स्वतंत्र भारत की पहली महिला गवर्नर कौन थी।

भारतीय लॉ के हिसाब से गवर्नर यानी राज्यपाल किसी भी राज्य का कानूनन प्रमुख होता है। भारत में 29 राज्य हैं और इन सभी के कानूनन प्रमुख गवर्नर ही होते हैं। भारत में गवर्नर की नियुक्ति भारत के वर्तमान राष्ट्रपति करते हैं। गवर्नर राज्यों में राष्ट्रपति के प्रतिनिधित्व होते हैं। एक राज्य में गवर्नर के पास कई अधिकार होते हैं। राज्य में किसी भी तरह का कानून राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद ही लागू हो सकता है।

india ki first mahila governor naam

देश की आज़ादी के बाद से ही अलग – अलग राज्यों में गवर्नर की नियुक्ति होती रही है। लोकतांत्रिक देश होने के नाते, राष्ट्रपति द्वारा चुना गया कोई भी व्यक्ति गवर्नर बन सकता है, चाहे वह पुरूष हो या महिला। इस तरह देखें तो अलग अलग राज्य में समय – समय पर कई महिला गवर्नर की नियुक्ति होती रही है। हाल ही में उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में बेबी रानी मौर्या की नियुक्ति हुई है। यह उत्तराखंड के इतिहास की सिर्फ दूसरी महिला राज्यपाल हैं। देश में पहली बार गवर्नर के पद पर महिला की नियुक्ति की बात करें तो पहली बार गवर्नर के रूप में सरोजिनी नायडू ( Sarojini Naidu ) की नियुक्ति हुई थी। देश की पहली महिला गवर्नर सरोजिनी नायडू ही हैं। इनकी नियुक्ति उत्तर प्रदेश के गवर्नर के रूप में हुई थी। इनका कार्यकाल 15 अगस्त 1948 से ले कर 2 मार्च 1949 तक रहा था।

सरोजनी नायडू – देश की पहली महिला गवर्नर

सरोजनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को एक बंगाली हिन्दू परिवार में हुआ था। नायडू को देश Indian Independence Activist और एक कवि के रूप में जाना जाता है। सरोजिनी बचपन से ही पढ़ने लिखने में काफी तेज थीं। और समय के सात इनका  पढ़ाई का जुनून भी तेज होता गया। काफी कम उम्र में ही इन्होने अपनी पहली आंग्रेज़ी कविता लिख ली थी। इनकी कई बेहतरीन कविताएं हैं। इनकी इस उपलब्धि के लिए इन्हें भारत की बुलबुल ( Nightingale of India ) की भी उपाधि दी गयी थी।

गांधी जी से प्रेरित हो कर सरोजनी नायडू उनके सात जुड़ गई और देश की आज़ादी के लिए चलाए जा रहे संघर्षों में बढ़ – चढ़ कर भाग लिया। स्वराज आंदोलन में इनके योगदान के लिए श्रीमती नायडू को खासा याद किया जाता है। यह कांग्रेस पार्टी से भी जुड़ी गयी। बाद में यह Congress Party की अध्यक्ष भी चुनी गई। 1925 में Congress के कानपुर अधिवेशन में इन्हें पार्टी का 44वां अध्यक्ष चुना गया।

सरोजिनी नायडू की शिक्षा

इन्होंने अपनी दसवीं की परीक्षा मद्रास यूनिवर्सिटी से पूरी की। इसके बाद कुछ कारणों से यह 4 साल के लिए पढ़ाई से दूर हो गई। इसके बाद इन्हें एक बार फिर से एक Trust द्वारा मिली मदद से फिर से पढ़ाई शुरू करने का मौका मिल गया। हैदराबाद के छठे निज़ाम रहे मीर महबूब अली खान ने 1895 में H.E.H The Nizam’s Charitable Trust  की शुरुआत की। इसका मकसद छात्रों को को पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप दी जाती थी। इसके तहत 2000 छात्रों को फायदा होता था। इसी के तहत नायडू भी आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गयीं जहां इन्होंने Kings College London और Girton College Cambridge से पढ़ाई की।

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