पश्चिम बंगाल में लोकसभा की कितनी सीटें है ।

भारत के सभी राज्यों में लोकसभा की सीटों का बंटवारा वहाँ की जनसंख्या के अनुसार किया जाता है। पश्चिम बंगाल राज्य कुल 42 संसदीय क्षेत्रों में बंटा है। इस कारण पश्चिम बंगाल में लोकसभा की कुल 42 सीटें हैं। अधिक लोकसभा सीटें होने के कारण  पश्चिम बंगाल लोकसभा चुनावों में अहम स्थान रखता है। पश्चिम बंगाल में लोकसभा की सीटों का यह आंकड़ा वर्ष 1976 से स्थिर है जब संविधान (चालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 के द्वारा भारत में लोकसभा सीटों को फ्रीज़ कर दिया गया था। पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटें वर्ष 2026 तक निश्चित हैं और ये घट-बढ़ नहीं सकती हैं। वर्तमान में राज्यों की लोकसभा सीटें वर्ष 1971 की जनगणना के अनुसार तय की गईं थीं।

west bengal me lokshabha me ki seat

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 81 के अनुसार भारत की लोकसभा में 550 से ज्यादा सदस्य नहीं होने थे। लोकसभा की सीटों का राज्यों में बंटवारा इस तरह किया गया है कि किसी भी राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या और उस राज्य की जनसंख्या का अनुपात सभी राज्यों के लिए जहां तक संभव हो बराबर या एक समान हो।

  • पश्चिम बंगाल                                                                                
  • लोकसभा सीटें: 42
  • राज्य सभा सीटें: 16

पश्चिम बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीटों के नाम

  1.  कूच बिहार
  2. अलीपुरद्वार
  3. जलपाईगुड़ी
  4. दार्जिलिंग
  5. रायगंज
  6. बालुरघाट
  7. मालदा
  8. जंगीपुर
  9. मुर्शिदाबाद
  10. बेहरामपुर
  11. कृष्णनगर
  12. नबाद्वीप
  13. बारासात
  14. बसीरहाट
  15. जयनगर
  16. मथुरापुर
  17. डायमंड हार्बर
  18. जादवपुर
  19. बैरकपुर
  20. दमदम
  21. कलकत्ता उत्तर पश्चिम
  22. कलकत्ता नॉर्थ ईस्ट
  23. कलकत्ता दक्षिण
  24. हावड़ा
  25. उलूबेरिया
  26. सेरामपुर
  27. हुगली
  28. आरामबाग
  29. पंसकुरा
  30. तमलुक
  31. कन्टाई
  32. मिदनापुर
  33. झारग्राम
  34. पुरुलिया
  35. बांकुरा
  36. विष्णुपुर
  37. दुर्गापुर
  38. आसनसोल
  39. बर्दवान
  40. कटवा
  41. बोलपुर
  42. बीरभूम

पश्चिम बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीटों पर प्रत्यक्ष मतदान होता है। राज्य सभा सीटों के लिए अप्रत्यक्ष मतदान करने की व्यवस्था होती है। हालांकि 2026 तक राज्यों में लोकसभा की सीटों की संख्या को निश्चित कर दिये जाने से जनसंख्या नियंत्रण के लिए नीतियाँ बनाने में राज्यों को सुविधा हुई है। यदि ऐसा नहीं किया गया होता तो अधिक जनसंख्या के कारण अधिक लोकसभा सीटें मिलने की उम्मीद में राज्य जनसंख्या नियंत्रण पर अधिक ध्यान नहीं देते।

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