Positive Thinking in Hindi – सकारात्मक सोच क्या है।

Positive Thinking in Hindi – सकारात्मक सोच क्या है आज की इस दुनिया में सभी लोग negativity से घिरे हुए हैं तो ऐसे में हम सकारात्मक सोच बने ? Positive thinking कैसे लाये या फिर पॉजिटिविटी क्या होती है और हम हमेशा पॉजिटिव कैसे रहे यह बहुत ही important प्रश्न है इसलिए आज के इस लेख में हम positivity से related सभी प्रश्न के उत्तर जानेंगे तो चलिए हम इस आर्टिकल माध्यम से जानते हैं कि हम सकारात्मक कैसे बने। और नकारात्मक सोच से छुटकारा कैसे पाएं। इसके बारे में जानकारी प्राप्त करते है।

आज हमारे समक्ष जो दुनिया है वह दुनिया विचार की प्रक्रिया के द्वारा ही बनी है अगर हमें इसमें किसी भी तरह का परिवर्तन लाना है तो हमें अपने विचारों में भी परिवर्तन लाना होगा अल्बर्ट आइंस्टीन

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विभिन्न विचारधाराओं के अनुसार व्यक्ति का जीवन उसके विचारों का दर्पण होता है अर्थात वह जैसे विचार रखता है वैसा ही बन जाता है, अर्थात  विचार या सोच आपके जीवन को सही या गलत दिशा देने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है इस स्थिति में किस तरह के विचार आपके जीवन को बेहतर बना सकते हैं आपको सफलता  दिला सकते हैं  जानना बहुत आवश्यक है। सोच को हम मोटे तौर पर दो भागों में बांट सकते हैं सकारात्मक एवं नकारात्मक सोच  इस लेख में हम दोनों  विचारों को समझने का प्रयास करेंगे।

अपने दिल की सुनो, अपनी अंतरात्मा की सुनो और इस बात का डर छोड़ दें दूसरे क्या कहेंगेरॉय टी बेनेट

skaratmak soch kya hai

सकारात्मक सोच आपको किसी भी व्यक्ति, वातावरण अथवा स्थिति के सकारात्मक पक्ष को देखने की प्रेरणा देने वाली सोच को कहते हैं। सकारात्मक सोच की आदर्श स्थिति परिवर्तन की स्थिति है अर्थात यह सोच स्टेटस को या यथास्थिति को बदलने वाले किसी भी विचार को बल देती है। अर्थात सकारात्मक सोच आपको कुछ नया करने के लिए प्रोत्साहित करती है एवं यथास्थिति में बने रहने के लिए हतोत्साहित करती है। सकारात्मक सोच आपकी सफलता में आपका मार्गदर्शन किस तरह से कर सकती है इसका उदाहरण आपको अपने सामान्य जीवन में कई जगह मिल जाएगा आप सफल व्यक्तियों के जीवन में अगर  झांक  कर देखेंगे तो आपको ज्ञात होगा कि यह व्यक्ति वह काम नहीं कर रहे हैं  जिसकी इनसे  अपेक्षा की जाती है बल्कि वह कुछ नया काम कर रहे हैं अर्थात परिवर्तन की स्थिति में है जो कि सकारात्मक सोच की आदर्श स्थिति है। इसीलिए सफल व्यक्तियों के जीवन में सकारात्मक सोच एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

जैसा कि हम समझ चुके हैं कि सकारात्मक सोच की आदर्श स्थिति परिवर्तन की स्थिति है इसीलिए सकारात्मक सोच आपको नई-नई चीजें करने के लिए प्रेरित करती है सकारात्मक सोच आपको नए नए प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार सकारात्मक सोच का सबसे सरल एवं अच्छा उदाहरण एक बच्चा होता है आपने देखा होगा कि छोटे बच्चे हर चीज को हाथ लगा कर देखना चाहते हैं तरह-तरह की चीजें करना चाहते हैं वह इन सब में कई बार  गिरते पड़ते हैं उन्हें चोट लगती है परंतु वे नए नए प्रयोग करना नहीं छोड़ते हैं और इसका फल क्या होता है कि वह काफी कुछ काफी कम समय में सीख जाते हैं  क्योंकि छोटे बच्चे प्रयोगों के प्रति सकारात्मक सोच रखते हैं इसीलिए वे काफी तेजी से सीखते हैं आपको अपने आप से सवाल करना होगा कि आपने पिछले 2 वर्षों में क्या नया सीखा है क्या नया प्रयोग किया है।

सकारात्मक सोच आपको यथास्थिति से दूर जाकर प्रयोग करने के लिए प्रेरित करती है और हो सकता है इन्हीं प्रयोगों की सफलता पर आपके जीवन की सफलता निर्भर हो। सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति सफलताओं के रास्ते में आने वाली  छोटी असफलताओं को उस रास्ते का एक मील का पत्थर मानता है वहीं नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति अपनी सफलता के रास्ते में आए किसी भी छोटी असफलता को  लक्ष्य मानकर वहीं रुक जाता है।

विभिन्न दर्शन शास्त्रियों ने  सकारात्मक सोच के प्रति अपने विचार प्रस्तुत किए हैं। जर्मन दर्शन शास्त्री फ्रेडरिक नीचा के अनुसार  सकारात्मक सोच आपकी मानसिक ताकत को बढ़ाने का काम करती है  जो आपको जीवन के दौरान विभिन्न स्रोतों से निपटने के लिए सक्षम बनाती है। महान विचारक सुकरात का यह बयान आपको सकारात्मक सोच के विषय में सब कुछ बता देता है  सुकरात कहते हैं कि ” खुशी हमेशा और भी ज्यादा पाने की कामना करने में नहीं है बल्कि जो कुछ भी मिला है उसी में संतुष्ट रहने में है।” 

सरल शब्दों में कहा जाए तो सुकरात आपको बताना चाहते हैं कि नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति कभी भी अपनी वर्तमान स्थिति से संतुष्ट नहीं रहेंगे वहीं सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति अपनी यथास्थिति को सकारात्मक तरीके से लेते हैं एवं सुकरात के अनुसार यही खुशी का रहस्य है। महान चीनी विचारक कन्फ्यूशियस कहते हैं कि “ आदमी जितना ध्यान अच्छे विचारों में लगाता है, इस दुनिया के लिए उतना ही अच्छा है।” कन्फ्यूशियस के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का लक्ष्य  दुनिया  को बेहतर बनाना था और ऐसा करने के लिए वह व्यक्ति तभी सक्षम हो सकता था जबकि वो एक अच्छा आदमी हो और इसके लिए  कन्फ्यूशियस कहते हैं कि आदमी जितना ज्यादा ध्यान अच्छे विचारों में लगाएगा वह उतना ही अच्छा बन जाएगा अर्थात कन्फ्यूशियस सकारात्मक सोच पर जोर देते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार – Positive Thinking

आपका दिमाग एक जीवित ओर्गानिस्म है इसे आप किस तरह सोचना है वह सिखा सकते हैं अर्थात आप अपने दिमाग को सकारात्मक और नकारात्मक सोचना सिखा सकते हैं।अगर आप अपने जीवन में आने वाले विभिन्न हालातों के सकारात्मक पक्ष   एवं नई नई चीजों को देखने पर जोर  देंगे तो धीरे-धीरे  आपका दिमाग या काम अपने आप ही करने लगेगा। आपने विभिन्न आविष्कारको की जिंदगी में देखा होगा कि उन्होंने किसी नई तरह से पुरानी समस्या का हल निकाला है अर्थात उन्होंने परिवर्तन को स्वीकार किया है।  सकारात्मक सोच परिवर्तन को जीवन का हिस्सा मानती है एवं इस पर जोर देती है।

सकारात्मक सोच यदि आत्मा है तो कर्म शरीर हैं अर्थात इन दोनों के समन्वय के बिना जीवन संभव नहीं है। सरल शब्दों में कहा जाए तो आपकी सोच कितनी भी सकारात्मक हो अगर आप इस सोच को कर्मों में नहीं बदलते हैं तो एक ना एक दिन यह सकारात्मक सोच विलुप्त हो जाएगी और नकारात्मक सोच इसकी जगह ले लेगी इसीलिए  विभिन्न दर्शन शास्त्री आपको इस बात की शिक्षा देते हैं कि  आप सकारात्मक सोच के द्वारा प्रेरित कार्य को करने के  लिए सदा तैयार रहें। सकारात्मक सोच का इकलौता खराब पहलू यह हो सकता है कि यह आपको अति आत्मविश्वास  का  आभास करा सकती है, आपको सलाह है कि आप अपनी सोच सकारात्मक रखिए परंतु अति आत्मविश्वास से बचें।

सकारात्मक सोच आपके स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। यह आपके जीवन में तनाव को कम करती है, सकारात्मक सोच आपकी इम्यूनिटी अथवा आत्मरक्षा के स्तर को बढ़ाती है जिसके फलस्वरूप आपका शरीर विभिन्न बीमारियों से बेहतर तरीके से आपका बचाव कर सकता है। सकारात्मक सोच आपके हार्मोन के स्तर को संतुलित रखती है। सरल शब्दों में कहा जाए तो सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति का शरीर भी सकारात्मक या स्वस्थ होता है।

-: सारांश :-

ऊपर हमने सकारात्मक  सोच के बारे में विस्तार पढ़ा एवं न सिर्फ इस के जीवन पर असर को समझा बल्कि स्वास्थ्य पर इसके असर को भी समझने का प्रयास किया। अगर सफलता का उद्देश्य है तो आपको देखना होगा कि सफल व्यक्तियों की सोच कैसी थी और फिर अपने आप को वैसा ही सोचना सिखाना होगा क्योंकि दिमाग  जीवित ओर्गानिस्म  है इसलिए कुछ समय पश्चात यह अपने आप ऐसा ही सोचना चालू कर देगा जैसा आप  चाहते हैं। सकारात्मक सोच अगर सफलता की सीढ़ी है तो नकारात्मक सोच उसी सफलता और आपके बीच में एक अवरोध है।

दोस्तों, आपको यह आर्टिकल Positive thinking in hindi सकारात्मक सोच क्या है और नकारात्मक सोच से छुटकारा कैसे पाएं। कैसा लगा और अब आप सकारात्मकता (positive thinking) के बारे में क्या सोचते हैं इसके बारे में हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं और आपके अगर सकारात्मकता से related कोई क्वेश्चन है तो वह भी आप हमें कमेंट के माध्यम से बताएं हम उन सभी क्वेश्चन के आंसर ढूंढकर इस आर्टिकल में जोड़ने करने का प्रयास करेंगे।

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