रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है 2019 में रक्षाबंधन कब है ?

भारत को पर्वों का देश भी कहा जाता है। यहां दर्जनों पर्व हैं, जो कि साल भर बड़े ही हर्षोल्लास के साथ देश भर में मनाए जाते हैं। उन्हीं में एक पर्व रक्षाबंधन भी है। इस पर्व का महत्व एक पर्व से बढ़ कर, भावनात्मक रूप से काफी अधिक है। यह भाई – बहनों को एक अटूट बंधन में बांधने वाला पर्व है। इस कारण इसका इंतजार सभी को बड़ी बेसब्री से रहता है।

एक बार फिर यह पर्व करीब है। हर साल अलग – अलग शुभ मुहूर्त होने के कारण रक्षाबंधन मनाने को ले कर कुछ भ्रम की स्तिथि बनी रहती है। इस बार भी कुछ लोगों को रक्षाबंधन 2019 को लेकर कुछ भ्रम है कि 2019 में रक्षाबंधन कब है। अगर आपको भी यह भ्रम है तो इस लेख को अंत तक पढ़ें।

raksha bandhan kyu aur kab manate hai

इस बार यानी 2019 में रक्षाबंधन बेहद ही खास दिन आ रहा है। रक्षाबंधन 2019 में 15 अगस्त, गुरुवार (Thursday) को मनाया जाएगा। हालांकि इसकी शुरुआत 14 अगस्त से ही हो जाएगी। रक्षाबंधन के लिए शुभ तिथि की शुरुआत 14 अगस्त को शाम 3:45 से ही शुरू हो जाएगी। यह शुभ मुहूर्त अगले दिन यानी 15 अगस्त 2019 को शाम के 5:58 तक रहेगा। इस स्तिथि में राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त 15 अगस्त की सुबह से ले कर शाम तक, यानी सूर्य के अस्त होने तक रहेगा। इस दौरान राखी बांधना शुभ रहेगा।

इस बार एक और खास बात यह है कि रक्षाबंधन गुरुवार को है, इस कारण इसका महत्व और भी अधिक है क्यों कि इस दिन किसी प्रकार का भद्रा या ग्रहण भी नही है। इस कारण इस बार का रक्षाबंधन बेहद खास और भाग्यशाली माना जा रहा है।

रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है – why raksha bandhan is celebrated?

रक्षाबंधन का इतिहास बेहद ही पुराना है। माना जाता है कि रक्षाबंधन मनाने की परंपरा हज़ारों साल पुरानी है। इतने पुराने इतिहास होने के बाद भी एक बात आज भी एक समान है, कि हमेशा यह रक्षा से ही जुड़ा रहा है।  इसकी शुरुआत को ले कर हिन्दू धर्म के पवित्र ग्रन्थों में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। इसके अलावा भी इसे मनाने की शुरुआत को ले कर कई अन्य मान्यताएं प्रचलित हैं।

भविष्य पुराण में रक्षाबंधन से जुड़ा एक सुबूत मिलता है। इसके अनुसार एक बार भगवान तथा राक्षसों के बीच युद्ध हो गया। भगवान की ओर से इंद्र देव युद्ध कर रहे थे। यह युद्ध लंबे समय तक चलता रहा लेकिन यह किसी नतीजे तक नही पहुंच पा रहा था। अंततः इंद्र देव की पत्नी साँची भगवान विष्णु के पास गई। भगवान विष्णु ने उन्हें एक सूती धागा दिया। इस धागे को सांची ने इंद्र देव की कलाई पर बांध दिया। इसके बाद इंद्र देव युद्ध जीतने में सफल रहे। उसके बाद यह परंपरा हो गयी कि पति के युद्ध पर जाने से पहले पत्नियां अपने पति की कलाई पर यह पवित्र धागा बांधती थी। तब इसका उद्देश्य पति की सुरक्षा से जुड़ा हुआ था।

इससे जुड़ी दूसरी परंपरा यह है कि गणेश जी के दो बेटे थे, शुभ और लाभ। लेकिन उनकी कोई बेटी नही थी। बेटे ने पिता से एक बहन के लिए निवेदन किया। इसके बाद आग से संतोषी माता के रूप में शुभ और लाभ को एक बहन मिल गयी। माना जाता है संतोषी रक्षाबंधन के दिन ही प्रकट हुई थी। इस लिए इसे भाई बहन के प्रेम के रूप में भी देखा जाता है। इसके अलावा भी धार्मिक ग्रन्थों में कई ऐसी कथाएं हैं, जो कि रक्षाबंधन के बारे में बताती हैं।

धार्मिक ग्रन्थों से अलग भी एक मशहूर मान्यता यह है कि 1535 में जब चित्तौड़ की रानी कर्मावती पर गुजरात के तत्कालीन राजा ने हमला करने का निर्णय लिया तो रानी कर्मावती ने मुग़ल बादशाह हुमायूं को अपना भाई मानते हुए एक राखी भेजी तथा सुरक्षा की गुहार लगाई। राखी मिलते ही हुमायूं भी तुरंत मदद के लिए गए। माना जाता है कि इसके बाद राखी का प्रचलन भाई – बहन के प्यार के रूप में खूब प्रचलित हुआ।

रक्षाबंधन कैसे मनाया जाता है ?

रक्षाबंधन एक ऐसा त्योहार है, जो कि भारत के अधिकांश हिस्सों में काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। दक्षिणी राज्यों में भी यह मनाया जाता है। हालांकि अलग अलग राज्यों के रक्षाबंधन मनाने के तरीकों में कुछ न कुछ अंतर है। इसके बाद भी कुछ चीज़ें सभी जगह एक समान है। इस खूबसूरत त्योहार की शुरुआत भाई – बहनों के अटूट रिश्तों की निशानी राखी की खरीदारी से होती है। बहनें रक्षाबंधन से पहले बाजार में उपलब्ध राखियों में से अपनी पसंद के अनुसार राखी खरीदती हैं। इसके बाद एक पूरी प्रक्रिया के तहत यह राखी रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर बांधी जाती है।

राखी बांधने की प्रक्रिया क्या है ?

सबसे पहले भाई और बहन, दोनो ही नए कपड़े पहनते हैं। इसके बाद इस प्रक्रिया के तहत रक्षाबंधन के दिन शुभ मुहूर्त के अनुसार बहने एक थाली में एक दीपक या मोमबत्ती जलाती हैं। यह दीपक अग्नि देवता का प्रतीक होता है। इसके बाद परिवार के बड़े बुजुर्गों तथा माता – पिता की उपस्थिति में बहने आरती करती है। इसके बाद वह भाई की रक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं। इसके बाद भाई के माथे पर तिलक लगाया जाता है। अगली प्रक्रिया के तहत तिलक के बाद बहने भाई को कुछ मीठा, विशेषकर मिठाइयां खिलाती हैं। अंततः इसके बाद भाई की कलाई पर राखी बांध दी जाती है। इसके बाद भाई की ओर से बहन को कुछ गिफ्ट दिया जाता है। साथ ही भाई हरसंभव बहन की रक्षा का वचन देता है।

भारत के कुछ राज्यों जैसे उत्तराखंड, जम्मू तथा राजस्थान में यह प्रक्रिया कुछ अलग ही होती है। जम्मू में रक्षाबंधन के दिन बड़े स्तर पर पतंगबाजी की जाती है। राजस्थान के मारवाड़ी समाज में राखी बिल्कुल अलग तरीके से ही मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं अपने भाई की पत्नी यानी भाभी को राखी बांधती है। ऐसा उन्हें परिवार का अभिन्न अंग जताने के तौर पर किया जाता है।

रक्षाबंधन प्रतिवर्ष किस माह मनाया जाता है ?

रक्षाबंधन हमेशा हिंदी महीनों के आधार पर मनाया जाता है। जिस तरह अंग्रेज़ी में जनवरी से दिसंबर तक 12 महीने  होते हैं, ठीक इसी तरह हिंदी पंचांग में भी 12 महीने होते हैं। रक्षाबंधन हिंदी कैलेंडर पंचांग के अनुसार इसके श्रावण महीने में पूर्णिमा को मनाया जाता है। श्रावण महीना पंचांग का 5वां महीना है। पूर्णिमा पूरे चांद की रात को कहा जाता है। भारत में प्रत्येक महीने पूर्णिमा को काफी महत्व दिया जाता है। प्रत्येक महीने में पूर्णिमा के दिन विशेष पूजा इत्यादि की जाती है।

हिंदी कलैंडर का पांचवां महीना श्रवण, अंग्रेज़ी कलैंडर के 7 – 8 महीने यानी जुलाई या अगस्त में पड़ता है। श्रावण महीने का महत्व हिन्दू धर्म में काफी अधिक दिया गया है। इस महीने में रक्षाबंधन के अलावा और भी कई अन्य पर्व मनाए जाते हैं तथा विशेष पूजा अर्चना की जाती है। श्रवण महीने का महत्व हिंदी भाषी राज्यों जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान इत्यादि राज्यों में विशेष रूप से हैं।

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