शेरशाह सूरी की मृत्यु कैसे हुई थी। Sher shah suri death in hindi

अफ़गान शासक शेरशाह सूरी का शासन केवल 1540 से 1545 इसवीं तक कायम रहा। अपने छोटे से शासन काल में शेरशाह ने कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों को सफलता पूर्वक अंजाम दिया था। ऐसा ही एक सैन्य अभियान बुंदेलखंड में स्थित कालिंजर के किले को जीतने के लिए किया गया था। इसी अभियान के दौरान शेरशाह सूरी की मृत्यु  22 मई, 1545 को चंदेल राजपूतों के खिलाफ लड़ते हुए, कालिंजर किले की घेराबंदी के दौरान, बारूद विस्फोट से घायल होने के बाद हुई थी।

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शेरशाह सूरी की कलिंजर की घेराबंदी और मृत्यु

शेरशाह सूरी ने 17 मई 1540 के दिन कन्नौज के युद्ध में हुमायूँ को पराजित कर के आगरा और दिल्ली पर भी सूर शासन की स्थापना कर दी थी। किन्तु शेरशाह सूरी को अपने राज्य की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए और साम्राज्य के विस्तार के लिए अलग-अलग मोर्चों पर कई युद्ध करने पड़े। कालिंजर के राजा कीरत सिंह ने अपने राज्य में बीर सिंह देव बुंदेला को शरण दे रखी थी। शेरशाह सूरी ने बीर सिंह देव बुंदेला को सौंप दिये जाने की मांग की जिसे कालिंजर के राजा कीरत सिंह ने नकार दिया। इस कारण शेरशाह सूरी ने 1545 में कलिंजर के किले का घेराव किया। शेरशाह सूरी की सेना ने कलिंजर के किले को चारों तरफ से घेराव तो कर लिया था किन्तु किले की चौड़ी और मजबूत दीवारों को वे नहीं तोड़ पा रहे थे।

अंततः शेरशाह सूरी ने बारूद से कलिंजर के किले की दीवारों और दरवाजों को उड़ाने का आदेश दिया। कलिंजर के किले की दीवारों के चारों तरफ बारूद की सुरंगे बिछाई गईं और रॉकेट के इस्तेमाल से उसके दरवाजों और दीवार के अंदर निशाना लगाने की कोशिश की गयी। इस दौरान शेरशाह सूरी भी वहीं मौजूद होकर अपनी सेना को नेतृत्व दे रहा था।

कालिंजर के किले पर कई रॉकेट दागे गए। दुर्भाग्यवश एक रॉकेट किले की दीवार से टकराकर वापस लौट आया और वहीं गिरा जहां शेरशाह सूरी खड़ा होकर सारा नजारा देख रहा था। उसके पास में गोले-बारूद का एक ढेर पड़ा था जहां वह रॉकेट आकर गिरा। रॉकेट गिरने के कारण गोले-बारूद के ढेर में आग लग गयी और विस्फोट होने लगे। इसी विस्फोट में शेरशाह सूरी भी बुरी तरह जल कर घायल हो गया। हालांकि इस घटना के बाद कालिंजर के किले पर शेर शाह सूरी की सेना ने कब्जा तो कर लिया किन्तु शेरशाह सूरी जीवित नहीं बचा। कालिंजर में 22 मई, 1545 के दिन बारूद विस्फोट से घायल होने के बाद शेरशाह सूरी की मृत्यु हुई। शेरशाह सूरी की मृत्यु के बाद उसका पुत्र इस्लाम शाह सूरी सुर साम्राज्य का उत्तराधिकारी बना।

शेरशाह सूरी का मकबरा

शेरशाह सूरी का मकबरा बिहार के सासाराम में एक कृत्रिम झील के बीच में स्थित है। सासाराम शेरशाह सूरी द्वारा बनाई हुई ग्रैंड ट्रंक रोड पर स्थित है। यह मकबरा 122 फीट ऊंचा है जो 16 अगस्त 1545 को बनकर तैयार हुआ था। इतिहासकारों का मानना है कि यदि शेरशाह सूरी अधिक दिन तक जीवित रहता तो भारत में मुग़लों को दोबारा शासन करने का मौका नहीं मिला होता।

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