नालंदा विश्वविद्यालय कब बनाया गया था ? इसका संस्थापक कौन है।

नालंदा विश्वविद्यालय का निर्माण 5वीं शताब्दी में गुप्त साम्राज्य के शासक कुमारगुप्त प्रथम ने करवाया था। यह विश्वविद्यालय विश्व इतिहास के सबसे प्राचीनतम विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। इसका निर्माण काफी बड़े क्षेत्रफल में हुआ था। नालंदा विश्वविद्यालय कुल 14 हेक्टेयर में फैला हुआ था। इसकी इमारतों का निर्माण लाल ईंटो से किया गया था। इसकी बनावट इतनी मजबूत थी कि इस पर हुए भयानक आक्रमण के बाद भी इसके अवशेष और इमारत आज भी बड़े स्तर पर मौजूद हैं, तथा एक बड़े tourist place के रूप में पहचान जाता है।

इस विश्वविद्यालय के निर्माण कराने का श्रेय कुमारगुप्त प्रथम को ही दिया जाता है। लेकिन इस विश्वविद्यालय की इमारत के कुछ भाग का निर्माण काफी पहले भी हो चुका था। हालांकि मुख्य निर्माण कुमारगुप्त प्रथम ने ही करवाया था। इनके बाद भी बड़े स्तर पर इसका निर्माण कार्य जारी रहा था। गुप्त साम्राज्य के बाद Pala Empire में भी इस विश्वविद्यालय को खासा पहचान मिली थी।

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नालंदा विश्वविद्यालय कितने क्षेत्रफल में फैला हुआ है।

पुराने नालंदा विश्वविद्यालय की इमारत की बात करें तो कुल 14 हेक्टेयर क्षेत्रफल में यह फैला हुआ था। यह विश्वविद्यालय कुल 8 अलग – अलग खण्ड में बंटा हुआ था। इसमें सैकड़ों की संख्या में क्लास रूम बने हुए थे। जिसमें लगभग 10 हज़ार विद्यार्थी एक साथ पढ़ाई करते थे। चूंकि इसका निर्माण शुरुआत में एक बौद्ध मठ के रूप में हुआ था, इस कारण यहां बड़ी संख्या में Meditation Hall भी बने हुये थे।

इसमें छात्र ध्यान लगाते थे। इसके अलावा इस पूरे कैम्पस में कुल 10 विशाल मंदिर भी बने हुए थे। कुछ आंकड़ो में नालंदा विश्वविद्यालय में मंदिरों की संख्या, छोटे – बड़े सभी को मिलाकर 108 के आसपास भी बताई जाती है। इन सब के अलावा यहां रसोई की भी व्यवस्था अलग – अलग कैंपस में अलग – अलग थी।

चूंकि आरंभिक काल में नालंदा विश्वविद्यालय विश्व का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय था, ऐसे में विश्व के अलग अलग देशों से छात्र आते थे। इनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस विश्वविद्यालय प्रांगण में ही विशाल पुस्तकालय का भी निर्माण करवाया गया था। इस पुस्तकालय में धार्मिक ग्रन्थों से लेकर अलग – अलग विषयों की पुस्तकों का भंडार था।

ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर कहा जाता है कि नालंदा विश्वविद्यालय की पुस्तकालय (library) में लगभग 9 लाख पुस्तक समेत अन्य शैक्षणिक सामग्रियां उपलब्ध थी। माना जाता है कि जब इस विश्वविद्यालय पर आक्रमणकारियों ने हमला किया तो इस लाइब्रेरी में भी आग लगा दी थी। विशाल संख्या में पुस्तक समेत अन्य शैक्षणिक सामग्रियों को पूरी तरह जलने में 3 महीने का समय लग गया था।

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