तराइन का दूसरा युद्ध कब और क्यों हुआ था ?

तराइन का दूसरा युद्ध कब हुआ था ? यह जानने से पहले आपको पहले युद्ध के कारण एवं उसके परिणामों को समझना आवश्यक है , हम निवेदन करते हैं कि इस विषय में हमारे द्वारा लिखा गया Article जरूर पढ़ें । तराइन का दूसरा युद्ध 1192 में हुआ । तराइन का दूसरा युद्ध मोहम्मद  गौरी  एवं पृथ्वीराज चौहान के बीच में हुआ । तराइन के दूसरे युद्ध का कारण यह था कि मोहम्मद गौरी को यह अहसास हो गया था कि भारतीय राजाओं में एकता नहीं है और वह एक बार फिर प्रयास कर भारत पर विजय प्राप्त कर सकता है ।

इसका एक कारण यह भी था कि प्रथम युद्ध में उसे मारा नहीं गया बल्कि जिंदा छोड़ दिया गया परंतु पहले युद्ध की Humiliation अभी भी उसके दिमाग में थी और वह इसका बदला लेना चाहता था । वैसे जाते-जाते आपको यह बात बता दें कि बहुत छोटी संख्या में ही सही कुछ इतिहासकार यह भी मानते हैं कि दूसरा तराइन का युद्ध 1191 के अंत में हुआ ना कि 1192 में परंतु ऐसा मानने वाले इतिहासकारों की संख्या बहुत कम है ।अब जब आपने इस सवाल का जवाब जान लिया कि , तराइन का दूसरा युद्ध कब हुआ था ? तो आगे बढ़ते हैं और आपको इस युद्ध की गतिविधियों एवं इनके परिणामों से अवगत कराते हैं ।

tarain ka dusra yudh kab hua tha

दूसरे युद्ध की गतिविधियां एवं उसके परिणाम  अथवा Activities of Second war and its result

आप तराइन के दूसरे युद्ध के कारणों को तो पहले समझ ही चुके हैं । तराइन के प्रथम युद्ध में हार के बाद मोहम्मद गौरी ने हार के कारणों का अवलोकन किया और यह पता लगाया कि राजपूत सेना बहुत ही अनुशासित है इसीलिए उनसे सीधी लड़ाई अगर की जाएगी तो एक बार फिर से मोहम्मद गौरी को हार का सामना करना पड़ेगा । इस बात को ध्यान रखते हुए मोहम्मद गौरी एवं उसके सेनापतियों ने एक रणनीति बनाई जिसके तहत वे अपनी सेना के घुड़सवारों को चार भागों में बांट देंगे और यह चार समूह पृथ्वीराज की सेना को घेरने का प्रयास करेंगे ।

जब युद्ध शुरू हुआ तो मोहम्मद गौरी के सेनापतियों ने  यही रणनीति अपनाई उन्होंने पृथ्वीराज की सेना पर सीधे आक्रमण ना करके अपनी सेना को विभिन्न भागों में विभाजित कर अलग अलग दिशाओं से आक्रमण किया । दुर्भाग्यवश मोहम्मद गौरी की यह रणनीति सही रही और पृथ्वीराज चौहान को दूसरे युद्ध में हार का मुंह देखना पड़ा ।  इस युद्ध का पहला परिणाम यह हुआ कि भारत में पहली बार दिल्ली शहर पर बाहर के शासक का कब्जा था ।

दूसरा परिणाम यह हुआ कि इस युद्ध के पश्चात पृथ्वीराज चौहान को बंदी बना लिया गया । इस युद्ध का तीसरा परिणाम यह हुआ कि मोहम्मद गौरी वापस लौट गया और उसने भारत पर कुतुबुद्दीन ऐबक को बिठा दिया जो कि गुलाम वंश का स्थापक माना जाता है । गुलाम वंश भारत पर कई वर्षों तक राज करने वाला था ।

हमें उम्मीद है कि तराइन के दूसरे युद्ध के विषय में आपको सभी प्रश्नों के जवाब मिल गये होंगे । ऐसी ही अन्य जानकारियों के लिए हमारे साथ लगातार बने रहे ।

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