भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति कौन करता है ?

भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति कौन करता है?  इस सवाल का जवाब उतना सीधा नहीं है जितना आपको लग रहा है। भारत एक लोकतंत्र है इसमें प्रधानमंत्री नियुक्त नहीं किया जाता , चुना जाता है। हां अगर सवाल यह है कि प्रधानमंत्री को प्रधानमंत्री पद की शपथ कौन दिलाता है तो उसका जवाब यह है कि प्रधानमंत्री को शपथ राष्ट्रपति के द्वारा दिलाई जाती है।

प्रधानमंत्री चुनने से लेकर शपथ दिलाने तक की प्रक्रिया

लोकसभा के परिणाम आने के पश्चात राष्ट्रपति के पास यह अधिकार होता है कि वे किसी भी दल के नेता को  प्रधानमंत्री पद की शपथ  लेने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। इस  विषय में विशेषज्ञों के दो मत हैं। पहला मत यह कहता है कि राष्ट्रपति को उसी दल के नेता को आमंत्रित करना चाहिए जिस दल  को सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें प्राप्त हुई है।

pradhan mantri ki niyukti kaun karta hai

वही दूसरा मत यह कहता है कि राष्ट्रपति को इस गठबंधन के नेता को आमंत्रित करना चाहिए जिसके गठबंधन  को लोकसभा में सबसे ज्यादा सीटें प्राप्त हुई है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि राष्ट्रपति के इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। राष्ट्रपति जब एक बार किसी नेता को प्रधानमंत्री पद के लिए आमंत्रित करते हैं तो उसके पश्चात उस व्यक्ति को एक निश्चित समय अवधि दी जाती है जिसके अंदर उसे लोकसभा में अपना बहुमत साबित करना होता है।

अगर वह व्यक्ति अपना बहुमत साबित कर देता है तो वह प्रधानमंत्री बना रहता है परंतु ऐसी स्थिति में जहां वह अपना बहुमत साबित नहीं कर पाता तो दूसरे सबसे बड़े दल या गठबंधन को बुलाया जाता है। इस स्थिति का उदाहरण 1996 के चुनाव के बाद मिलता है जब तत्कालीन राष्ट्रपति ने भारतीय जनता पार्टी के नेता अटल बिहारी वाजपेई को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई क्योंकि वह सबसे बड़ी पार्टी के नेता थे। परंतु 13 दिन में वे  अपना बहुमत साबित नहीं कर पाए। 

उसके पश्चात संयुक्त मोर्चा की तरफ से एचडी देवे गौड़ा को प्रधानमंत्री  पद की शपथ दिलाई गई। एचडी देवे गौड़ा ने समय रहते अपना बहुमत साबित कर दिया और  वे प्रधानमंत्री बने रहे।  चलिए आपको प्रधानमंत्री की शपथ दिलाने वाले राष्ट्रपति का चुनाव कैसा होता है उस विषय में कुछ बताते हैं।

राष्ट्रपति का चुनाव

राष्ट्रपति चुनने के लिए व्यक्ति को कुछ Criteria पास करना होता है तभी वह राष्ट्रपति बन सकता है। राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है। उसकी उम्र 35 वर्ष से ज्यादा होनी चाहिए। वह लोकसभा का सदस्य बनने लायक होना चाहिए।  वह लोकसभा एवं राज्यसभा किसी का सदस्य नहीं होना चाहिए ऐसी स्थिति में जहां वह दोनों में से किसी  सदन का सदस्य है तो उसे उससे इस्तीफा देना पड़ेगा।

लोकसभा एवं राज्यसभा के अलावा किसी भी राज्य की विधान सभा का सदस्य भी नहीं होना चाहिए।  उसे किसी भी तरह के लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए। भारत के राष्ट्रपति का चुनाव Electoral college के माध्यम से होता है जिसमें सभी सांसद ( लोकसभा एवं राज्यसभा मिला कर )  एवं सभी राज्यों के विधायक हिस्सा लेते हैं।  ऐसी ही अन्य रोचक जानकारियों के लिए हमारे साथ बने रहे।

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