कुतुब मीनार किसने और किस वर्ष बनाया था।

कुतुब मीनार दिल्ली पर्यटन का प्रमुख स्थल है। 12वीं-13वीं शताब्दी में बनायी गयी 72.5 मीटर ऊंची यह मीनार दुनिया की सबसे लंबी ईंट से बनी मीनार है । लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से बनाई गयी कुतुब मीनार दिल्ली में अफगान तुर्कों की जीत की निशानी है। दिल्ली के महरौली में स्थित यह मीनार 1993 से यूनेस्को की विश्व धरोहर स्मारकों (UNESCO World Heritage Site) में शामिल है। लेकिन कुतुब मीनार को किसने बनाया और क्यों इसका निर्माण कराया गया? कुतुब मीनार की ख़ासियतें क्या हैं और कैसे इसका नाम कुतुब मीनार पड़ा? आइए कुतुब मीनार से जुड़ी ये सभी जानकारियाँ जानते है।

qutub minar kab aur kisne banaya tha

कुतुब मीनार किसने बनवायी थी

कुतुब मीनार का निर्माण 1192 इसवीं में दिल्ली सल्तनत के पहले सुल्तान कुतुब-उद-दीन ऐबक ने शुरू करवाया था। लेकिन दिल्ली के ग़ुलाम वंश का संस्थापक कुतुब-उद-दीन ऐबक इसे पूरा करने से पहले ही मर गया। वह केवल क़ुतुब मीनार के निम्नतल( Basement) का ही निर्माण कर पाया था। कुतुब-उद-दीन ऐबक के दामाद और उत्तराधिकारी इल्तुत्मिश ने इसमें 1220 इसवीं में तीन मंज़िलों का निर्माण कराया। इनके बाद क़ुतुब मीनार में फिरोज शाह तुगलक ने 2 और मंज़िलें जोड़ दीं।

क़ुतुब मीनार के परिसर में उत्तर भारत में बनने वाली सबसे पहली मस्जिद क़ुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद भी मौजूद है जिसका निर्माण भी कुतुब-उद-दीन ऐबक ने हिन्दू मंदिरों को तोड़कर करवाया था।

कुतुब मीनार क्यों बनाया गया

कुतुब मीनार का निर्माण क्यों कराया गया इस बात पर इतिहासकारों में कुछ मतभेद है लेकिन अधिकांश यह मानते हैं कि इसका निर्माण दिल्ली के अंतिम हिन्दू राजा की हार और हिंदुस्तान में प्रथम अफगान तुर्की साम्राज्य की विजय और स्थापना के उपलक्ष्य में कराया गया था। तराइन के दूसरे युद्ध में (1192 में ) पृथ्वी राज चौहान की मुहम्मद घोरी के हाथों हार हुई थी। इसी के बाद दिल्ली में सल्तनत की स्थापना हुई थी। कुछ इतिहासकर यह भी मानते हैं कि इसका निर्माण नमाज़ के लिए बुलाने के लिए एक मीनार के रूप में किया गया था।

कुतुब मीनार का नाम कैसे पड़ा

इस संदर्भ में दो बातें प्रचलित हैं। पहली तो यह कि कुतुब मीनार का नाम दिल्ली के मशहूर सूफ़ी संत ख्वाजा कुतब-उद-दीन बख्तियार काकी के नाम पर पड़ा है, जिनका इल्तुतमिश बहुत सम्मान करता था। क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी भारत में चिश्ती सिलसिला के सूफी संत थे और ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के अध्यात्मिक उत्तराधिकारी और शिष्य माने जाते हैं। वे दिल्ली के महरौली में रहते थे। कुछ इतिहासकार यह मानते हैं कि क़ुतुब मीनार का निर्माण भारत के पहले मुस्लिम शासक कुतुब-उद-दीन ऐबक के नाम पर रखा गया है।

 कुतुब मीनार से जुड़ीं कुछ रोचक जानकारियाँ

इस मीनार में 379 सीढ़ियाँ हैं और यह 72.5 मीटर ऊंची है। कुतुब मीनार के जमीनी आधार का व्यास 14.32 मीटर और सबसे ऊपर (शीर्ष पर) व्यास 2.75 मीटर है। क़ुतुब कॉम्प्लेक्स में कई ऐतिहासिक स्मारकें मौजूद हैं जिनमें महरौली का लौह स्तम्भ, कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, इल्तुतमिश का मकबरा, अलाई मीनार, अला-उद-दीन का मदरसा और मकबरा, इमाम जामिन का मकबरा, अलाई दरवाजा इत्यादि महत्वपूर्ण हैं। पाँच मंज़िला यह इमारत बालकनियों से सुसज्जित है। 1981 में हुई एक भगदड़ में 45 लोगों की मृत्यु के बाद क़ुतुब मीनार के भीतर आम लोगों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। प्रवेश वर्जित होने के बाद सीढ़ियाँ चढ़कर इसके ऊपर नहीं जाया जा सकता है।

अलाउद्दीन खिलजी क़ुतुब मीनार से दुगुनी ऊंचाई वाली मीनार बनाना चाहता था लेकिन 1316 में उसकी मृत्यु के बाद यह पूरा नहीं हो सका। उसके द्वारा शुरू की हुई अलाई मीनार केवल एक मंज़िल तक ही पूरी हो सकी जिसकी ऊंचाई 24.5 मीटर (80 फीट) है।

क़ुतुब मीनार का निर्माण इंडो-इस्लामिक स्थापत्य कला में किया गया है। इसे देखने का समय सूर्योदय से सूर्यास्त तक है।

Read also :-

Leave a Reply