“वन्दे मातरम्” किसने लिखा था ?

भारत में राष्ट्रगान तथा राष्ट्रगीत का विशेष महत्व है। लेकिन अक्सर आम जन इसमें विभेद नही कर पाते, और इस बात को लेकर confused रहते है। इसका मुख्य कारण इन दोनों को लेकर स्पष्टता की कमी है। इस पोस्ट में आप इसको आसानी से समझ पाएंगे। भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन” है, जिसकी रचना रवीन्द्र नाथ टैगोर ने की थी, एवं “वन्दे मातरम” भारत का राष्ट्रगीत है। परन्तु इसको किसने लिखा, इसका ज्ञान बहुत कम लोगो को है।

vande mataram kisne likha tha

वन्दे मातरम के लेखक

भारत का राष्ट्रगीत कहे जाने वाले ” वन्दे मातरम” गीत को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा। इस गीत की रचना 1870 में की गई थी। जिसका प्रकाशन 1882 में उनके ही एक उपन्यास में किया गया था। वन्दे मातरम गीत की भाषा संस्कृत तथा बांग्ला मिश्रित है। इस गीत का मुखड़ा तथा पहला पद संस्कृत भाषा मे है, जबकि उसके बाद इसको बांग्ला भाषा मे पूर्ण किया गया। बंकिम जी ने “वन्दे मातरम” शब्द का अर्थ, “माता की वन्दना करता हूँ”, बताया है। स्वतंत्रता के बाद 26 जनवरी 1950 में डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने संविधान सभा मे इसको राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया।

बंकिमचंद्र जी का परिचय

“वन्दे मातरम” के लेखक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जन्म 27 जून 1838 में बंगाल के कंठालपाड़ा मे हुआ। यह नैहाटी के पास स्थित है। उनके पिताजी सरकारी नौकरी  मे लिप्त व्यक्ति थे। बंकिम अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। इनकी प्रारंभिक शिक्षा मिदनापुर मे ही हुई। उसके बाद आगे की पढ़ाई हुगली कॉलेज तथा प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता से सम्पन्न हुई। Arts विषय से उन्होंने अपना graduation 1858 मे किया। उसके बाद 1869 में law की डिग्री भी प्राप्त की। उसके उपरांत उन्होंने 1858 मे deputy collector का पद jessore में प्राप्त किया। उनके पश्चात उन्होंने deputy मजिस्ट्रेट का पद भी संभाला। परन्तु लेखन के प्रति उनके प्रेम ने, उनको अपनी ओर खींच लिया। 1891 मे सरकारी नियुक्तियों को छोड़कर उन्होंने लेखन का कार्य शुरू किया।

उनकी प्रथम रचना का शीर्षक Rajmohan’s Wife था।  जिसको उन्होने English भाषा मे लिखा था। उस समय बिरले ही लोगो के पास यह कला थी। इसके पश्चात उन्होंने अपनी प्रथम बांग्ला कृति “दुर्गेशनंदिनी” मार्च 1865 मे लिखी। यह एक रूमानी रचना थी। उनके द्वारा 1866 मे लिखी गई “कपालकुंडला” भी लोगो को बेहद रास आई। बंकिम ने उसके बाद मासिक पत्रिका अप्रैल 1872 में “बंगदर्शन” के रूप मे लिखी।

बंकिम ने अपने जीवन का सबसे मुख्य उपन्यास 1882 मेआनंदमठ के रूप में लिखा। इसी के तीसरे अध्याय में उन्होंने राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम” को लिखा। राजनीतिक उपन्यास के रूप में लिखे आनंदमठ मे 1773 मे उत्तर बंगाल के संन्यासी विद्रोह का वर्णन किया गया था। जिसमे देशभक्ति की भावना निहित थी। बंकिम की अन्य मुख्य रचनाये मृणालिनी, इंदिरा, राधारानी, कृष्णकांतेर दफ्तर तथा देवी चौधरानी है। उन्होंने अपना अंतिम उपन्यास 1886 मे “सीताराम” के रूप में लिखा। 55 वर्ष की अल्प आयु में ही 8 अप्रैल 1894 को ही बंकिमचंद्र ने दुनिया से विदा ले ली थी। अपने विशुद्ध लेखन से उन्होंने भारतीय संविधान को राष्ट्रगीत के रूप में एक विशेष रचना प्रदान की, जबकि साहित्य के क्षेत्र में उनका योगदान बहुमूल्य तथा प्रशंसनीय है।

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