नालंदा विश्वविद्यालय को किसने और कब जलाया था ?

नालंदा विश्वविद्यालय सैकड़ों साल तक विश्व में भारत का गौरव हुआ करता था। विश्व के सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थानों में इसकी गिनती होती थी। लेकिन जितना गौरव इसके साथ जुड़ा हुआ था, इसे खत्म करने की कोशिशें भी समय – समय पर की जाती रही। इस कारण इस नालंदा विश्वविद्यालय पर 3 बार बड़े हमले हुए। इनमें से 2 बार तो इस विश्वविद्यालय को कोई खास नुकसान नही हुआ, लेकिन तीसरी बार इस हद तक प्रभावित हुआ कि इसे दोबारा शुरू करने में 800 साल से भी अधिक समय लग गया।

नालंदा विश्वविद्यालय पर सबसे पहला हमला नालंदा विश्वविद्यालय  के स्थापना के कुछ ही समय बाद, जबकि गुप्त साम्राज्य बाकी ही था, तभी हो गया था। यह हमला Alchon Huns साम्राज्य के शासक Mihirakula ने किया था। इनका शासनकाल 502 से 530 तक रहा था। इस दौरान इसने यह हमला किया था। इस हमले में इस university को खास नुकसान नही हुआ था। इसे तत्काल ही गुप्त साम्राज्य के शासक ने ठीक करवा लिया।

nalanda vishwavidyalaya kisne jalaya

नालंदा विश्वविद्यालय पर दूसरा हमला 7वीं शताब्दी में हुआ। यह वह दौर था, जिसे विश्वविद्यालय का स्वर्णिम काल माना जाता है। इस समय बड़ी संख्या में छात्र यहां रहते थे। इस दौरान गौड़ साम्राज्य के शासक ने इस विश्वविद्यालय पर हमला कर दिया था। इस हमले में विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी को खासा नुकसान हुआ। हालांकि इसे भी जल्दी ही इस क्षेत्र के तत्कालीन शासक हर्षवर्धन द्वारा पुनर्निर्माण करवा दिया गया। इसके बाद अगले 300 से अधिक वर्षों तक यहां कोई बड़ा हमला नही हुआ।

यहां तीसरा और विनाशकारी हमला 1193 में बख्तियार खिलजी ने किया। यह हमला बेहद ही भयावह था। इस आक्रमण से विश्वविद्यालय पूरी तरह तबाह हो गया। इसी हमले के दौरान आक्रमणकारियों ने विश्वविद्यालय के पुस्तकालय (library) को भी अपना निशाना बनाया। नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में उस समय लगभग 9 लाख प्रतियां थी। यह पुस्तकालय बेहद विशाल था। इस पुस्तकालय में भी आक्रमण करने वालों ने आग लगा दी। विशाल लाइब्रेरी होने के कारण  इसे पूरी तरह जलने में 3 महीने का समय लग गया।

तीसरे हमले के साथ ही नालंदा विश्वविद्यालय इतिहास बन गया। इसे पुनर्निमित नही किया जा सका। हालांकि इस घटना के 800 साल बाद यानी 2014 के आसपास फिर से इसे एक विश्वविद्यालय के रूप में शुरू किया गया था। इसके पुनर्गठन के लिए भारत समेत कई अन्य देशों ने योगदान दिया है। वर्तमान समय में भी बड़े स्तर पर नालंदा विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य जारी है। इसे फिर से विश्व स्तरीय बनाने की कोशिश जारी है।

इस विश्वविद्यालय के पुनर्निर्माण के लिए बिहार सरकार ने खासा योगदान दिया है। 1 सितंबर 2014 को यहां पहले सत्र की पढ़ाई शुरू भी हो चुकी है। हालांकि फिलहाल बेहद सीमित संख्या में ही छात्र यहां हैं। व्यापक स्तर पर इसके विस्तार के लिए निर्माण कार्य फिलहाल जारी है। इसके बाद यहां छात्रों की संख्या निश्चित ही बढ़ेगी।

Leave a Reply