सूचना का अधिकार क्या है ? Right to Information act 2005

सूचना का अधिकार विधेयक अथवा Right to Information act 2005 भारतीय संविधान में किए गए सबसे बड़े और सबसे क्रांतिकारी बदलावों में से एक है ।  कई लोगों का मानना है कि इस कानून के आने के पहले भारतीय नागरिक के पास सूचना प्राप्त करने का कोई अधिकार नहीं था । परंतु ऐसा  मानना बिल्कुल गलत होगा क्योंकि इस कानून के आने के पहले भी Freedom of Information Act 2002 भारतीय गणराज्य में लागू था। 

परंतु इस तत्कालीन कानून में कई कमियां थी और सूचना प्राप्त करने का ना तो तंत्र पूरी तरह स्पष्ट था ना ही सूचना प्राप्त करना इतना आसान था । इन्हीं परेशानियों को दूर करने के लिए सूचना का अधिकार विधेयक 2005 लाया गया । जिसके अनुसार देश के प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार दिया गया कि वह देश के किसी भी सरकारी संस्थान से जानकारी मांग सकता है और इस जानकारी के लिए उस संस्थान को 30 दिन का समय दिया जाएगा। 

suchna ka adhikar kya hota hai

जिसके भीतर उसे जानकारी उपलब्ध करानी होगी । सभी व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा की जा सके एवं यह तय किया जा सके कि उन्हें तय समय के भीतर ही उनके द्वारा मांगी गई जानकारी प्राप्त हो, इसके लिए सरकार ने Chief Information Commissioner अथवा  CIC  का पद बनाया । अब जब आपको इस प्रश्न का उत्तर मिल गया  कि ,सूचना का अधिकार क्या है ? तो आगे बढ़ते हैं और इस कानून के विषय में अन्य जानकारियों से आपको अवगत कराते हैं ।

सूचना का अधिकार : सूचना का अधिकार स्पष्ट रूप से यह निर्देश देता है कि हर एक भारतीय नागरिक को किसी भी सरकारी संस्था से जानकारी मांगने का पूरा अधिकार है । सरकारी संस्था को यह सूचना 30 दिन के भीतर प्रदान करनी होगी बशर्ते यह सूचना अपवादों के अंतर्गत ना आती हो । देश की सुरक्षा, व्यक्तिगत जानकारी एवं third party जानकारी इस कानून के अपवाद हैं , अर्थात आपको इन विषयों में जानकारी नहीं दी जा सकती ।

जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि  सरकारी संस्थान को यह जानकारी 30 दिन के भीतर प्रदान करनी होती है परंतु अगर किसी के जीवन मृत्यु का विषय है तो इस कानून के अंतर्गत जानकारी 48 घंटों के भीतर उपलब्ध करानी पड़ेगी । इस कानून में इस बात का भी प्रावधान है कि अगर संस्थान सही समय में जानकारी प्रदान नहीं करता है तो ₹250 प्रतिदिन का जुर्माना लग सकता है जो अधिकतम ₹25000 तक पहुंच सकता है ।

अगर नागरिक को जानकारी सही समय में प्राप्त नहीं होती है तो वह विभाग के द्वारा नियुक्त किए गए सूचना अधिकारी के सामने अपील कर सकता है । विभाग के द्वारा नियुक्त किए गए सूचना अधिकारी से भी संतुष्ट नहीं होने पर वह राज्य के Information commission के सामने अपनी समस्या रख सकता है और वहां से भी संतुष्टि ना मिलने पर वह केंद्रीय Information commission  के सामने अपनी बात रख सकता है ।

प्रत्येक भारतीय को उसका उचित अधिकार मिल सके इसीलिए केंद्रीय सरकार ने  केंद्रीय Information commission का गठन किया है जिसका काम इसी तरह की समस्याओं को देखना है । हमें उम्मीद है कि सूचना के अधिकार से जुड़े हुए आपके सवालों के उत्तर आपको मिल गए होंगे । ऐसी ही अन्य रोचक जानकारियों के लिए हमारे साथ बने रहे ।

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