नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना किसने और कब की थी ?

नालंदा विश्वविद्यालय विश्व के सबसे पुराने और ऐतिहासिक विश्वविद्यालय में गिना जाता है। माना जाता है कि यह विश्वविद्यालय विश्व का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है। नालंदा विश्वविद्यालय, ज्ञात विश्व इतिहास में सबसे पहले बड़े विश्वविद्यालय के रूप में दर्ज है। नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त साम्राज्य के शासक कुमारगुप्त प्रथम (Kumaragupta 1) ने की थी। इसकी स्थापना 5वीं शताब्दी की मानी जाती है। कुमारगुप्त प्रथम को राजा सकरादित्य के नाम से भी जाना जाता है। इन्ही के शासनकाल में बड़े स्तर पर इस विश्वविद्यालय का निर्माण संभव हुआ था तथा इसे व्यापक रूप से एक विश्वविद्यालय का रूप दिया गया था।

हालांकि इतिहासों से पता चलता है कि नालंदा विश्वविद्यालय की इमारतों के कुछ शुरुआती हिस्सो का निर्माण सम्राट अशोक के काल में ही हो गया था। लेकिन तब यह विश्वविद्यालय का रूप नही ले सका था। बाद में कुमारगुप्त प्रथम ने बड़े स्तर पर इसका निर्माण करवाते हुए एक विश्वविद्यालय का रूप दिया। शुरुआत में यह विश्वविद्यालय एक बौद्धिक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित किया गया था। यहां विश्व भर के छात्र आध्यात्मिक ज्ञान पाने के लिए आते थे। 427 से 1200 शताब्दी के आसपास यह विश्वविद्यालय दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थानों में गिना जाता था।

nalanda vishwavidyalaya was established by

कुछ ही समय बाद यह university अन्य विषयों में भी पढ़ाई की सुविधाएं उपलब्ध करवाने लगी। उस समय मुख्य रूप से यहां बौद्ध तथा हिन्दू धर्म के ज्ञान के अलावा विज्ञान, खगोल विज्ञान, योग शास्त्र, आयुर्वेद, गणित इत्यादि विषयों की पढ़ाई भी की जाती थी। इस विश्वविद्यालय का सबसे सर्वश्रेष्ठ काल 7वीं शताब्दी के आसपास का था। इतिहासकारों के अनुसार 7वीं शताब्दी के आसपास यहां विश्व भर के लगभग 10 हज़ार छात्र विभिन्न विषयों की शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। इसमें भारत के अलावा चीन, जापान, थाईलैंड इत्यादि के विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक थी। यहां उस समय इन 10 हज़ार छात्रों को पढ़ाने के लिए 2000 से अधिक शिक्षक थे।

सैकड़ों वर्षों तक विश्व भर में शिक्षा को नया आयाम देने के बाद विश्व में हो रही सत्ता की लड़ाई का खामियाजा इस ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय को भी भुगतना पड़ा। 12वीं शताब्दी के आसपास विदेशी आक्रमणकारियों के हमले में यह विश्वविद्यालय पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। पूरी तरह तबाह होने के बाद भी यहां आज भी ऐतिहासिक इमारत मौजूद हैं। वर्तमान समय में नालंदा विश्वविद्यालय का खण्डर बिहार में एक बड़े पर्यटन स्थलों में से एक है। 2016 में नालंदा विश्वविद्यालय को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया था।

उसके बाद यहां वर्षों तक कोई पढ़ाई संभव नही हो पाई। सैकड़ों वर्षों बाद अंततः 2014 में नालंदा विश्वविद्यालय को भारत समेत विश्व के कई अन्य देशों जैसे चीन, जापान, थाईलैंड इत्यादि की मदद से पुनः चालू किया गया था। वर्तमान समय में यहां पुनः कई विषयों की पढ़ाई होती है।

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