Morarji Ji Desai Biography In Hindi – मोरारजी देसाई की जीवनी।

  • श्री मोरारजी देसाई
  • कार्यकाल :- 24 मार्च, 1977 – 28 जुलाई, 1979
  • जन्म :- 1896
  • मृत्यु :- 1995
  • राजनीतिक पार्टी :- काँग्रेस, जनता पार्टी
  • निर्वाचन क्षेत्र :- सूरत

morariji desai biography in hindi

मोरारजी रणछोड़ जी देसाई (जन्म 29 फरवरी 1896 भदेली, गुजरात प्रांत-मृत्यु 10 अप्रैल, 1995, मुंबई) या सिर्फ मोरारजी देसाई स्वतंत्र भारत के ऐसे पहले प्रधानमंत्री थे जो भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी के नहीं थे। मोरारजी देसाई स्वतंत्र भारत के एकमात्र ऐसे भारतीय हैं जिंहे India और Pakistan के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों, भारत रत्न और निसान-ए-पाकिस्तान, दोनों से नवाजा गया है।

मोरारजी देसाई का प्रारम्भिक जीवन

मोरारजी देसाई के पिता रणछोड़जी देसाई गाँव के Teacher थे। इनकी माता का नाम वाजियाबेन देसाई था। मोरारजी देसाई का परिवार गुजरात का एक अनविल ब्राह्मण परिवार था। देसाई जी का जन्म बॉम्बे प्रेसीडेंसी (अब गुजरात) के वलसाड के भदेली में 29 फ़रवरी 1896 के दिन हुआ था। देसाई जी के पिता अध्यापक होने के साथ-साथ एक सख्त अनुशासक भी थे। बचपन से ही मोरारजी देसाई को hard work और सत्यता जैसे मूल्य मिले जो उन्हे जीवन भर पथ-प्रदर्शन का कार्य करते रहे।

मोरारजी देसाई ने सेंट बुसर हाई स्कूल में शिक्षा प्राप्त की थी जहां से उन्हे मैट्रिक की उपाधि मिली। इसके बाद उन्होने 1918 में तत्कालीन बॉम्बे प्रांत के विल्सन कॉलेज से स्नातक की शिक्षा पूरी की। 1918 में ही उनका चयन प्रांतीय सिविल सेवा में हो गया जिसमें वे बारह वर्षों तक डिप्टी कलेक्टर के रूप में कार्य करते रहे। श्री देसाई का विवाह गुजराबेन के साथ 1911 में सम्पन्न हुआ था जिससे उन्हे 5 सन्तानें हुईं।

मोरारजी देसाई का राजनीतिक जीवन

मोरारजी देसाई ब्रिटिश सरकार की सेवा में Deputy Collector तो बन गए थे लेकिन देश में हो रहे स्वतन्त्रता आंदोलनों से अछूते नहीं थे। भारत में अंग्रेजों द्वारा किए जा रहे अत्याचार के खिलाफ महात्मा गांधी और काँग्रेस पार्टी के नेतृत्व से वो बहुत प्रभावित थे। इन्हीं  परिस्थितियों के बीच 1930 में, जब देश महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए Civil Disobidience Movement के बीच में था, मोरारजी देसाई ने इंडिया के स्वतन्त्रता संघर्ष में भाग लेने के लिए  अंग्रेजों की सरकारी सेवा से इस्तीफा देने का मन बना लिया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान श्री देसाई को तीन बार जेल जाना पड़ा। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में शामिल होने के लिए उन्होने ब्रिटिश सेवा का त्याग कर दिया और 1931 में All India Congress Committee के सदस्य बने। श्री देसाई 1937 तक गुजरात प्रदेश Congress Committee के सचिव के पद पर भी थे।

भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत सम्पन्न हुए 1937 के चुनाओं के बाद जब पहली कांग्रेस सरकार ने  तत्कालीन बॉम्बे प्रांत में कार्यभार संभाला, तब श्री मोरारजी देसाई को श्री बी.जी. खेर की अध्यक्षता वाली सरकार में राजस्व, कृषि, वन और सहकारिता मंत्रालयों का कार्यभार दिया गया था। किन्तु 1939 में अंग्रेजों द्वारा, बिना भारतीय जनता की सहमति के, भारतीय सेना को World War-II  में शामिल किए जाने के विरोध में काँग्रेस की प्रांतीय सरकारों ने इस्तीफा दे दिया।

ब्रिटिश नीतियों के विरोध में अक्टूबर, 1941 में महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए व्यक्तिगत सत्याग्रह में गांधी जी ने बोलने की स्वतन्त्रता की मांग की थी। इस व्यक्तिगत सत्याग्रह-Individual Satyagraha में श्री देसाई को अंग्रेजों ने हिरासत में ले लिया था। 1942 के Quit India Movement में भी मोरारजी देसाई ने हिस्सा लिया था जिसके चलते उन्हे फिर से अगस्त, 1942 में हिरासत में ले लिया गया था। ब्रिटिश सरकार ने उन्हे 1945 में रिहा किया।

भारत में 1946 में हुए चुनावों में बंबई प्रांत में काँग्रेस की सरकार बनी जिसके बाद श्री मोरारजी देसाई बंबई में गृह और राजस्व मंत्री बने। राजस्व मंत्री और Home Minister के पद पर रहते हुए उन्होने कई महत्वपूर्ण और जन-उपयोगी Decision लिए। इसके अतिरिक्त मोरारजी ने पुलिस को आम जनता के प्रति संवदनशील और उत्तरदाई बनाने के लिए भी कार्य किया। जनता में किए गए कार्यों और अपनी राजनीतिक प्रसिद्धि के कारण श्री मोरारजी देसाई को बंबई प्रांत का 1952 में मुख्यमंत्री बना दिया गया।

1956 में भारत में राज्यों का भाषाई आधार पर पुनर्गठन किया गया। इस पुनर्गठन के बाद श्री मोरारजी देसाई केंद्र सरकार में अपनी सेवाएँ देने के लिए दिल्ली चले गए। 14 नवम्बर 1956 को उन्हे केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर के केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री का पद दे दिया गया। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल में उन्हे भारत के वित्त मंत्री के रूप में भी 22 मार्च 1958 को शामिल किया गया।

1962 में हुए India China War के कारण देश के हालात गंभीर थे। ऐसे में काँग्रेस के तमिलनाडु से वरिष्ठ नेता कामराज ने सुझाव दिया कि Congress के वरिष्ठ लीडर अपने Positions से रिजाइन दें और ग्राउंड लेवेल पर पब्लिक के बीच रह कर पुनः सामाजिक कार्य करें। इस योजना को कामराज प्लान के नाम से जाना जाता है। इसी कामराज प्लान के तहत श्री मोरारजी देसाई ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से अपना इस्तीफा दे दिया था।  किन्तु जवाहरलाल नेहरू के बाद प्राधानमंत्री बने श्री लालबहादुर शास्त्री ने मोरारजी देसाई को पुनः पद ग्रहण करने के लिए आग्रह किया। लाल बहादुर शास्त्री के आग्रह पर मोरारजी ने प्रशासनिक व्यवस्था के पुनर्गठन के लिए प्रशासनिक सुधार आयोग (Administrative Reforms Commission) के अध्यक्ष का पद स्वीकार कर लिया। मोरारजी देसाई के लंबे और विविध experience तथा प्रशासनिक कुशलता के कारण इस commission ने भारत में प्रशासनिक ढांचे को अधिक कुशल बनाने और बदलते Socio-Economic, Political परिवेश के अनुरूप खुद को तैयार करने में अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मोरारजी देसाई ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में 1967 में दोबारा प्रवेश किया और श्रीमती इन्दिरा गांधी की सरकार में उप प्रधान मंत्री और वित्त मंत्री के पदों को ग्रहण किया। किन्तु July, 1969 में, श्रीमती गांधी ने उनसे Finance Department वापस अपने पास ले लिया। इन्दिरा गांधी ने मोरारजी देसाई से वित्त विभाग वापस लेने से पहले उनसे Discussion करना भी उचित नहीं समझा।  इससे आहत हुए मोरारजी देसाई ने भारत के Deputy Prime Minister  के पद से भी इस्तीफा दे दिया।

1969 में जब कांग्रेस पार्टी का विभाजन हुआ, तो श्री देसाई ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया। इस विभाजन में इन्दिरा गांधी को काँग्रेस पार्टी से निकाल दिया गया था। इन्दिरा गांधी ने जब 1975 में आपातकाल घोषित किया तब श्री देसाई को 26 जून, 1975 को गिरफ्तार कर लिया गया था।  श्री मोरारजी देसाई को एकांत कारावास में रखने के बाद लोकसभा के आम चुनाव कराने के निर्णय की घोषणा से कुछ समय पहले , 18 जनवरी, 1977 के दिन रिहा किया गया।

इसके बाद मोरारजी देसाई ने पूरे भारत में बहुत ही तीव्र गति से Elections के लिए  प्रचार-प्रसार किया और इन्दिरा गांधी की हार के कारण बने। मोरारजी देसाई के द्वारा चुनावों में की मेहनत के कारण ही जनता पार्टी को मार्च 1977 में हुए आम चुनावों में भारी जीत मिली। इस चुनाव में 6वीं लोक सभा के लिए मोरारजी देसाई गुजरात की Surat Parliamentary Seat से जीत हासिल करने में सफल रहे।

चुनावों में मिली भारी जीत के बाद श्री मोरारजी देसाई को संसद में जनता पार्टी के नेता के रूप में चुना गया। मोरारजी देसाई ने 24 मार्च, 1977 को भारत के प्रधान मंत्री के रूप शपथ लेकर इस पद को ग्रहण किया। किन्तु मोरारजी देसाई एक गठबंधन की सरकार चला रहे थे जो राजनीति के चलते अधिक दिन तक नहीं चल पाई।1979 में चरण सिंह और राज नारायण के समर्थन वापस ले लेने के कारण मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद मोरारजी देसाई ने राजनीतिक जीवन से सन्यास ले लिया। सन्यास के बाद वे मुंबई में रहने लगे जहां 99 वर्ष की आयु में 1995 में उनका निधन हो गया।

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