सौर पंचांग किसे कहते हैं ? saur panchang kise kahate hain

पांचांग दो शब्दों, पांच तथा अंग से मिल कर बना है। इसका उपयोग मुख्यतः ज्योतिष विद्या में किया जाता है। भारत में इसका इतिहास बहुत पुराना है। इसका उपयोग वैदिक काल से ही किया जाता रहा है। सौर पांचांग एक प्रकार का कैलेंडर ही है। इसका उपयोग  तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का पता लगाने के लिए किया जाता है। सौर पांचांग में चांद, नक्षत्र तथा सूर्य के आधार पर सभी चीज़ों यानी कि दिन, तिथि, योग इत्यादि का निर्धारण किया जाता है।

सौर पांचांग में विशेष रूप से सूर्य के आधार पर ही सभी चीज़ों का निर्धारण किया जाता है। सौर पांचांग में 12 सौर मास (महीने) मिल कर एक सौर वर्ष बनाते हैं। सौर मास वह समय होता है, जो कि सूर्य द्वारा किसी एक राशि को पार करने में समय लगता है। सौर मास में दिनों का निर्धारण सूर्य तथा चांद की गति के आधार पर किया जाता है।

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सौर पांचांग का उपयोग काफी समय से होता आया है। वैदिक काल से ही शुभ – अशुभ समेत ग्रहों इत्यादि की स्तिथि का पता लगाने के लिए सौर पांचांग का ही उपयोग किया जाता रहा है। वर्तमान समय में उपयोग होने वाले विभिन्न क्षेत्रीय कैलेंडर इसी सौर पांचांग पर ही आधारित हैं। वर्तमान समय में भी किसी न किसी रूप में भारत के लगभग अधिक्तर हिस्सों में सौर पांचांग को माना ही जाता है।

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