स्वामी विवेकानंद का असली नाम क्या था । Real name of swami vivekananda in hindi

पूरे विश्व में स्वामी विवेकानंद के नाम से विख्यात भारत के इस युवा सन्यासी को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। हालांकि जो लोग अभी स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व से परिचीत नहीं हैं उनकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वामी विवेकानंद पश्चिम के देशों में योग और वेदान्त का उपदेश देने वाले भारत के पहले और अब तक के श्रेष्ठतम व्यक्ति थे। स्वामी विवेकानंद का असली नाम नरेंद्र नाथ दत्ता था। नरेन्द्र्नाथ दत्ता या स्वामी विवेकानंद का जन्म सोमवार 12 जनवरी, 1863 को पूस महीने की शुक्ल सप्तमी के दिन कलकत्ता में हुआ था। स्वामी विवेकानंद जब छोटे थे और उन्होने सन्यास नहीं लिया था तब उन्हे नरेंद्र या नरेन के नाम से भी पुकारा जाता था। नरेंद्र से भी पहले उन्हे वीरेश्वर और बीलेह नामों से जाना जाता था।

नरेंद्र के पिता श्री विश्वनाथ दत्ता कलकत्ता उच्च न्यायालय के वकील थे और उनकी माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था। स्वामी विवेकानंद का जन्म कलकत्ता के एक मध्यवर्गीय बंगाली परिवार में हुआ था। स्वामी विवेकानंद के दादा श्री दुर्गा चरण दत्ता ने भी सन्यास ग्रहण किया था।

real name of swami vivekananda

स्वामी विवेकानंद भारत के उन प्रतिभाशाली और अत्यंत प्रभावशाली आध्यात्मिक पुरुषों में गिने जाते हैं जिन्होने 19वीं शताब्दी के अंत में पूरी दुनिया में हिन्दू धर्म के वास्तविक या असली रूप को लोगों के सामने रखा। स्वामी विवेकानंद के गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस की देख-रेख में नरेन्द्र्नाथ दत्ता का रूपान्तरण स्वामी विवेकानंद में हुआ था। 1893 के सितंबर महीने में अमेरिका के शिकागो में दिये गए अपने ओजस्वी और सर्व-धर्व समन्वय के भाषण से उन्होने अमेरिकावासियों को मोह लिया था। अपनी तीक्ष्ण बुद्धि, शास्त्रों के गहन अध्ययन और उज्ज्वल चरित्र से स्वामी विवेकानंद जहां भी गए लोगों को प्रभावित करते चले गए।

स्वामी विवेकानंद की समाधी का अनुभव –

श्री रामकृष्ण परमहंस के अनुसार नरेंद्र जन्म से ही ध्यान सिद्ध थे। वे नित्य-मुक्त जीवों की श्रेणी में आते थे जो संसार में केवल एक विशेष कार्य के लिए आते हैं और अपने कार्य की समाप्ती के बाद वापस चले जाते हैं। श्री रामकृष्ण परमहंस ने नरेंद्र को सप्तर्षियों का अवतार कहा था। उनका मानना था कि नरेंद्र का जन्म केवल लोक-शिक्षा के लिए हुआ है। नरेंद्र नाथ दत्ता या स्वामी विवेकानंद के जीवन के बारे में कई ऐतिहासिक घटनाएँ हैं जो प्रेरणादायक हैं।

वीरेश्वर से नरेंद्रनाथ दत्ता तक: स्वामी विवेकानंद के कई नाम

स्वामी विवेकानंद का जीवन करोड़ों लोगों के लिए आदर्श बना हुआ है। स्वामी विवेकानंद के असली नाम के विषय में महत्वपूर्ण बात यह है कि जब वे छोटे थे तो उनका नाम नरेंद्रनाथदत्ता नहीं था। वास्तव में उनकी माता ने उनके जन्म के लिए काशी में स्थित विरेश्वर शिव के मंदिर में पूजा-अर्चना करवाई थी। भगवान शिव के वीरेश्वर रूप की पूजा के बाद ही स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था। इसी कारण सबसे पहले स्वामी विवेकानंद के माता पिता ने उनका असली नाम भगवान शिव के वीरेश्वर रूप के नाम पर वीरेश्वर रखा गया था। यह नाम उनकी माता ने रखा था। स्वामी विवेकानंद का वीरेश्वर के अतिरिक्त एक नाम बीलेह  भी था। किन्तु उनके बड़े होने पर बंगाल के दत्ता परिवार की परम्पराओं के अनुसार उनका नाम वीरेश्वर से बदलकर नरेंद्रनाथ दत्ता रख दिया गया। यही नरेंद्रनाथ दत्ता नाम स्वामी विवेकानंद का असली नाम बन गया जिसका इस्तेमाल स्कूलों और अन्य औपचारिक जगहों पर किया जाता था। किन्तु नरेंद्र ने सनातन धर्म की परम्पराओं के अनुसार सन्यास ग्रहण करने के बाद अपना नाम बादल दिया था।

एक जोगी और वैरागी के रूप में भारत में वे कई जगहों पर भटके। अलग-अलग जगहों पर अपनी पहचान छुपा कर अंजान सन्यासी बने रहने के लिए स्वामी विवेकानंद ने कई नाम भी बदले थे। हालांकि अमेरिका में 1893 मेंआयोजित होने वाली धर्म संसद (Parliament of Religions, 1893) से पहले उन्होने अंतिम बार अपना नाम बदला और इस बार स्वामी विवेकानंद नाम रख लिया। इसी नाम से वे विश्व-विख्यात हुए और जुलाई 1902 में अपनी मृत्यु के समय तक वे स्वामी विवेकानंद के नाम से ही जाने जाते रहे।     

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