विश्वनाथ प्रताप सिंह की जीवनी – Vishwanath Pratap Singh Biography In Hindi

  • श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह
  • भारत के प्रधानमंत्री – आठवें (8)
  • कार्यकाल :- 2 दिसंबर 1989 से 10 नवंबर 1990
  • जन्म :- 1931
  • मृत्यु :- 2008
  • राजनीतिक पार्टी :-  कॉंग्रेस, जनता दल
  • निर्वाचन क्षेत्र :- प्रयागराज ( इलाहाबाद )

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विश्वनाथ प्रताप सिंह का प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा

श्री वी.पी. सिंह (V. P. Singh) जिनका पूरा नाम श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह था, भारत के आठवें प्रधानमंत्री थे। श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में 25 जून, 1931 को दैया के राजपूत गहरवार (राठौर) ज़मींदार परिवार में हुआ था। विश्वनाथ प्रताप सिंह के पिता राजा भगवती प्रसाद सिंह थे। मांडा रियासत के राजा (शासक) राजा बहादुर राम गोपाल सिंह ने 1936 में श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को गोंद लिया था। इसी मांडा रियासत में वे बाद में शासक भी बने। श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का विवाह 25 जून, 1955 के दिन सीता कुमारी के साथ सम्पन्न हुआ था। उनके दो पुत्र श्री अभय सिंह और अजय सिंह हैं।

श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा देहरादून के कर्नल ब्राउन कैम्ब्रिज स्कूल से पूरी की थी। इसके बाद उन्होने स्नातक की डिग्री के लिए Allahabad और Pune (पूना) Universities में अध्ययन किया। उनके पास Graduation की दो और एक Law की डिग्री थीं। अपने मित्रों के बीच वे Raja Sahab के नाम से जाने जाते थे।

विश्वनाथ प्रताप सिंह का राजनीतिक जीवन

अपनी शिक्षा के दिनों से ही विश्वनाथ प्रताप सिंह सामाजिक जीवन में काफी सक्रिय थे। वी॰ पी॰ सिंह जी का राजनीतिक कैरियर कॉलेज के दिनों से ही तब शुरू हुआ जब वे वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज में 1947-48 में छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में चुने गए। इसके बाद राजनीतिक रूप से वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र संघ के उपाध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय थे।

विद्वतापूर्ण व्यक्तित्व वाले वी॰ पी॰ सिंह ने 1957 में भूदान आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया और इलाहाबाद जिले में स्थित पसना गाँव में अपनी कुछ भूमि स्वेच्छा से दान कर दी। सामाजिक रूप से संवेदनशील और गरीबों के प्रति Sympathy रखने वाले श्री वी॰ पी॰ सिंह ने Allahabad के कोरांव में Gopal School, इंटरमीडिएट कॉलेज की स्थापना भी की थी।

वी॰ पी॰ सिंह जी के समय में देश की राजनीति में काँग्रेस सबसे महत्वपूर्ण संस्था हुआ करती थी। विश्वनाथ प्रताप सिंह ने देश सेवा के लिए 1969 में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। काँग्रेस पार्टी के टिकट पर उन्होने उत्तर प्रदेश की विधान सभा के लिए चुनाव जीता और विधायक बने। 1971 में हुए आम चुनावों में भी उन्होने भाग लिया और Lok Sabha चुनाव जीतकर पहली बार सांसद (Member of Parliament) बने।

विश्वनाथ प्रताप सिंह ने प्रधानमंत्री बनने से पहले राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया था। इनमें 1969-71 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कार्यकारी समिति के सदस्य, अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य, 1969-71 में ही उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य, 1970-71 में कांग्रेस विधायक दल के व्हिप, 1971-74 में लोकसभा में सांसद, अक्टूबर 1974-नवंबर 1976 में केंद्रीय उप-वाणिज्य मंत्री, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री नवंबर 1976-मार्च 1977, जनवरी 3-जुलाई 26,1980 में लोकसभा सांसद, 9 जून, 1980- 28 जून, 1982 के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, 21 नवंबर, 1980-जून 14,1981 के बीच विधान परिषद, उत्तर प्रदेश के सदस्य, 15 जून, 1981 -16 जुलाई, तथा 1983 के बीच विधान सभा, उत्तर प्रदेश के सदस्य के रूप में किए गए कार्य प्रमुख हैं।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 1980 से लेकर 1982 के बीच रहते हुए दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विशेषकर चंबल में डकैत समस्या को दूर करने के लिए अथक प्रयास किया। किन्तु डकैतों और ठगों के गिरोहों द्वारा लूट और Murder पर अंकुश लगाने में V. P. Singh पूरी तरह सफल नहीं हो सके। हालांकि विश्वनाथ प्रताप सिंह जी का मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल ईमानदारी और निष्ठा से भरपूर था। 1983 में विश्वनाथ प्रताप सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद से 1982 में इस्तीफा दे दिया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद त्यागने के बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह को केंद्र सरकार में पुनः जनवरी 29,1983 से वाणिज्य मंत्री के रूप में कार्यभार दिया गया। वाणिज्य मंत्री के अतिरिक्त उन्होंने फरवरी 15,1983 में आपूर्ति विभाग का कार्यभार भी संभाला। जुलाई 16, 1983 में विश्वनाथ प्रताप सिंह को राज्य सभा से सांसद के रूप में चुना गया। इसी दौरान उन्हे उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का पद 1 सितंबर, 1984 को दिया गया।

राजीव गांधी की सरकार में विश्वनाथ प्रताप सिंह

श्रीमती इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर विश्वनाथ प्रताप सिंह जी को 31 दिसंबर, 1984 के दिन केंद्रीय मंत्रिमंडल में भारत के वित्त मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गयी।

Finance Minister के रूप में श्री V. P. Singh ने National और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक कुशल Minister के रूप में Popularity प्राप्त की। भारत की प्रमुख industrial और व्यापारिक कंपनियों पर tax fraud के संदेह के चलते उन्होने छापे (Raids) भी मरवाये। उनके कार्यकाल में ही भारत में होने वाली gold smuggling में काफी गिरावट आई। उन्होने सोने पर लगने वाले tax को घटा दिया था। किन्तु जल्द ही राजीव गांधी ने उनसे वित्त मंत्रलाय का पदभार लेकर रक्षा मंत्री का पद दे दिया। रक्षा मंत्री के रूप में विश्वनाथ प्रताप सिंह ने भारत में Defence Purchases की जांच शुरू की जिसमें बोफोर्स (Bofors) रक्षा सौदे भी शामिल थे। बोफोर्स सौदे के ऊपर कोई कार्यवाही होने से पहले ही विश्वनाथ प्रताप सिंह जी को केंद्रीय मंत्रिमंडल और Defence Minister के पद से बर्खास्त कर दिया गया। इस घटना के बाद श्री V. P. Singh ने राजीव गांधी से दूरी बना ली तथा Congress पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसी समय लोक सभा में Member of Parliament के रूप में अपनी सदस्यता से भी उन्होने इस्तीफा दे दिया।

जन मोर्चा और जनता दल

काँग्रेस पार्टी से अलग होने के बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अरुण नेहरू और आरिफ मोहम्मद खान के साथ मिलकर जन मोर्चा नाम की एक राजनीतिक पार्टी का गठन किया। जन मोर्चा और अन्य पार्टियों जैसे कि जनता पार्टी, लोकदल और कांग्रेस (एस) को मिलाकर 11 अक्टूबर 1988 के दिन जनता दल नाम कि एक नई पार्टी का गठन किया गया। इस पार्टी का गठन Opposition Parties को मिलने के लिए किया गया था जिससे कि राजीव गांधी का Elections में सामना किया जा सके। नवनिर्मित Janata Dal के अध्यक्ष के रूप में विश्वनाथ प्रताप सिंह को मनोनीत किया गया। भारत की राजनीति में जनता दल और कई क्षेत्रीय पार्टियों के मिलन से बने गठबंधन को राष्ट्रीय मोर्चा या National Front के नाम से जाना गया। National Front (राष्ट्रीय मोर्चा) के president एन॰ टी॰ रामाराव तथा संयोजक के पद पर विश्वनाथ प्रताप सिंह को मनोनीत किया गया।

नवंबर 1989 में हुए लोक सभा चुनावों में राजीव गांधी की काँग्रेस पार्टी ज्यादा सीटें जीतने में असफल रही। वहीं दूसरी तरफ विश्वनाथ प्रताप सिंह के Janata Dal ने उम्मीद से ज्यादा सीटें जीतकर government बनाने की दावेदारी पेश की। इसमें जनता दल को BJP (भारतीय जनता पार्टी) और कम्युनिस्ट लेफ्ट फ्रंट जैसी पार्टियों का समर्थन भी प्राप्त हुआ जिंहोने सरकार में शामिल होने की अपेक्षा केवल बाहर से Support देना अधिक उचित समझा।

प्रधानमंत्री के पद पर

नवंबर 1989 के लोक सभा चुनावों के बाद राष्ट्रीय मोर्चा के नेता के रूप में विश्वनाथ प्रताप सिंह ने गठबंधन सरकार बनाई। 2 दिसंबर 1989 के दिन उन्होने भारत के प्रधानमंत्री का पद स्वीकार किया।  विश्वनाथ प्रताप सिंह गठबंधन की सरकार के प्रमुख होने के चलते अधिक दिन तक प्रधानमंत्री के पद पर तिक नहीं सके। उनके गठबंधन में कई विवाद सामने आने लगे। इसके अलावा Cast और Religious रूप से विभाजित राजनैतिक दलों को एकजुट करना भी मुश्किल हो रहा था। सहायक दलों और सांसदों (MPs) के द्वारा Support वापस लिए जाने और लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद 10 नवम्बर 1990 को वे प्रधानमंत्री के पद से हट गए। 27 नवम्बर 2008 को नई दिल्ली में विश्वनाथ प्रताप सिंह का निधन हुआ।

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