मोटोरोला मार्केट से बाहर हो जाती। इस समय मोटोरोला ने घोषणा की कि इसमें  वह AT&T को  Competition देगी। और अगर सही में मोबाइल टेलिफोन का विकास करना है तो जरूरी नहीं है कि इसे सिर्फ गाड़ी से लगाकर रखा जाए यह सबके हाथ में होना चाहिए और  इस तक पहुंच सभी की होनी चाहिए। और मोटोरोला ने अपने इस लक्ष्य को पाने के लिए काम शुरू कर दिया, और इस प्रक्रिया में मोटोरोला का नेतृत्व कर रहे थे मार्टिन कूपर।

अप्रैल 1973 आते-आते मोटोरोला अपने लक्ष्य तक पहुंच गया था और उन्होंने मोबाइल फोन का अविष्कार कर लिया था। पर पहले मोबाइल कॉल की कहानी बहुत ही रोचक है।  मार्टिन कूपर ने मोबाइल फोन तो बना लिया था परंतु दुनिया को इसके बारे में नहीं पता था।

दुनिया को इसके बारे में जानकारी देने के लिए मोटोरोला ने एक जर्नलिस्ट को मार्टिन कूपर से मिलवाने की व्यवस्था की। जब जर्नलिस्ट मार्टिन कूपर से उनके ऑफिस में बात कर रहा था तो उन्होंने पूछा कि कहां है आपका मोबाइल फोन / सेल्यूलर फोन,  तो मार्टिन ने एक device उस  जर्नलिस्ट को दिखाया । फिर दोनों बात करते करते बाहर खाना खाने के लिए निकल गए और मार्टिन ने  अपने साथ मोबाइल फोन भी बाहर ले जाने का निर्णय लिया।

जब वह बता रहे थे कि इस तरह के device से कहीं भी किसी को भी कॉल किया जा सकता है तो जर्नलिस्ट उनसे पूछ बैठा आपके हाथ में मोबाइल है, इससे किसी को कॉल कर सकते हैं क्या ? मार्टिन ने कहा हाँ ।   मार्टिन ने जिस व्यक्ति को कॉल लगाया उस व्यक्ति का नाम  था JOEL ENGLE,  आपको पता है कि JOEL ENGLE , AT&T   के लिए काम करते थे।  सरल शब्दों में कहा जाए तो वे मार्टिन की कंपनी की दुश्मन कंपनी में काम करते थे और मार्टिन  कि  प्रतिस्पर्धा   JOEL ENGLE  से ही थी ।

जब मार्टिन ने कॉल लगाया तो वे दोनों कुछ देर तक बात करते रहे पर जब यह कॉल खत्म हुआ तो तीन लोगों की अलग-अलग सोच थी।  मार्टिन  यह जान चुके थे कि उन्होंने दुनिया का पहला मोबाइल बना लिया है। JOEL ENGLE  यह बात जान चुके थे कि  वह मोबाइल फोन बनाने की दौड़ में हार गए हैं। इन दोनों की बातों का गवाह जर्नलिस्ट यह बात  जान गया था कि दुनिया को बदलने वाला नया device मोटोरोला के हाथ में है । जी हां इस मोबाइल device ने ही मोटोरोला को हारने से बचा लिया। अब जब आपने मोबाइल फोन के अविष्कार की कहानी  जान ली तो इस विषय में आगे बढ़ते हैं ।

1G से लेकर 5G तक का सफर :

आप कभी-कभी यह सुनते होंगे कि , इसमें इंटरनेट बहुत धीमा है क्योंकि 2G  है ।2G  से तेज इंटरनेट 3G  है । रिलायंस 4G  टेक्नोलॉजी लेकर आया है । 5G  टेक्नोलॉजी आने वाली है । आपके लिए यह सारी बातें Confusing होती होंगी  क्योंकि आपको इन तकनीकों में अंतर ही नहीं पता होगा । चलिए हम  इन तकनीकों से आपको अवगत कराते हैं ।

1G :– 1G  को सरल भाषा में फर्स्ट जनरेशन मोबाइल कहते हैं । इस टेक्नोलॉजी में केवल दो व्यक्ति बात कर सकते थे। यह तकनीक उतनी सुरक्षित भी नहीं थी जितनी इसके बाद  में आने वाली तकनीकें थी। 1G  एक एनालॉग टेक्नोलॉजी थी जो बाद में आने वाली डिजिटल टेक्नोलॉजी से बहुत पीछे थी । पर फिर भी यह लैंडलाइन वाली टेक्नोलॉजी से तो बेहतर ही थी ।1G  मे data transfer  की स्पीड लगभग 2.4 किलोबाइट प्रति सेकेंड थी ।

2G :– 2G या कहें तो सेकंड जनरेशन मोबाइल तकनीक , के आने के पहले मोबाइल फोन केवल बातों के लिए हुआ करते थे। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इसका आविष्कार अमेरिका में नहीं बल्कि फिनलैंड में हुआ था। आपको यह जानकर भी आश्चर्य होगा कि फिनलैंड में अविष्कार का मंत्रालय होता है , जी हां Innovation ministry।

2G तकनीक आने के बाद आप कॉल के अलावा भी कुछ चीजें कर सकते थे जैसे कि एस एम एस भेज सकते थे और इसके साथ ही साथ एम एम एस भी भेज सकते थे। यह वही तकनीक थी जो मोबाइल को एनालॉग से डिजिटल की ओर ले कर आई। जहां पहले मोबाइल केवल बात करने के लिए उपयोग किए जाते थे, 2G   के आने के बाद इन मोबाइल का उपयोग एसएमएस एमएमएस पिक्चर भेजने के लिए भी होने लगा ।

2G के आने के बाद 1G लगभग विलुप्त हो गया परंतु , 3G, 4G  एवं 5G  के आने के बाद भी दुनिया के बहुत बड़े हिस्से में आज भी 2G  उपयोग में लाया जाता है । जहां तक data transfer  की बात है 2G  में  इसकी दर   50 किलोबाइट प्रति साकेत तक होती थी, जो कि बाद में  इसी में नई तकनीक आने के बाद एक मेगाबाइट पर सेकंड तक पहुंच चुकी थी ।

3G :–  भारत में भले ही 3G  2010 के आसपास आई हो परंतु दुनिया में यह तकनीक 1998 तक आ चुकी थी। इसमें data transfer  का rate  पहले की तुलना में बहुत ज्यादा था। जहां पहले वीडियो देखना मुश्किल होता था।

3G आने के बाद  वीडियो कॉलिंग तक  संभव हो गई थी। इसके लिए बहुत से तकनीकी विशेषज्ञों ने मोबाइल ब्रॉडबैंड जैसे शब्द का इस्तेमाल किया। 3G के आने के बाद मोबाइल फोन एक छोटे कंप्यूटर जैसे बन गए। जहां तक data transfer  की बात है इसकी दर 3G  में  2 मेगाबाइट प्रति  सेकंड थी।

1G अगर दुनिया में मोबाइल क्रांति लेकर आया था तो 3G दुनिया में डाटा क्रांति लेकर आया। 3G  के पहले मोबाइल मूलतः  कॉलिंग device हुआ करते थे परंतु इसके बाद इसमें इंटरनेट बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया ।

4G :- 4G ,जी हां वही टेक्नोलॉजी जो भारत में रिलायंस जिओ लेकर आया और बाद में लगभग सभी बड़ी कंपनियों ने अपना ली। भारत में भले ही यह 2010 के बाद आया हो परंतु दुनिया में यह तकनीक 2008 के आसपास आ चुकी थी । जहां तक data transfer  की दर की बात है 4G  device में यहां एक गीगाबाइट प्रति सेकेंड तक पहुंच सकती है ।

5G :- अभी कुछ ही दिनों पहले तक 5G  को भविष्य की टेक्नोलॉजी कहा जाता था , परंतु यह तकनीक आपके दरवाजे तक आ चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक में data transfer  की दर लगभग  20 गीगाबाइट प्रति सेकंड तक पहुंच सकती है । अभी इस तकनीक के भारत आने में कुछ समय है परंतु दक्षिण कोरिया जैसे देश इस तकनीक में काफी तरक्की कर रहे हैं।

मोबाइल क्रांति में योगदान देने वाली तीन सबसे बड़ी कंपनियां :

तकनीक महत्वपूर्ण है परंतु इस तकनीक को आपके दरवाजे तक आपके हाथों तक आपके जेब तक पहुंचाने वाली कंपनियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण है ।  मोटरोला, नोकिआ एवं एप्पल तीन ऐसी कंपनियां है जिन्होंने मोबाइल क्रांति में सबसे ज्यादा योगदान दिया है।

आपके हाथ में जो भी मोबाइल हो जिस किसी कंपनी का मोबाइल हो कहीं ना कहीं उस तकनीक का कोई ना कोई हिस्सा इन तीन कंपनियों में से एक से जरूर आया होगा । हो सकता है कि आप में से कुछ लोग सोचते हो कि एपल तो ठीक है परंतु नोकिआ और मोटोरोला को इसमें शामिल क्यों किया है ? अगर आप युवा हैं तो आप इस बात को समझ नहीं पाएंगे परंतु लोगों के हाथों तक मोबाइल पहुंचाने में मोटोरोला एवं नोकिआ का उतना ही योगदान है जितना स्मार्टफोन को दुनिया के सामने लाने में एप्पल का है। 

इन तीनों कंपनियों के बारे में हम एक-एक करके बात करेंगे।  हम यहां किसी भी कंपनी की कहानी नहीं बताएंगे बल्कि मोबाइल से जुड़े उनके योगदान पर ही बात करेंगे।

मोटोरोला :- मोटोरोला कंपनी मोबाइल क्रांति में कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जितने पेटेंट इस तकनीक से  संबंधित मोटरोला कंपनी के पास हुआ करते थे उतने किसी और कंपनी के पास नहीं थे। सरल शब्दों में कहा जाए तो कोई भी मोबाइल बनाने वाली कंपनी मोबाइल बनाते समय मोटरोला के पेटेंट का उपयोग करती थी। आप तो यह पहले ही पढ़ चुके हैं कि दुनिया में पहला मोबाइल बनाने का श्रेय  भी  मोटरोला को ही जाता है ।

मोबाइल फोन बाजार में आने से पहले भी सेल्युलर टेक्नोलॉजी में मोटोरोला दुनिया की सबसे बेहतरीन कंपनी थी। जैसा  कि हम पहले ही बता चुके हैं कि मोबाइल रेडियो की दुनिया में मोटोरोला नंबर  एक कंपनी थी।  जब इस कंपनी को at&t जैसी कंपनी से खतरा आया तो फिर इस कंपनी ने मोबाइल का आविष्कार कर  यह दौड़ फिर से जीत ली।  आप में से कुछ लोगों को लग रहा होगा कि मोटरोला इतनी महत्वपूर्ण कंपनी होने के बावजूद आज बाजार में  ना के बराबर क्यों हो।  उसका कारण यह है कि मोटोरोला समय के साथ तेजी से बदल नहीं पायी।

जब तक फीचर फोन बाजार में कब्जा जमाए बैठे थे तब तक मोटरोला एक बड़ी कंपनी थी परंतु जैसे ही स्मार्टफोन का उदय हुआ मोटोरोला एवं उसके जैसी अन्य कंपनियां समय के साथ तेजी से नहीं बदल पाई और धीरे-धीरे करके बाजार के बाहर हो गई।  मोटोरोला को गूगल ने खरीद लिया और कुछ दिन चलाने के बाद  लेनोवो को बेच दिया।  पर बेचने से पहले मोटरोला के सारे पेटेंट अपने नाम पर करा लिये। इससे पता चलता है कि मोटरोला के पेटेंट आज भी कितने महत्वपूर्ण है ।

नोकिया :–  अगर  मोबाइल टेक्नोलॉजी को दुनिया के सामने लाने का श्रेय मोटरोला कंपनी को जाता है तो इस तकनीक को हर किसी के घर घर में पहुंचाने का श्रेय नोकिया को जाता है । हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि केवल एक नोकिया का मॉडल 250000000 की संख्या में बिका था।  अगर आप आज से 10 साल पहले जाएं तो 10 में से सात मोबाइल इसी कंपनी के होते थे।  यह मोबाइल की दुनिया की नंबर 1 कंपनी थी। इस कंपनी के बारे में सबसे महत्वपूर्ण एवं आश्चर्यजनक बात यह है कि यह कंपनी अमेरिका या चाइना से नहीं आती थी  बल्कि फिनलैंड से आती थी। 

जी हां जिस देश के बारे में हम पहले ही बता चुके हैं कि वहां पर इनोवेशन मिनिस्ट्री होती है।  अब आप सोच रहे होंगे फिर नोकिआ को हुआ क्या यह कैसे मार्केट में इतनी पिछड़ गई। नोकिया के साथ भी वही समस्या हुई जो मोटरोला के साथ हुई थी, यह समय के साथ तेजी से परिवर्तन नहीं कर सकी।  स्मार्टफोन के आने से पहले हर एक मोबाइल कंपनी का अपना एक ऑपरेटिंग सिस्टम हुआ करता था, परंतु स्मार्टफोन आने के बाद यह दुनिया दो हिस्सों में बट गई एक था एप्पल कंपनी का iOS  और दूसरी तरफ गूगल का बनाया हुआ एंड्राइड था।

केवल वह कंपनियां मार्केट में रह गई जो एंड्राइड तेजी से अपना पाई। नोकिआ बहुत दिनों तक अपने सिंबियन ऑपरेटिंग सिस्टम पर ही टिका रहा और जब उसने एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम उपयोग में लाने शुरू किए तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नोकिआ को माइक्रोसॉफ्ट ने खरीद लिया परंतु इससे यह  फिनलैंड की कंपनी के पास वापस चली गई है । देखते हैं यह फिर से उदय हो पाती है या नहीं।

एप्पल :- अगर मोटोरोला ने मोबाइल तकनीक आविष्कार किया, और  नोकिया ने  इस तकनीक को घर-घर तक पहुंचाया।  तो एप्पल ने क्या किया?  एप्पल ने मोबाइल फोन को कंप्यूटर के बराबर लाकर खड़ा कर दिया।

एप्पल के आईफोन आने के पहले मोबाइल फोन केवल बातों के लिए उपयोग में लाए जाते थे और उसमें बड़ी मुश्किल से इंटरनेट का उपयोग , वेब  ब्राउजिंग के लिए किया जा सकता था।   स्मार्टफोन आने से पहले वाले फोनों में मोबाइल ब्राउजिंग सर दर्द देने वाली एक समस्या थी। और इसका कारण था कि फीचर फोन में navigation  की कोई व्यवस्था नहीं थी , बटनो के माध्यम से navigation  अत्यंत जटिल काम था।  परंतु एप्पल ने टच स्क्रीन मोबाइल फोन  लाकर ना सिर्फ इस समस्या को हल कर दिया बल्कि मोबाइल फोन को कंप्यूटर के ज्यादा करीब ला दिया।  

स्मार्ट फोन आने के बाद आप अपने मोबाइल पर बात कर सकते थे, वीडियो कॉल कर सकते थे, मूवी देख सकते थे गाने सुन सकते थे सारे काम कर सकते थे।  एप्पल ने एक रणनीति अपनाई जिसके तहत  यह कंपनी मोबाइल फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम भी बनाती और मोबाइल device भी बनाती । यह कंपनी आज भी उसी रणनीति पर काम कर रही है।  इस रणनीति के उलट गूगल ने थोड़े बहुत ही मोबाइल device बनाये है परंतु गूगल मुख्यतः ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड बनाने के लिए जानी जाती है । 

आप सोच रहे होंगे कि क्या टचस्क्रीन तकनीक एप्पल ने बनाई थी तो इसका जवाब है नहीं यह किसी और कंपनी की तकनीक थी।परंतु इस तकनीक को सही तरीके से जनता के सामने पेश करने का काम एप्पल ने किया था। एप्पल की reputation का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि आज भी एप्पल के आईफोन रखना Status symbol माना जाता है। आप आईफोन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि एक समय आईफोन ने एप्पल को दुनिया की सबसे अमीर कंपनी बना दिया था। आज भी आईफोन सबसे ज्यादा मार्जिन वाला प्रोडक्ट है ।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको इस सवाल का जवाब मिल गया होगा कि , मोबाइल का आविष्कार किसने किया है ? और इसके साथ ही मोबाइल से जुड़ी अन्य  जानकारियों से भी आप अवगत हो गए होंगे।  ऐसी ही रोचक जानकारियों के लिए हमारे साथ बने रहे ।

मोबाइल का हिंदी नाम क्या है।

मोबाइल के बारे में इतनी सारी जानकारी प्राप्त कर लेने के बाद हम अब मोबाइल का हिंदी नाम क्या है अर्थात मोबाइल को हिंदी में किस नाम से जाना जाता है इसके बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं तो हम आपके यहां पर बताना चाहते हैं कि मोबाइल को हिंदी में दूरभाष यंत्र के नाम से जाना जाता है। शायद ही आपने इससे पहले अभी तक मोबाइल का यह हिंदी नाम सना हुआ होगा।

टॉप 5 Mobile Internet यूजर देश 2019 में 

1. चीन 82 करोड़
2. भारत 56 करोड़
3. यूनाइटेड स्टेट्स 29 करोड़
4. ब्राजील 14 करोड़ 90 लाख
5 इंडोनेशिया 13 करोड़ 32 लाख

Top – 10 Interesting facts about mobile phone in Hindi

अगर भारत में बात करें कि पहला मोबाइल फोन भारत में कब launch हुआ। तो भारत में पहला मोबाइल फोन 15 अगस्त 1995 में भारत की राजधानी दिल्ली में लांच किया गया था।

  1. दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला मोबाइल नोकिया कंपनी का मॉडल नंबर 1100 था। इस मॉडल की करीब 25 करोड़ मोबाइल sale हुए थे।
  2. 2G टेक्नोलॉजी की शुरुआत 1991 में फ़िनलैंड में हुई थी और आपकी जानकारी के लिए बता कि Nokia मोबाइल कंपनी भी फ़िनलैंड की ही है।
  3. जापान में 90% लोग water proof मोबाइल खरीदना पसंद करते हैं। इसका कारण वह नहाते समय भी मोबाइल का use करना नहीं छोड़ते।
  4. मोबाइल फोन कलाई घड़ी की बिक्री काफी कम कर दी है क्योंकि आज से करीब 10 साल पहले तक हाथ घड़ी का उपयोग 70% लोग करते थे लेकिन अब यह आंकड़ा घटकर लगभग 10% पर रह गया है।
  5. सबसे ज्यादा मोबाइल दुनिया में चीन देश तैयार करता है। इस देश में दुनिया भर में उपलब्ध 70% मोबाइल बनाए जाते हैं।
  6. आज के समय में सबसे ज्यादा मोबाइल का use व्हाट्सएप चलाने और गेम खेलने के लिए किया जाता है मोबाइल पर 40% लोग सिर्फ गेम खेलते हैं तथा हर दूसरा आदमी व्हाट्सएप ऑपरेट करता है।
  7. वर्तमान समय में मोबाइल फोन कई प्रकार के operating system जैसे android, window, ios में 2G, 3G, 4G, 5G की latest technology के साथ उपलब्ध है।
  8. 1983 में सबसे Voice mail की सुविधा शुरू की गई थी और लगभग इसी के 10 साल बाद Mobile में internet का use कर पाना संभव हो पाया था।
  9. पहला मेसेज नील पोपवोर्थ के द्वारा भेजा गया था जिसमे उन्होंने Merry Christmas लिखा था।
  10. मोबाइल के पहला फोटो 1997 में फिलिप्पे कहन द्वारा किया गया था।  इन्हे ही कैमरा वाले फ़ोन का जन्मदाता माना जाता है।

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